भारत के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नया दावा
भारत
चेतना मंच
17 Oct 2025 01:32 PM
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें यह आश्वासन दिया है कि भारत रूस से तेल (Oil) खरीदना बंद कर देगा। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई है। यह ट्रंप (Trump) का पहला विवादास्पद दावा नहीं है, और न ही यह पहली बार है जब उन्होंने भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर दबाव डाला है।—International News
भारत—रूस से अपनी कुल तेल आपूर्ति का लगभग 35 प्रतिशत खरीदता है। यह तेल भारतीय उपभोक्ताओं के लिए आवश्यक है, और विदेश मंत्रालय ने इसे भारतीय हितों की रक्षा के रूप में जायज़ ठहराया है। ट्रंप (Trump) ने अगस्त में रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदने के लिए भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया था, जिससे अमेरिकी टैरिफ कुल 50 प्रतिशत तक पहुंच गया। उनका कहना है कि भारत रूस से तेल खरीदकर उसे रिफाइन करके दूसरे देशों को बेचता है, जिससे रूस की युद्ध मशीनरी को मदद मिल रही है।
यह घटनाक्रम यूक्रेन युद्ध के बाद से बढ़ते अमेरिकी दबाव को दर्शाता है। 15 अगस्त को ट्रंप (Trump) ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी, जिसके बाद से उनके प्रशासन ने रूस की तेल अर्थव्यवस्था को निशाना बनाने के लिए दो प्रमुख रणनीतियों को अपनाया। इनमें से एक रणनीति रूस के सबसे बड़े तेल खरीदारों, भारत और चीन पर अतिरिक्त टैरिफ लगाना है। ट्रंप की टीम ने चीन पर रूसी तेल के लिए 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव भी रखा है, जिसका समर्थन 85 अमेरिकी सीनेटरों ने किया है।
रूस, सऊदी अरब के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक है, और उसकी अर्थव्यवस्था का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा तेल निर्यात से आता है। रूस प्रतिदिन लगभग 70 से 80 लाख बैरल तेल निर्यात करता है। रूस की तेल रिफाइनिंग और निर्यात प्रणाली के खिलाफ पश्चिमी देशों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, और यूरोपीय संघ रूसी तेल पर लगाए गए प्राइस कैप को और कड़ा करने की योजना बना रहा है।
रूस अपनी तेल और गैस आपूर्ति को चीन और भारत जैसे रणनीतिक साझेदारों के साथ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत को अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों की पेशकश करने के साथ-साथ रूस ने अपने सहयोगियों से यूरोपीय देशों को नुकसान पहुंचाने के लिए नए ऊर्जा रास्तों की तलाश शुरू कर दी है।
इस बीच, भारत सरकार को पश्चिमी देशों से बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन उसकी ऊर्जा और सुरक्षा रणनीतियाँ भविष्य में किस दिशा में आगे बढ़ेंगी, यह देखना दिलचस्प होगा।