अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग के 37वें दिन हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। इसी बीच ईरान से एक बेहद सख्त और विवादित कार्रवाई की खबर सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है।

US-Israel-Iran War : अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग के 37वें दिन हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। इसी बीच ईरान से एक बेहद सख्त और विवादित कार्रवाई की खबर सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, जनवरी में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दो लोगों मोहम्मद अमीन बिग्लारी और शाहिन वाहेदी परस्त को गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि उन्होंने तेहरान में एक संवेदनशील सैन्य ठिकाने पर हमला करने और हथियार भंडार में घुसने की कोशिश की। अदालत ने इन्हें दुश्मन का एजेंट करार दिया, इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ साजिश का दोषी पाया और आखिरकार अब दोनों को फांसी की सजा दे दी गई।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कार्रवाई सिर्फ सजा नहीं बल्कि एक राजनीतिक और सैन्य संदेश भी है कि युद्ध और अंदरूनी अस्थिरता के बीच ईरान किसी भी तरह की बगावत को बर्दाश्त नहीं करेगा। दूसरी ओर, इजराइल ने ईरान और लेबनान में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की है:
* 200+ ईरानी ठिकानों पर हमला
* 140+ ठिकानों पर हमला (हिजबुल्ला)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। हालांकि ईरान की सेना ने इस चेतावनी को खारिज करते हुए इसे घबराहट भरा, असंतुलित, मूर्खतापूर्ण कदम बताया है। इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि बाहर जंग और अंदर असंतोष दोनों मोर्चों पर दबाव बढ़ रहा है। सरकार सख्ती के जरिए नियंत्रण बनाए रखना चाहती है। लेकिन इससे अंतरराष्ट्रीय आलोचना और मानवाधिकार पर सवाल भी उठ सकते हैं।