शिपिंग कंपनियों ने निर्यातकों पर लगाया वार टैक्स, कंटेनर पर 2.82 लाख रुपये तक अतिरिक्त शुल्क

बढ़ते संघर्ष के बीच, भारतीय निर्यातकों को शिपिंग कंपनियों द्वारा इमरजेंसी कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज (वार टैक्स) देना पड़ रहा है। यह शुल्क एक 40 फुट के कंटेनर पर लगभग $3,000 या 2.82 लाख तक है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े मालवाहक जहाजों में औसतन 3,500 कंटेनर लदे होते हैं।

jahaj (1)
मालवाहक जहाज
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar08 Mar 2026 05:06 PM
bookmark

Iran War : पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच, भारतीय निर्यातकों को शिपिंग कंपनियों द्वारा इमरजेंसी कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज (वार टैक्स) देना पड़ रहा है। यह शुल्क एक 40 फुट के कंटेनर पर लगभग $3,000 या 2.82 लाख तक है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े मालवाहक जहाजों में औसतन 3,500 कंटेनर लदे होते हैं। ऐसे में, केवल एक जहाज से ही शिपिंग कंपनियों को करीब 90 करोड़ का अतिरिक्त लाभ हो रहा है। छोटे जहाजों में लगभग 300 कंटेनर होते हैं, जिससे निर्यातकों पर लगभग 80 करोड़ का अतिरिक्त दबाव बनता है।

अतिरिक्त शुल्क क्यों लगाया गया?

कंपनियों के अनुसार यह कदम समुद्री सुरक्षा जोखिम और परिचालन लागत में वृद्धि के कारण उठाया गया है। विशेष रूप से, तनावग्रस्त क्षेत्रों के पास के समुद्री मार्ग, जैसे कि स्ट्रेट आॅफ होर्मुज और बाब-अल-मनदेव स्ट्रेट, जोखिम बढ़ा रहे हैं। ईरान से जुड़े हालात के कारण जहाज, चालक दल और माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।

प्रभावित क्षेत्र

यह अतिरिक्त शुल्क उन कंटेनरों पर लागू है जो निम्नलिखित देशों को जा रहे हैं जिनमें बहरीन, जिबूती, मिस्र, इरिट्रिया, इराक, जॉर्डन, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, कतर, सूडान, संयुक्त अरब अमीरात और यमन हैं। अधिकांश निर्यातक प्रति कंटेनर $2,500-$3,000 का मुनाफा कमाते हैं। वार टैक्स इसी मुनाफे के बराबर होने के कारण निर्यातकों की लाभप्रदता पर गंभीर असर डाल रहा है। छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए यह अतिरिक्त खर्च वित्तीय चुनौती बन सकता है। पश्चिम एशिया में तनाव और सुरक्षा खतरों के कारण शिपिंग कंपनियों ने करोड़ों रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगाया है। यह कदम विशेष रूप से उत्तर प्रदेश जैसे निर्यातक केंद्रों के व्यापारियों के लिए आर्थिक चुनौती साबित हो रहा है। Iran War


संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

ईरान-यूएस संघर्ष की नई चुनौती, हो सकता है खाड़ी देशों में पानी का संकट

ईरान ने खाड़ी देशों में पानी की सप्लाई को निशाना बनाया है। तेल और गैस बुनियादी ढांचे पर हमलों के बाद अब डीसेलिनेशन प्लांट और पानी-उपलब्धता से जुड़े सिस्टम भी खतरे में हैं। बहरीन में एक डीसेलिनेशन प्लांट पर ड्रोन हमला हुआ।

water
पानी संकट की संभावना
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar08 Mar 2026 02:48 PM
bookmark

Iran-US-Conflict : हाल ही में रिपोर्ट मिली है कि ईरान ने खाड़ी देशों में पानी की सप्लाई को निशाना बनाया है। तेल और गैस बुनियादी ढांचे पर हमलों के बाद अब डीसेलिनेशन प्लांट और पानी-उपलब्धता से जुड़े सिस्टम भी खतरे में हैं। बहरीन में एक डीसेलिनेशन प्लांट पर ड्रोन हमला हुआ। यूएई और कुवैत में भी पानी और बिजली संयंत्रों को निशाना बनाने की कोशिशें हुईं। इस कदम से खाड़ी देशों के लिए पानी संकट की संभावना बढ़ गई है।

पानी की अहमियत

खाड़ी देश जैसे सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और कतर प्राकृतिक रूप से मीठा पानी नहीं रखते। इन देशों का अधिकांश पीने का पानी समुद्र के पानी को शुद्ध करके आता है। कुवैत लगभग 90% पानी शुद्धिकरण से एवं सऊदी अरब लगभग 70% और ओमान लगभग 86% समुद्री पानी को शुद्ध करके पीने लायक पानी बनाता है। अगर डीसेलिनेशन प्लांट बंद हो जाएं, तो कुछ शहरों में पानी सिर्फ कुछ दिनों तक ही उपलब्ध रहेगा।

