
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित वैश्विक टैरिफ नीति अब लागू हो गई है और इसके प्रभाव विश्व व्यापार पर तेजी से नजर आने लगे हैं। भारत समेत 60 से अधिक देशों और यूरोपीय संघ से आयातित वस्तुओं पर अब अमेरिका ने औपचारिक रूप से भारी शुल्क लगाना शुरू कर दिया है। भारत से आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ की पहली किस्त लागू हो चुकी है, जबकि दूसरा चरण 27 अगस्त से लागू होगा। व्हाइट हाउस के मुताबिक, सोमवार रात ठीक मध्यरात्रि (ईस्टर्न टाइम) से ये नई दरें प्रभावी हो गईं। यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया से आने वाले उत्पादों पर 15 प्रतिशत, जबकि ताइवान, वियतनाम और बांग्लादेश से आयात पर 20 प्रतिशत शुल्क लगा दिया गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस घोषणा के बाद ट्रुथ सोशल पर लिखा - आधी रात हो चुकी है! अरबों डॉलर के टैरिफ अब अमेरिका की ओर बढ़ रहे हैं। Donald Trump
पिछले सप्ताह व्हाइट हाउस ने भारत पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की बात कही थी, जिसे लेकर ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इसके कुछ ही दिन बाद, भारत पर रूस से तेल खरीदने के चलते अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क और थोप दिया गया। नतीजतन भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लागू किया गया है—जो कि किसी भी देश पर अब तक लगाए गए सबसे ऊंचे शुल्कों में गिना जा रहा है। Donald Trump
ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यह टैरिफ नीति अमेरिका में अरबों डॉलर के निवेश का रास्ता खोलेगी। लेकिन दूसरी ओर, अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर इसके नकारात्मक असर अब सामने आने लगे हैं। अप्रैल में जब टैरिफ की शुरुआती झलक देखने को मिली थी, तभी बाजार में हलचल तेज हो गई थी। आर्थिक आंकड़ों में गिरावट और बेरोजगारी के संकेत दिखाई दिए। डायनेमिक इकोनॉमिक स्ट्रैटेजी के प्रमुख जॉन सिल्विया के अनुसार - कम उत्पादक अर्थव्यवस्था को कम श्रमिकों की जरूरत होती है। ऊंचे टैरिफ से वास्तविक मजदूरी पर दबाव पड़ता है। कंपनियां पहले जैसी सैलरी नहीं दे पा रहीं।
उन्होंने आगाह किया कि इन नीतियों का असल असर कुछ वर्षों बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगा। उच्च टैरिफ से बचने के लिए आयातकों ने पहले ही बड़ी मात्रा में माल मंगवा लिया, जिससे व्यापार असंतुलन और बढ़ गया। 2025 की पहली छमाही में अमेरिका का व्यापार घाटा 582.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो 2024 की तुलना में 38% ज्यादा है। निर्माण व्यय में भी लगभग 3% की गिरावट दर्ज की गई है और फैक्ट्री श्रमिकों को लेकर बेरोजगारी की स्थिति गहरा गई है।
ट्रंप प्रशासन ने कंप्यूटर चिप्स पर भी 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का एलान किया है। इसके लिए 1977 के एक कानून के तहत ‘आर्थिक आपातकाल’ घोषित किया गया है, जो अब कानूनी चुनौती के घेरे में है। हाल ही में अमेरिकी अपीलीय अदालत में इस मामले पर सुनवाई हुई, जहां न्यायाधीशों ने राष्ट्रपति के अधिकारों के अतिक्रमण पर सवाल उठाए हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों को लेकर अब उनके पूर्व सहयोगी भी सवाल खड़े कर रहे हैं। पूर्व हाउस स्पीकर और रिपब्लिकन नेता पॉल रयान ने कहा - राष्ट्रपति अपनी सनक के आधार पर टैरिफ बढ़ा रहे हैं। उन्हें कानूनी चुनौतियों और राजनीतिक उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। वहीं, ‘द सेंचुरी फाउंडेशन’ की वरिष्ठ फेलो और बाइडेन प्रशासन की पूर्व आर्थिक सलाहकार रेचल वेस्ट ने कहा - डोनाल्ड ट्रंप वह शख्स हैं जो खुद ही अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं और उसे लेकर बेपरवाह भी हैं। मगर अमेरिकी जनता को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। Donald Trump