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नेपाल में प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह के शुरुआती 45 दिनों के फैसलों को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

India-Nepal Relations : नेपाल में प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह के शुरुआती 45 दिनों के फैसलों को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। कुछ नीतिगत कदमों को भारत-नेपाल संबंधों के संदर्भ में संवेदनशील माना जा रहा है, हालांकि दोनों देशों की सरकारों की ओर से आधिकारिक बयान सावधानी भरे रहे हैं।
बालेन शाह ने 27 मार्च को नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। पद संभालने के बाद से ही उनकी नीतियों और फैसलों पर लगातार नजर रखी जा रही है। शुरुआती कुछ ही हफ्तों में लिए गए निर्णयों को लेकर विपक्ष और विश्लेषकों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
नेपाल सरकार द्वारा हाल ही में सीमा प्रबंधन से जुड़े कुछ बदलाव किए गए हैं, जिनमें भारत से आने वाले नागरिकों के लिए पहचान पत्र दिखाने और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया को सख्त करने की बात सामने आई है। खुली सीमा व्यवस्था के तहत लंबे समय से दोनों देशों के नागरिक बिना बाधा आवागमन करते रहे हैं, ऐसे में इस बदलाव को लेकर सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में चर्चा और असहजता देखी जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत के विदेश सचिव की प्रस्तावित नेपाल यात्रा और उच्चस्तरीय बैठक को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं रही, जिसके बाद यह दौरा रद हो गया। बताया जा रहा है कि नेपाल ने केवल समान स्तर के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की शर्त रखी थी। हालांकि, इस पूरे मामले पर आधिकारिक तौर पर भारत सरकार की ओर से कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की गई है।
नेपाल की ओर से एक बार फिर कालापानी और लिपुलेख क्षेत्र को लेकर पुराना सीमा विवाद उठाया गया है। नेपाल इन क्षेत्रों पर अपना दावा जताता रहा है। इस मुद्दे पर भारत पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि यह क्षेत्र उसके प्रशासनिक दायरे में आता है और इस तरह के बयान अनावश्यक विवाद को जन्म दे सकते हैं।
नई व्यवस्था के तहत भारत-नेपाल सीमा के जरिए होने वाले छोटे व्यापार पर भी असर पड़ने की बात सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ सीमा क्षेत्रों में 100 रुपये से अधिक के सामान पर कस्टम जांच जैसी प्रक्रिया लागू होने से स्थानीय लोगों को असुविधा हो रही है।
तराई क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि रोजमर्रा के सामान की आवाजाही पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके पुराने राजनीतिक रुख और बयानों को भी फिर से चर्चा में लाया जा रहा है। 2022 में ग्रेटर नेपाल मैप से जुड़े उनके सोशल मीडिया पोस्ट और काठमांडू मेयर रहते कुछ फैसलों को लेकर भी राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग राय रख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ते मजबूत हैं, लेकिन वर्तमान घटनाक्रम के बीच कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि दोनों सरकारें संवाद और सहयोग को किस दिशा में आगे बढ़ाती हैं।
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