इतिहास रचते हुए धरती पर लौटे भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, अंतरिक्ष में बिताए 18 दिन
Axiom-4 Mission
भारत
चेतना मंच
15 Jul 2025 03:21 PM
Axiom-4 Mission : भारत ने अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, भारतीय वायुसेना के अधिकारी और अंतरिक्ष यात्री, एक्सिओम-4 मिशन के अंतर्गत 18 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में बिताने के बाद सोमवार को सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौट आए। वे अमेरिका, पोलैंड और हंगरी के अंतरिक्ष यात्रियों के साथ स्पेस के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर कैलिफोर्निया के तट के पास स्प्लैशडाउन हुए।
23 घंटे का वापसी सफर, लाइव कवरेज में लैंडिंग
14 जुलाई को शाम 4:45 बजे शुभांशु शुक्ला और उनके साथी करर से पृथ्वी की ओर रवाना हुए। लगभग 23 घंटे की यात्रा के बाद, 15 जुलाई को दोपहर 3 बजे उनका अंतरिक्ष यान सैन डिएगो के निकट प्रशांत महासागर में सफलतापूर्वक उतरा। लैंडिंग के बाद सभी अंतरिक्ष यात्रियों को विशेष रिकवरी टीमों द्वारा समुद्र से सुरक्षित बाहर निकाला गया। स्पेसएक्स और एक्सिओम स्पेस की ओर से इस ऐतिहासिक लैंडिंग का सीधा प्रसारण किया गया, जिसे लाखों लोगों ने एक्सिओम की वेबसाइट और सोशल मीडिया पर लाइव देखा।
क्यों ऐतिहासिक है यह मिशन?
शुभांशु शुक्ला भारत के केवल दूसरे अंतरिक्ष यात्री हैं जिन्होंने अंतरिक्ष में समय बिताया है। उनसे पहले 1984 में राकेश शर्मा ने सोवियत मिशन के तहत भारत का प्रतिनिधित्व किया था। 41 साल बाद एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री का ऐसा मिशन पूरा करना देश के लिए बड़ी उपलब्धि है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मिशन से भारत को भविष्य के कमर्शियल स्पेस स्टेशन विकसित करने और गगनयान जैसे मानवयुक्त अभियानों में नई दिशा और तकनीकी आत्मनिर्भरता मिलेगी।
मिशन में शुभांशु की भूमिका और वैज्ञानिक योगदान
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर हैं और 2000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव रखते हैं। अपने इस अंतरिक्ष मिशन के दौरान उन्होंने 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोगों में हिस्सा लिया, जिनमें भारत के 7 प्रमुख प्रयोग शामिल थे। उन्होंने अंतरिक्ष में मेथी और मूंग के बीज उगाने में सफलता पाई, जिनकी तस्वीरें हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं।
माता-पिता की दुआ और देश का गर्व
जैसे ही शुभांशु की वापसी की पुष्टि हुई, उनके माता-पिता की आंखों में गर्व और राहत दोनों झलकने लगीं। उनके पिता ने मीडिया से कहा, "हमें बेहद खुशी है कि हमारा बेटा सकुशल वापस आ रहा है। अनडॉकिंग सफल रही थी, अब हम लैंडिंग के सुरक्षित होने की ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं।"
अंतरिक्ष कूटनीति और विज्ञान की दिशा में भारत की बड़ी छलांग
एक्सिओम-4 मिशन नासा, स्पेसएक्स और एक्सिओम स्पेस का संयुक्त उपक्रम था, जिसमें चार देशों — भारत, अमेरिका, पोलैंड और हंगरी के अंतरिक्ष यात्री शामिल थे। इस मिशन के दौरान न सिर्फ विज्ञान, बल्कि अंतरिक्ष कूटनीति और तकनीकी समन्वय के नए आयाम भी स्थापित हुए। शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक है। यह मिशन भविष्य में भारत को वैश्विक अंतरिक्ष साझेदारियों में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार करता है।