रूसी तेल पर भारत को बड़ी राहत! पुतिन से मुलाकात के बाद ट्रंप का यू-टर्न
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 05:49 AM
अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बहुचर्चित बैठक भले ही किसी बड़े समझौते के बिना खत्म हुई हो, लेकिन इसके बाद दिया गया ट्रंप का बयान भारत के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। रूसी तेल आयात करने वाले देशों पर नए टैरिफ लगाने की अटकलों को खारिज करते हुए ट्रंप ने साफ कर दिया कि फिलहाल इस तरह की कोई योजना नहीं है। ट्रंप की इस घोषणा से भारत को बड़ी राहत मिली है। Alaska Meeting :
ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा-
आज की बातचीत के बाद मुझे नहीं लगता कि रूसी आॅयल इंपोर्ट पर किसी नए टैरिफ पर विचार करने की जरूरत है। हां, दो-तीन हफ्ते बाद हालात की समीक्षा जरूर की जाएगी। इस बयान के बाद साफ हो गया कि फिलहाल भारत जैसे देशों को अतिरिक्त टैरिफ से राहत मिलती रहेगी। गौरतलब है कि भारत अपने कुल क्रूड आॅयल इंपोर्ट का लगभग 38 फीसदी हिस्सा रूस से खरीद रहा है।
अमेरिका-रूस मीटिंग का बैकग्राउंड
अलास्का शिखर वार्ता को लेकर उम्मीदें काफी बड़ी थीं। दुनिया भर की निगाहें इस बैठक पर टिकी थीं कि क्या यूक्रेन युद्ध, गैस-आॅयल सप्लाई और वैश्विक सुरक्षा पर कोई ठोस सहमति बन पाएगी। लेकिन तीन घंटे चली बंद कमरे की बातचीत के बाद न तो सीजफायर पर कोई सहमति बनी और न ही बड़े समझौते पर दस्तखत। फिर भी तेल पर टैरिफ को लेकर आया ट्रंप का बयान भारत समेत कई देशों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आया।
भारत पर ट्रंप की रणनीति
ट्रंप ने स्वीकार किया कि भारत पर भारी टैरिफ लगाने का ही असर था कि रूस बातचीत के लिए मजबूर हुआ। उन्होंने दावा किया कि जब मैंने भारत से कहा कि हम आप पर अतिरिक्त शुल्क लगाएंगे क्योंकि आप रूस से तेल खरीद रहे हैं, तब भारत ने कुछ खरीद कम की। रूस के लिए भारत दूसरा सबसे बड़ा ग्राहक था। उसे महसूस हुआ कि अब विकल्प सीमित हो रहे हैं और तभी उन्होंने मीटिंग के लिए हामी भरी। इस बयान ने साफ कर दिया कि ट्रंप, भारत को दबाव की रणनीति में एक लीवरेज टूल के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
भारत का साफ संदेश, एनर्जी पॉलिसी में बदलाव नहीं
भारत ने हालांकि अमेरिकी दबाव के बावजूद अपनी तेल खरीद नीति में कोई बदलाव करने से इनकार कर दिया है। इंडियन आॅयल कॉपोर्रेशन के चेयरमैन ए.एस. साहनी ने कहा, रूसी तेल पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। खरीदारी पूरी तरह आर्थिक आधार पर होगी।
विदेश मंत्रालय ने भी ट्रंप के 25% अतिरिक्त टैरिफ को अनुचित बताया और साफ कर दिया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए स्वतंत्र नीति अपनाएगा।
बड़ा खतरा, भारत के निर्यात पर असर
ट्रंप ने पिछले सप्ताह भारत से अमेरिकी आयात पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। इसके चलते भारत का लगभग 40 अरब डॉलर का निर्यात खतरे में आ गया है। यह टैरिफ 27 अगस्त से लागू हो चुका है। जानकारों के मुताबिक, अगर आने वाले हफ्तों में अमेरिका टैरिफ की नीति को और कड़ा करता है तो इसका सीधा असर भारत की आईटी, टेक्सटाइल, स्टील और कृषि निर्यात पर भी पड़ सकता है। अलास्का बैठक से दुनिया भले ही किसी बड़े समझौते की उम्मीद कर रही थी, लेकिन इसका सबसे अहम नतीजा यही रहा कि भारत को फिलहाल रूसी तेल आयात पर नई पेनाल्टी से राहत मिली है। हालांकि, ट्रंप का दो-तीन हफ्तों बाद विचार करेंगे, वाला बयान संकेत देता है कि यह राहत अस्थायी हो सकती है। आने वाले समय में भारत को अपनी कूटनीति और ऊर्जा नीति दोनों मोर्चों पर बेहद संतुलित चाल चलनी होगी।