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मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने खाड़ी क्षेत्र की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से जुड़े कुछ प्रभावशाली अधिकारी चाहते हैं कि युनाइटेड अरब अमीरात ईरान के रणनीतिक लावान आइलैंड पर आक्रामक रुख अपनाए।

Middle East Tensions : मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने खाड़ी क्षेत्र की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से जुड़े कुछ प्रभावशाली अधिकारी चाहते हैं कि युनाइटेड अरब अमीरात ईरान के रणनीतिक लावान आइलैंड पर आक्रामक रुख अपनाए। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की कोशिश है कि ईरान के खिलाफ सीधे अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के बजाय क्षेत्रीय सहयोगी देश आगे बढ़कर कार्रवाई करें। इसी रणनीति के तहत यूएई पर दबाव बढ़ने की चर्चा तेज हो गई है।
Middle East Tensions
लावान आईसलैंड ईरान के लिए बेहद रणनीतिक माना जाता है। यह खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा और समुद्री गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। विशेषज्ञों के अनुसार इस इलाके पर नियंत्रण का मतलब तेल आपूर्ति मार्गों और क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर असर डालना हो सकता है। यही वजह है कि मौजूदा तनाव के बीच इस आइलैंड का नाम चर्चा में आया है। रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप के करीबी कुछ पूर्व और वर्तमान अधिकारी चाहते हैं कि यूएई ईरान के खिलाफ ज्यादा आक्रामक भूमिका निभाए। एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया कि अमेरिका की बजाय यूएई को सीधे कार्रवाई करनी चाहिए। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि अप्रैल की शुरूआत में यूएई ने गुप्त सैन्य अभियान के दौरान लावान आइलैंड को निशाना बनाया था। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद यूएई सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल रहा। दावा किया गया है कि ईरान ने यूएई की ओर 2800 से ज्यादा ड्रोन और मिसाइलें दागीं। इसके बाद यूएई ने अपनी सुरक्षा रणनीति और विदेश नीति पर नए सिरे से विचार शुरू किया। इसी दौरान यूएई ने सऊदी अरबिया और कतर से ईरान के खिलाफ संयुक्त जवाबी रणनीति की बात की, लेकिन उसे खुला समर्थन नहीं मिला।
ईरान के साथ तनाव बढ़ने के बाद यूएई ने इजराइल और अमेरिका के साथ अपने रिश्ते और मजबूत किए हैं। 2020 के अब्राहम समझौते के बाद से यूएई और इजराइल के बीच संबंध लगातार बेहतर हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि युद्ध के दौरान इजराइल ने यूएई को आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम भी उपलब्ध कराए, ताकि मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाव किया जा सके। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि उन्होंने मार्च में गुप्त रूप से यूएई का दौरा किया था, हालांकि यूएई ने इस दावे को खारिज कर दिया।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने खाड़ी देशों के आपसी समीकरण बदल दिए हैं। एक ओर यूएई, अमेरिका और इजराइल के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत होती दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ अरब देशों के साथ यूएई के रिश्तों में तनाव बढ़ने की चर्चा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यूएई पाकिस्तान के रुख से भी नाराज है, क्योंकि उसे लगता है कि पाकिस्तान ने ईरान के मुद्दे पर अपेक्षाकृत नरम नीति अपनाई। विशेषज्ञों के अनुसार यदि ईरान, यूएई और इजराइल के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता पर पड़ सकता है। खाड़ी क्षेत्र दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर तेल बाजार, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर दिखाई दे सकता है। Middle East Tensions
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