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मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट आफ होर्मुज पर मंडरा रहे संकट के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर नई चिंताएं सामने आ गई हैं।

Hormuz Crisis : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट आफ होर्मुज पर मंडरा रहे संकट के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर नई चिंताएं सामने आ गई हैं। दुनिया पहले ही कच्चे तेल और गैस की सप्लाई को लेकर दबाव में थी, लेकिन अब अमेरिका और रूस से आई दो बड़ी खबरों ने हालात को और गंभीर बना दिया है। पहली खबर अमेरिका से आई है, जहां डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने रूसी कच्चे तेल पर दी गई अस्थायी छूट को आगे नहीं बढ़ाया। वहीं दूसरी ओर रूस में यूक्रेन के ड्रोन हमले के बाद एक बड़ी आयल रिफाइनरी में आग लग गई, जिससे तेल सप्लाई पर नए संकट के संकेत मिलने लगे हैं।Hormuz Crisis
अमेरिका ने रूस के तेल निर्यात से जुड़ी जिस अस्थायी राहत को पहले सीमित समय के लिए मंजूरी दी थी, उसे अब समाप्त होने दिया गया है। मार्च और अप्रैल में यह राहत उन टैंकरों के लिए दी गई थी, जिनमें पहले से रूसी तेल लोड था। अब इस छूट के खत्म होने का सीधा असर उन देशों पर पड़ सकता है जो रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद रहे थे। इसमें भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों की चिंता भी बढ़ गई है। यूरोपीय देश लंबे समय से रूस पर सख्त प्रतिबंध बनाए रखने की मांग कर रहे थे ताकि यूक्रेन युद्ध के लिए मॉस्को की आर्थिक ताकत कमजोर की जा सके। दूसरी तरफ भारत और इंडोनेशिया जैसे देशों ने ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए इस राहत को जारी रखने की वकालत की थी।Hormuz Crisis
इसी बीच रूस के रियाजान क्षेत्र में यूक्रेन के ड्रोन हमले ने हालात और बिगाड़ दिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में एक बड़े तेल डिपो और रिफाइनरी परिसर में आग लग गई। घटना में कई लोगों के मारे जाने की भी खबर है। इस हमले के बाद रूस की ऊर्जा सप्लाई चेन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ऐसे हमले लगातार बढ़ते हैं तो वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदकर अपने आयात बिल को नियंत्रित करने की कोशिश की थी। लेकिन यदि अमेरिकी प्रतिबंध और सख्त होते हैं और रूस से सप्लाई प्रभावित होती है, तो भारत के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई पर दबाव दोनों को भुगतना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज क्षेत्र में तनाव और बढ़ा तो इसका असर सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि एलएनजी सप्लाई और वैश्विक शिपिंग लागत पर भी दिखाई दे सकता है। Hormuz Crisis
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