
इजरायल-ईरान संघर्ष के दौरान डॉलर ने जबर्दस्त मजबूती दिखाई थी। लेकिन युद्धविराम के बाद बाजारों में अस्थिरता और जोखिम में कमी के चलते डॉलर का आकर्षण घटा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, डॉलर इंडेक्स बुधवार को फिसलकर 97.48 पर आ गया, जो साल 2025 की अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है — करीब 10.1% की।
डॉलर की गिरावट से सबसे ज्यादा लाभ यूरो और येन जैसी प्रमुख मुद्राओं को हुआ है। यूरो 0.4% की बढ़त के साथ 1.1700 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जो सितंबर 2021 के बाद इसका सर्वोच्च बिंदु है। वहीं, पाउंड स्टर्लिंग ने भी जनवरी 2022 के बाद का उच्चतम स्तर 1.3723 डॉलर छू लिया। स्विस फ्रैंक और जापानी येन ने भी डॉलर के मुकाबले अच्छी मजबूती दिखाई।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक न्यूयॉर्क के वरिष्ठ अर्थशास्त्री स्टीव इंग्लैंडर का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा इस वर्ष और दर कटौती की संभावनाओं ने डॉलर की मांग को कमजोर किया है। साथ ही, अमेरिकी फेड के स्वतंत्र निर्णयों को लेकर भी संदेह पैदा हुआ है।
फेड प्रमुख जेरोम पॉवेल द्वारा कांग्रेस में दी गई टिप्पणी भी उल्लेखनीय है, जिसमें उन्होंने ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियों को महंगाई बढ़ाने वाला कारक बताया। जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों ने भी इसी ओर इशारा करते हुए कहा कि अगर टैरिफ नीतियों में सख्ती आती है, तो यह वैश्विक विकास दर को प्रभावित कर सकती है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की हालिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सितंबर या अक्टूबर में जेरोम पॉवेल की जगह किसी नए चेयरमैन की नियुक्ति पर विचार कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह कदम राजनीतिक प्रेरणा से उठाया गया प्रतीत होता है, तो इससे फेड की स्वायत्तता पर सवाल खड़े हो सकते हैं और अमेरिकी मुद्रा की विश्वसनीयता को और धक्का लग सकता है। US Dollar Fall