ईरान ने कर डाला परमाणु परीक्षण, आ गया भूकम्प

ईरान के परमाणु परीक्षण के कारण ईरान में भूकंप के झटके लगे हैं। ईरान में आए भूकंप को रिक्टर स्केल पर 4.30 नापा गया है। ईरान में आए भूकंप को लेकर इस बात की आशंका जताई गई है कि ईरान ने दुनिया को डराने के लिए परमाणु परीक्षण कर डाला है।

युद्ध के बीच ईरान में भूकंप
युद्ध के बीच ईरान में भूकंप
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar03 Mar 2026 02:36 PM
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Iran News : ईरान से चौंकाने वाली खबर आई है। खबर यह है कि ईरान ने युद्ध के बीच अपनी धरती पर परमाणु परीक्षण कर डाला है। ईरान के परमाणु परीक्षण के कारण ईरान में भूकंप के झटके लगे हैं। ईरान में आए भूकंप को रिक्टर स्केल पर 4.30 नापा गया है। ईरान में आए भूकंप को लेकर इस बात की आशंका जताई गई है कि ईरान ने दुनिया को डराने के लिए परमाणु परीक्षण कर डाला है।

साधारण भूकंप या परमाणु परीक्षण

आपको बता दें कि मंगलवार को ईरान में 4.3 तीव्रता का भूकंप आया है। इस भूकंप को ईरान के परमाणु परीक्षण से जोडक़र देखा जा रहा है। ईरान में यह भूकंप ईरान के गराश इलाके में आया है। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (⁠USGS) ने कहा है कि भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.3 थी. ⁠USGS ने कहा कि भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था। गराश ईरान के फार्स प्रांत (Fars Province) में स्थित एक शहर है। यह Gerash County का मुख्यालय है और दक्षिणी ईरान में लारेस्तान क्षेत्र के हिस्से में आता है. ईरान दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंपीय सक्रिय (seismically active) देशों में से एक है, क्योंकि यहां अरेबियन प्लेट और यूरेशियन की टक्कर से जाग्रोस फोल्ड थ्रस्ट बेल्ट बना हुआ है। गराश इसी बेल्ट का हिस्सा है। इस क्षेत्र में 4 से 5 मैग्निट्यूड के भूकंप काफी आम हैं। 3 मार्च 2026 को गराश में 4.3 मैग्निट्यूड का भूकंप आया है। युद्ध के बीच आए इस भूकंप को तमाम एक्सपर्ट शक की नजरों से देख रहे हैं। माना जाता है कि ईरान अपनी न्यूक्लियर ताकत का प्रदर्शन करने के लिए परमाणु परीक्षण कर सकता है। जंग की स्थिति इस भूकंप को और भी संदेहपूर्ण बना देती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अंडरग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट में 4.5 रिक्टर स्केल से ऊपर की तीव्रता का भूकंप पैदा होता है। ईरान 24 घंटे में बना सकता है परमाणु बम

यहां यह याद दिलाना जरूरी है कि ईरान ने कई बार कहा है कि वो 24 घंटे में परमाणु बम बना सकता है। माना जाता है कि ईरान ने यूरेनियम का 60 फीसदी तक एनरिचमेंट कर लिया है। अगर ईरान 80 या 90 फीसदी तक यूरेनियम को एनरिच कर लेता है तो वह परमाणु बम बना सकता है। वर्तमान में क्षेत्र में US-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध चल रहा है। युद्ध के दौरान भूकंप को ज्यादातर एक्सपर्ट परमाणु परीक्षण के साथ जोड़कर देख रहे हैं। यह समाचार लिखे जाने तक ईरान की तरफ से परमाणु परीक्षण की अधिकारिक घोषणा अथवा पुष्टि नहीं की गई है। युद्ध के बीच परमाणु परीक्षण की खबरों से दुनिया भर में डर का माहौल बना हुआ है। Iran News