पानी का रणनीतिक महत्व

युद्ध में महत्वपूर्ण ढाँचों को निशाना बनाना आम रणनीति है। इसमें तेल, गैस, बिजली और अब पानी के संयंत्र शामिल हैं। यूएई में पावर स्टेशन पर हमला हुआ, जो बड़े डीसेलिनेशन प्लांट को ऊर्जा देता है। कुवैत में ड्रोन हमले से पानी और बिजली संयंत्रों में आग लगी। इसी तरह डीसेलिनेशन प्लांट को नुकसान पहुंचाया जाता रहा तो शहरों में पीने का पानी कम हो जाएगा। अस्पताल, उद्योग और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होगी। लोगों को पलायन करना पड़ सकता है। बड़े पैमाने पर मानवीय संकट पैदा होने की संभावना है।

वर्तमान स्थिति

28 फरवरी 2026 से शुरू हुए युद्ध में अब पानी की सप्लाई भी खतरे में है। कई खाड़ी देशों ने चेतावनी दी है कि वे हमलों का जवाब दे सकते हैं। खाड़ी देशों की सबसे बड़ी कमजोरी तेल नहीं, बल्कि पानी की उपलब्धता है। अगर डीसेलिनेशन प्लांट पर बड़े हमले हुए, तो वहां कुछ ही दिनों में पानी की कमी हो सकती है। यह क्षेत्रीय और वैश्विक दोनों स्तर पर गंभीर संकट खड़ा कर सकता है। Iran-US-Conflict


संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस : उत्तर प्रदेश में महिलाएं बड़ी संख्या में स्टार्टअप के माध्यम से अलग पहचान

उत्तर प्रदेश में महिला उद्यमिता तेजी से मजबूत हो रही है और बड़ी संख्या में महिलाएं स्टार्टअप के माध्यम से अपनी अलग पहचान बना रही हैं। प्रदेश में इस समय लगभग 9,600 से अधिक स्टार्टअप ऐसे हैं जिनका संचालन महिलाएं कर रही हैं।

iw day
महिलाएं स्टार्टअप के माध्यम से अपनी अलग पहचान बना रही
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar07 Mar 2026 06:04 PM
bookmark

International Women's Day : उत्तर प्रदेश में महिला उद्यमिता तेजी से मजबूत हो रही है और बड़ी संख्या में महिलाएं स्टार्टअप के माध्यम से अपनी अलग पहचान बना रही हैं। प्रदेश में इस समय लगभग 9,600 से अधिक स्टार्टअप ऐसे हैं जिनका संचालन महिलाएं कर रही हैं। खास बात यह है कि इनकी संख्या हर वर्ष लगभग 30 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, जो राज्य में बदलते आर्थिक और सामाजिक माहौल का संकेत देती है।

स्टार्टअप्स के जरिए महिलाएं रोजगार के अवसर पैदा कर रहीं

आज महिलाएं केवल पारंपरिक व्यवसाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे टेक्नोलॉजी, एग्रीटेक, हेल्थकेयर और सेवा क्षेत्र जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी नवाचार के साथ काम कर रही हैं। इन स्टार्टअप्स के जरिए महिलाएं न केवल अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा रही हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा कर रही हैं। राज्य में महिला स्टार्टअप्स के विस्तार में सरकारी नीतियों और प्रोत्साहन योजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, मेंटरशिप, इन्क्यूबेशन सुविधाएं और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इन पहलों के कारण कई महिलाएं अपने व्यावसायिक विचारों को सफल उद्यम में बदलने में सक्षम हुई हैं।

शुरुआती वित्तीय मदद स्टार्टअप्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण 

इस दिशा में डिपार्टमेंट आॅफ साइंस एण्ड टेक्नोलाजी (इंडिया) द्वारा संचालित निधि (नेशनल इनीसिएटिव फार डेवलपिंग एण्ड हर्नेसिंग इनोवेशन) प्रोग्राम भी अहम भूमिका निभा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश के 25 महिला संचालित स्टार्टअप्स को आर्थिक सहयोग दिया गया है। इस तरह की शुरुआती वित्तीय मदद स्टार्टअप्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इससे उन्हें अपने उत्पाद या सेवा को विकसित करने और बाजार में स्थापित करने में मदद मिलती है।

यूपी स्टार्टअप फंड भी महिला उद्यमियों को दे रहा आर्थिक मजबूती

इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा स्थापित यूपी स्टार्टअप फंड भी महिला उद्यमियों को आर्थिक मजबूती दे रहा है। लगभग 1000 करोड़ रुपये के इस फंड में से अब तक करीब 325 करोड़ रुपये विभिन्न स्टार्टअप्स को दिए जा चुके हैं, जिनमें 900 से अधिक महिला संचालित स्टार्टअप्स शामिल हैं। यह सहायता महिलाओं को नई तकनीक अपनाने, अपने कारोबार का विस्तार करने और बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद कर रही है। अब स्टार्टअप संस्कृति केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही। छोटे शहरों और कस्बों की महिलाएं भी नए आइडिया और तकनीक के साथ उद्यमिता की दुनिया में कदम रख रही हैं। इस बदलाव से न केवल महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ रही है, बल्कि राज्य में नवाचार और समावेशी विकास को भी नई गति मिल रही है।


संबंधित खबरें