जब अब्राहम लिंकन का नम्बर आया तो कक्षा-8 में पढ़ने वाले अब्राहम लिंकन ने कहा कि बड़ा होकर मैं अमेरिका का राष्ट्रपति बनूंगा। इस घोषणा को उसके स्कूल के बच्चों ने मजाक बना लिया। किसी भी प्रकार की मजाक से अब्राहम लिंकन का हौंसला कम नहीं हुआ और वें एक दिन अमेरिका के राष्ट्रपति बन गए।

Abraham Lincoln : अमेरिका के राष्ट्रपति की हमेशा चर्चा होती है। अमेरिका में एक ऐसा भी राष्ट्रपति हुआ है जिसके जीवन की कहानी 150 साल बाद भी हर किसी को प्रेरणा प्रदान करती है। प्रेरणादायक जीवन के धनी अमेरिका के उस राष्ट्रपति का नाम था अब्राहम लिंकन। अब्राहम लिंकन बेहद गरीब परिवार में पैदा हुए थे। कक्षा-8 में पढ़ते समय ही अब्राहम लिंकन ने घोषणा कर दी थी कि एक दिन वें अमेरिका के राष्ट्रपति बनेंगे।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के पूरे जीवन पर दृष्टि डालने से पहले यह जानना जरूरी है कि अब्राहम लिंकन ने बचपन में ही सबको कैसे चौंका दिया था। हुआ यह कि जब अब्राहम लिंकन कक्षा-8 में पढ़ते थे तो बड़ी विशेष घटना घट गई। अब्राहम लिंकन के क्लास टीचर सभी बच्चों से यह सवाल कर रहे थे कि बड़े होकर वें क्या बनेंगे? किसी बच्चे ने कहा कि वह बड़ा होकर इंजीनियर बनेगा। किसी ने डॉक्टर तो किसी ने वकील बनने की बात कही। जब अब्राहम लिंकन का नम्बर आया तो कक्षा-8 में पढ़ने वाले अब्राहम लिंकन ने कहा कि बड़ा होकर मैं अमेरिका का राष्ट्रपति बनूंगा। इस घोषणा को उसके स्कूल के बच्चों ने मजाक बना लिया। किसी भी प्रकार की मजाक से अब्राहम लिंकन का हौंसला कम नहीं हुआ और वें एक दिन अमेरिका के राष्ट्रपति बन गए। तमाम विशेषज्ञों का कहना है कि अब्राहम लिंकन की तरह अपने जीवन का स्पष्ट लक्ष्य बनाने वाला हर व्यक्ति अपने जीवन के लक्ष्य को हासिल कर सकता है। केवल स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने की आवश्यकता होती है।
अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का जीवन प्रेरणा से भरा हुआ जीवन है। अब्राहम लिंकन का जन्म 1809 में केंटकी में एक गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता थॉमस लिंकन एक किसान थे, जो परिवार को पालने के लिए कड़ी मेहनत करते थे। जब लिंकन महज 7 साल के थे, परिवार इंडियाना चला गया, जहां उन्होंने एक लॉग केबिन में रहना शुरू किया। उस समय शिक्षा की सुविधाएं बहुत कम थीं। लिंकन ने औपचारिक स्कूल में कुल मिलाकर एक साल से भी कम समय बिताया। उनकी मां नैन्सी और सौतेली मां सारा ने उन्हें पढ़ना-लिखना सिखाया। लिंकन को किताबों से इतना लगाव था कि वो किसी भी स्रोत से ज्ञान पाने के लिए आतुर रहते थे। चाहे वह बाइबल हो या कोई अखबार। वो कहते थे कि किताबें उनकी सबसे अच्छी दोस्त हैं।