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ईरान-US जंग का सऊदी को भारी नुकसान, रूस पर भारत की नजर

अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति बनी थी। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया था, साथ ही रूसी तेल की खरीद पर लगाए गए अतिरिक्त 25% टैरिफ को भी खत्म कर दिया था।

The Saudi of the Iran-US war
रूसी तेल को लेकर भारत की बदलती रणनीति (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar02 Mar 2026 08:15 PM
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Internatioanl News :मध्य-पूर्व में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़े युद्ध ने वैश्विक तेल आपूर्ति की राह रोक दी है। होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) को ईरान द्वारा बंद कर दिए जाने के बाद भारत को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल से दूरी बनाई थी, लेकिन सऊदी अरब समेत खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति अनिश्चित होने के बाद भारत एक बार फिर रूस की ओर देखने को मजबूर हो गया है।

होर्मुज की खाड़ी में ताला, सऊदी को भारी नुकसान

बीते शनिवार से अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष के बीच ईरान ने तेल निर्यात की जीवन रेखा मानी जाने वाली होर्मुज की खाड़ी से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी। इसका सीधा असर दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक भारत पर पड़ा है। हाल ही में भारत ने रूसी तेल की खरीद कम करके सऊदी अरब और अन्य मध्य-पूर्वी देशों पर निर्भरता बढ़ाई थी, लेकिन अब यह विकल्प भी संकट में पड़ गया है।

स्थिति इतनी गंभीर है कि ईरान ने सऊदी अरब की दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको की 'रास तनुरा' रिफाइनरी पर ड्रोन हमले भी किए। हालांकि सऊदी ने इन्हें नाकाम कर दिया, लेकिन एहतियातन रिफाइनरी को बंद करना पड़ा, जिससे सऊदी के तेल क्षेत्र को भारी नुकसान हो रहा है।

भारत का 'इमर्जेंसी प्लान' और रूसी जहाजों का इंतजार

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट से निपटने के लिए भारत ने आकस्मिक योजना (Emergency Plan) तैयार करनी शुरू कर दी है। सोमवार को नई दिल्ली में सरकारी रिफाइनरियों और सरकारी अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें तेल आपूर्ति सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा की गई। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारत अपने समुद्री क्षेत्र के पास भटक रहे उन रूसी तेल जहाजों को खरीदने पर विचार कर रहा है जिनका कोई खरीदार नहीं है। अनुमान है कि एशियाई जलक्षेत्र में इस समय टैंकरों पर करीब 95 लाख बैरल रूसी तेल मौजूद है, जिसे भारत अपना सकता है।

टैरिफ की नीतिगत उलझन और अमेरिकी दबाव

यह घटनाक्रम तब हुआ है जब हाल ही में अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति बनी थी। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया था, साथ ही रूसी तेल की खरीद पर लगाए गए अतिरिक्त 25% टैरिफ को भी खत्म कर दिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि यह छूट इसलिए दी गई क्योंकि भारत रूसी तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया है।

भारत ने आधिकारिक तौर पर रूसी तेल खरीदना बंद करने की कभी पुष्टि नहीं की, लेकिन अमेरिकी दबाव के चलते फरवरी में रूस से तेल आयात गिरकर प्रतिदिन 10 लाख बैरल रह गया था, जो सितंबर 2022 के बाद सबसे कम स्तर था। इस दौरान सऊदी अरब भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बन गया था।

सरकार की कवायद: अमेरिकी छूट की मांग

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल मंत्रालय के अधिकारी विदेश मंत्रालय से अमेरिका से छूट दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। भारतीय तेल कंपनियां बिना अमेरिकी छूट लिए रूसी तेल खरीदने का जोखिम नहीं उठाना चाहतीं, ताकि वे अमेरिकी प्रतिबंधों की जद में न आएं। लेकिन मध्य-पूर्व में गहराते संकट को देखते हुए रूसी तेल की खरीद बढ़ाना भारत के लिए सबसे व्यावहारिक विकल्प बनकर उभर रहा है। Internatioanl News

