
Shubhanshu Shukla : Space X के ड्रैगन यान और Axiom मिशन-4 (Ax-4) के चार अंतरिक्ष यात्रियों का पृथ्वी पर लौटना अब अंतिम चरण में है। 15 जुलाई 2025 को यह दल अमेरिका के सैन डिएगो तट के समीप प्रशांत महासागर में 'स्प्लैशडाउन' करेगा — यानी जल पर सुरक्षित लैंडिंग। इस मिशन को भारत के लिए और भी खास बना दिया शुभांशु शुक्ला की मौजूदगी ने, जिन्होंने अंतरिक्ष में देश का परचम लहराया।
2:07 PM — डी-ऑर्बिट बर्न: यान का इंजन चालू होगा, जिससे वह अपनी कक्षा से बाहर निकलकर पृथ्वी की ओर बढ़ेगा।
2:26 PM — ट्रंक जेटिसन: यान का अनावश्यक हिस्सा अलग कर दिया जाएगा।
2:30 PM — नोज कोन क्लोजर: यान का अगला हिस्सा बंद कर दिया जाएगा ताकि वह वायुमंडलीय दबाव को झेल सके।
2:57 PM — ड्रोग पैराशूट्स तैनात: धीमी गति के लिए पहले छोटे पैराशूट खोले जाएंगे।
2:58 PM — मुख्य पैराशूट्स खुलेंगे: बड़े पैराशूट यान को सुरक्षित तरीके से नीचे लाने में मदद करेंगे।
3:00 PM — स्प्लैशडाउन: यान प्रशांत महासागर की सतह पर सुरक्षित उतरेगा।
इस दौरान ‘ड्रैगन’ एक तेज़ सोनिक बूम उत्पन्न करेगा — यह ध्वनि की गति पार करने पर पैदा होने वाली ध्वनि तरंग है, जो सैन डिएगो तट के लोगों के लिए एक रोमांचकारी अनुभव बन सकती है। 25 जून को लॉन्च और 26 जून को ISS से जुड़ने वाले इस मिशन में चार देशों के प्रतिनिधि शामिल रहे:
पैगी व्हिटसन (संयुक्त राज्य अमेरिका) – कमांडर, नासा की सबसे अनुभवी महिला अंतरिक्ष यात्री।
शुभांशु शुक्ला (भारत) – पायलट, इसरो के प्रतिनिधि और भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री।
स्लावोश उज़नांस्की-विस्निव्स्की (पोलैंड) – यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के वैज्ञानिक।
टिबोर कपु (हंगरी) – ह्यूनर प्रोग्राम के अंतरिक्ष यात्री।
इन चारों ने मिलकर अंतरिक्ष में 18 दिन बिताए और 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग पूरे किए। इनमें शामिल रहे मानव शरीर की मांसपेशीय हानि, मानसिक स्वास्थ्य पर भारहीनता का प्रभाव, और अंतरिक्ष में फसल उत्पादन जैसे शोध जो धरती पर चिकित्सा और कृषि अनुसंधान के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होंगे।
अंतरिक्ष में ‘ग्रुप फोटो’ लेना एक चुनौती है, क्योंकि वहां ‘क्लिक’ करने के लिए कोई नहीं होता। Ax-4 टीम ने इसका शानदार समाधान निकाला — ऑटोमैटिक कैमरा, जो हर 5 सेकंड में एक तस्वीर खींचता है। यात्री अपनी पोजिशन लेते, मुस्कराते और तस्वीरें बन जातीं यादगार। इस मज़ेदार प्रयोग ने मिशन में हल्का-फुल्का इंसानी स्पर्श भी जोड़ा। शुभांशु शुक्ला भले ही धरती पर लौट आए हों, लेकिन सामान्य जीवन में लौटने में उन्हें अभी वक्त लगेगा। उन्हें पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से दोबारा तालमेल बिठाने के लिए 7 दिन के पुनर्वास (rehabilitation) कार्यक्रम से गुजरना होगा। इस दौरान वे विशेषज्ञों की देखरेख में रहेंगे, जहां उनके न्यूरोलॉजिकल और शारीरिक प्रतिक्रियाओं पर बारीकी से निगरानी रखी जाएगी। Shubhanshu Shukla