अब्राहम लिंकन के जीवन में किताब उधार मांगने का एक अनोखा प्रकरण छपा था। यह बात उस समय की है जब लिंकन लगभग 11-12 साल के थे। इंडियाना के उनके पड़ोसी जोसिया क्रॉफर्ड के पास एक दुर्लभ किताब थी "द लाइफ ऑफ जॉर्ज वॉशिंगटन" (जॉर्ज वॉशिंगटन की जीवनी), जो डेविड रामसे द्वारा लिखी गई थी। उस समय किताबें बहुत महंगी और दुर्लभ होती थीं, खासकर सीमांत इलाकों में। लिंकन को अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन की कहानी जानने की बड़ी इच्छा थी। उन्होंने क्रॉफर्ड से किताब उधार मांगी। क्रॉफर्ड ने किताब दे दी, लेकिन लिंकन के पास इसे रखने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं थी। वो किताब को अपने लॉग केबिन की 2 लकड़ियों के बीच की दरार में रखते थे, ताकि सुबह उठते ही पढ़ सकें। एक रात तेज आंधी-तूफान आया। बारिश की बूंदें केबिन की छत से टपक कर किताब पर गिरीं। सुबह जब लिंकन उठे, तो किताब पूरी तरह गीली और खराब हो चुकी थी। पन्ने फूल गए थे, और किताब पढ़ने लायक नहीं रह गई थी। लिंकन बहुत दुखी हुए। वो जानते थे कि किताब की कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन उनके पास पैसे नहीं थे। ईमानदार लिंकन ने किताब को सुखाया और सीधे क्रॉफर्ड के पास जाकर सारी बात बताई। उन्होंने कहा, "मिस्टर क्रॉफर्ड, मैं किताब की क्षति के लिए माफी मांगता हूं। मेरे पास पैसे नहीं हैं, लेकिन मैं आपके लिए काम करके इसकी भरपाई कर सकता हूं।
क्रॉफर्ड ने किताब की कीमत 75 सेंट बताई। उस समय एक दिन की मजदूरी लगभग 25 सेंट होती थी। इसलिए उन्होंने लिंकन से कहा कि वो किताब अपने पास रख लें, लेकिन इसके बदले 3 दिनों तक उनके खेतों में काम करें। लिंकन खुशी-खुशी राजी हो गए। अगले 3 दिनों तक उन्होंने क्रॉफर्ड के मकई के खेतों में काम किया। मकई तोड़ना, खरपतवार निकालना और अन्य कृषि कार्य। यह काम आसान नहीं था, लिंकन को सुबह से शाम तक कड़ी मेहनत करनी पड़ी। लेकिन, किताब पाने की खुशी में उन्होंने कोई शिकायत नहीं की। 3 दिनों की मेहनत के बाद किताब उनकी हो गई। उन्होंने इसे बार-बार पढ़ा और वॉशिंगटन की कहानी से इतने प्रभावित हुए कि यह उनके जीवन का हिस्सा बन गई। यह किस्सा सिर्फ एक किताब की कहानी नहीं है, बल्कि लिंकन की आत्म-शिक्षा की भावना को दर्शाती है। वॉशिंगटन की जीवनी ने लिंकन को सिखाया कि कैसे एक साधारण व्यक्ति कड़ी मेहनत और ईमानदारी से महान बन सकता है। वॉशिंगटन ने अमेरिका की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी और लिंकन ने बाद में गुलामी के खिलाफ। लिंकन कहते थे कि इस किताब ने उन्हें नेतृत्व और देशभक्ति का पाठ पढ़ाया। उनकी जीवनीकारों के अनुसार, इस घटना ने लिंकन की दृढ़ता को मजबूत किया। वो हमेशा कहते थे कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए कोई कीमत बड़ी नहीं होती। लिंकन की आगे की जीवन यात्रा भी इसी भावना से भरी है।
अब्राहम लिंकन का नाम अमेरिका के सबसे सफल राष्ट्रपति के रूप में गिना जाता है। इंडियाना से इलिनॉय जाकर अब्राहम लिंकन वकील बने राजनीति में आए और फिर 1860 में राष्ट्रपति बने। गृहयुद्ध के दौरान उन्होंने एमांसिपेशन प्रोक्लेमेशन जारी किया, जिसने लाखों गुलामों को आजादी दी। उनकी सफलता की जड़ें उनके बचपन जुड़ी हैं। जैसे कि खेतों में काम करके किताब प्राप्त करना। यह दर्शाता है कि लिंकन के लिए शिक्षा एक विलासिता नहीं, बल्कि जरूरत थी। उन्होंने कभी हार नहीं मानी, चाहे किताबें उधार लेनी पड़ी हों, मीलों पैदल चलना पड़ा हो। लिंकन का यह किस्सा रोचक होने के साथ-साथ प्रेरणादायक भी है। Abraham Lincoln