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ईरान पर हमले के लिए बेस न देने पर भड़के ट्रंप

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यूनाइटेड किंगडम ईरान पर हुए हमले में शामिल नहीं है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए स्टार्मर ने कहा, "ईरान ब्रिटिश संपत्तियों पर हमला कर रहा है।

US President Donald Trump attacks Iran
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar02 Mar 2026 06:56 PM
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US Iran Conflict: ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिका और ब्रिटेन के बीच गहरे तनाव के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से खुलकर नाराजगी जताई है। ट्रंप इसलिए गुस्से में हैं क्योंकि ब्रिटेन ने ईरान पर हमला करने के लिए अमेरिका को हिंद महासागर में स्थित रणनीतिक द्वीप 'डिएगो गार्सिया' का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी थी।

'द टेलीग्राफ' को दिया बयान

ब्रिटिश अखबार 'द टेलीग्राफ' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे प्रधानमंत्री स्टार्मर से "बहुत निराश" हैं। ट्रंप ने कहा, "शायद हमारे देशों के बीच ऐसा पहले कभी नहीं हुआ होगा।" उन्होंने आरोप लगाया कि स्टार्मर ने अपने देश में विरोध के डर और वैधानिक जटिलताओं के कारण अमेरिकी सेना को इस महत्वपूर्ण बेस का इस्तेमाल करने से रोका, जो कष्टदायक है।

क्या है विवाद की वजह?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रिटेन ने अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देते हुए अमेरिका को डिएगो गार्सिया और RAF फेयरफोर्ड जैसे अपने बेस से ईरान पर हमला करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। हालांकि, बाद में रविवार रात को स्थिति बदली और प्रधानमंत्री स्टार्मर ने "विशेष और सीमित रक्षात्मक उद्देश्यों" के लिए अमेरिका को डिएगो गार्सिया का उपयोग करने की मंजूरी दे दी।

चागोस डील से समर्थन वापस लिया

इस विवाद का असर द्विपक्षीय समझौतों पर भी दिख रहा है। डिएगो गार्सिया को लेकर हुए झगड़े के चलते राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री स्टार्मर की विवादित 'चागोस डील' से अपना समर्थन वापस ले लिया है। इस डील के तहत हिंद महासागर के चागोस क्षेत्र का मालिकाना हक मॉरीशस को सौंपने और बदले में सैन्य अड्डे को लीज पर वापस रखने की बात थी। ट्रंप का यह कदम ब्रिटिश सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

'हम जंग में शामिल नहीं हैं': स्टार्मर

इस बीच, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यूनाइटेड किंगडम ईरान पर हुए हमले में शामिल नहीं है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए स्टार्मर ने कहा, "ईरान ब्रिटिश संपत्तियों पर हमला कर रहा है और ब्रिटिश लोगों को खतरे में डाल रहा है, इसलिए ब्रिटिश जेट खाड़ी में 'समन्वित रक्षात्मक अभियान' (Coordinated Defensive Operation) के हिस्से के तौर पर हवा में हैं।" उन्होंने पुष्टि की कि अमेरिका को रक्षात्मक आवश्यकताओं के लिए ब्रिटिश बेस का उपयोग करने की अनुमति दी गई है, लेकिन ब्रिटेन सीधे आक्रामक कार्रवाई का हिस्सा नहीं है।

डिएगो गार्सिया का महत्व

डिएगो गार्सिया चागोस द्वीप समूह का सबसे बड़ा द्वीप है, जो हिंद महासागर में स्थित है। यहां स्थित सैन्य अड्डा अमेरिका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्तमान में ब्रिटेन के पास इस द्वीप पर 99 साल का लीज है, जिसके तहत वे यहां सैन्य बेस बिना किसी रुकावट के संचालित करते हैं। US Iran Conflict

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