
बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के ‘ऑपरेशन हेरोफ’ की पहली वर्षगांठ पर सोमवार को बलोचिस्तान के कई हिस्सों में हिंसक झड़पें और नाकाबंदियां देखने को मिलीं। बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के कुख्यात ‘ऑपरेशन हेरोफ’ की पहली बरसी पर सोमवार को पूरा बलोचिस्तान अशांत हो उठा। मस्तुंग जिले के आमच बांध इलाके में बीएलए लड़ाकों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई, जिसमें कई सैनिकों के मारे जाने और घायल होने की खबर है। प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि हेलीकॉप्टरों से शवों और घायलों को क्वेटा ले जाया गया, जबकि हालात काबू में करने के लिए अतिरिक्त फौज तैनात कर दी गई है। Balochistan News
‘द बलोचिस्तान पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बीएलए के लड़ाकों ने मस्तुंग के दश्त इलाके में चौकियां स्थापित कीं। दिन में कडकोचा क्षेत्र में भी हथियारबंद लोगों ने राजमार्ग बंद कर दिया, जिससे घंटों यातायात ठप रहा। केच जिले के कलातुक में विद्रोहियों ने मुख्य मार्ग पर लेवी चौकी पर कब्जा किया और जवानों को कुछ समय के लिए बंधक बनाया। उन्हें बाद में छोड़ दिया गया, लेकिन हथियार जब्त कर लिए गए। वहीं, सिबी जिले के मिथरी क्षेत्र में सुरक्षा चौकी पर हमला किया गया और तुरबत में पाकिस्तानी बलों को निशाना बनाकर ग्रेनेड विस्फोट किया गया। सूत्रों के मुताबिक, इन घटनाओं में दो से अधिक जवान हताहत हुए।
बढ़ती असुरक्षा को देखते हुए पाकिस्तानी प्रशासन ने कई जिलों में पाबंदियां कड़ी कर दी हैं। रेलवे ने क्वेटा-पेशावर के बीच चलने वाली जफर एक्सप्रेस को दो दिनों के लिए निलंबित कर दिया है। बसीमा में रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक आवागमन रोक दिया गया है। केच के नसीराबाद क्षेत्र में बाजार बंद हैं।
इसके अलावा, जियारत में 10 अगस्त को अफसर अफजल बाकी और उनके बेटे के अपहरण के बाद से लगातार कर्फ्यू जैसे हालात हैं। वहां स्कूल, कॉलेज और दुकानें बंद हैं। कई जिलों में इंटरनेट, मोबाइल और बैंकिंग सेवाएं भी निलंबित हैं।
बीएलए ने 25 अगस्त 2024 को ‘ऑपरेशन हेरोफ’ की शुरुआत की थी, जिसे संगठन ने बलोचिस्तान को “पुनः प्राप्त करने” की लड़ाई का पहला चरण बताया था। ‘हेरोफ’ शब्द का अर्थ बलोची और ब्राहुई भाषाओं में “काला तूफान” होता है। इस बहुचरणीय अभियान में बीएलए की मजीद ब्रिगेड, स्पेशल टैक्टिकल ऑपरेशंस स्क्वॉड (एसटीओएस) और फतेह स्क्वॉड की विशेष इकाइयों ने हिस्सा लिया था।
लगभग 20 घंटे चले इस हमले के दौरान विद्रोहियों ने दावा किया था कि उन्होंने 130 से अधिक पाक सैनिकों को मार गिराया और कई जिलों में सरकारी प्रतिष्ठानों, पुलिस व लेवी चौकियों तथा राजमार्गों पर कब्जा जमाया। रेलवे पुल उड़ाए गए, सड़कें बंद की गईं और हथियार लूटे गए। उस समय इसे बलोच विद्रोह के इतिहास की सबसे बड़ी समन्वित कार्रवाई करार दिया गया था। तब से बीएलए समय-समय पर अपने अभियानों को अंजाम देता आ रहा है। Balochistan News