
रविवार को यमन के तट से लगे अदन की खाड़ी में एक और प्रवासी नौका हादसे का शिकार हो गई। नाव में सवार 154 प्रवासियों में से सिर्फ 12 को जीवित बचाया जा सका, जबकि बाकी 142 की मौत हो गई। यह सभी प्रवासी इथियोपिया के नागरिक थे, जो खाड़ी देशों में रोज़गार की तलाश में निकले थे। इस हादसे की जानकारी संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के यमन प्रमुख अब्दुसत्तोर एसोव ने दी। फ्रांस के ल्योन से संचालित समाचार चैनल ‘अफ्रीकान्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 68 से अधिक शव समुद्र से बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें अधिकांश शव पश्चिमी यमन के खानफा तट पर मिले हैं। शेष लापता लोगों को मृत मान लिया गया है। International News
घटना के बाद अबयान सुरक्षा निदेशालय ने व्यापक स्तर पर खोज और बचाव अभियान चलाया। हालांकि समुद्र की तेज़ लहरों और मुश्किल भूगोल ने राहत कार्य को सीमित कर दिया। इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है — क्या दुनिया प्रवासियों की मौतों को सिर्फ गिनती भर मानेगी?
संयुक्त प्रवासन केंद्र के अनुसार, हर साल हजारों अफ्रीकी — विशेष रूप से इथियोपिया, सोमालिया और इरिट्रिया से — खाड़ी देशों की ओर जाते हैं। वे अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र से लाल सागर पार करते हुए यमन होते हुए खाड़ी देशों में रोज़गार की तलाश करते हैं।लेकिन यह रास्ता जितना पुराना है, उतना ही जानलेवा भी।मानव तस्करों के चंगुल में फंसे ये प्रवासी अक्सर खचाखच भरी, असुरक्षित नौकाओं में यात्रा करते हैं, जो ज़रा सी लहर आने पर समुद्र में समा जाती हैं। International News