एक जमीन पर कई देश हैं दावेदार, एक इंच भी कोई छोड़ने को तैयार नहीं
भारत
चेतना मंच
24 Jul 2025 09:04 PM
Border Dispute : भूमि को लेकर विवाद सिर्फ गांवों की सीमा तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जमीन ने युद्ध, राजनीतिक तनाव और कूटनीतिक गतिरोध को जन्म दिया है। चाहे वो महाभारत काल हो या आधुनिक वैश्विक राजनीति, सीमा विवादों ने हमेशा से भू-राजनीति का चेहरा गढ़ा है। आज हम बात कर रहे हैं उन अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर विवादों की, जिनमें न सिर्फ भू-भाग का स्वामित्व, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों, समुद्री अधिकारों और रणनीतिक वर्चस्व का सवाल भी छिपा है। आइए जानते हैं दुनिया के सबसे जटिल और लंबे समय से चल रहे सीमाई संघर्षों के बारे में:
सेनकाकू/दियाओयू द्वीप विवाद
दावेदार : चीन, जापान, ताइवान
पूर्वी चीन सागर में स्थित सेनकाकू द्वीपसमूह (जापानी नाम) या दियाओयू द्वीप (चीनी नाम) पर तीन देशों का दावा है। यह द्वीप न केवल रणनीतिक दृष्टि से अहम है, बल्कि इसके नीचे तेल और प्राकृतिक गैस के भंडार होने की संभावना ने विवाद को और तीव्र बना दिया है।
वर्ष 2012 में जापानी सरकार द्वारा इन द्वीपों को एक निजी परिवार से खरीदने के बाद चीन में व्यापक विरोध प्रदर्शन और दंगे भड़के थे। विशेषज्ञ चेताते हैं कि यदि यह टकराव बढ़ा, तो यह एशिया-प्रशांत में तनाव का बड़ा कारण बन सकता है।
कुरील द्वीप समूह विवाद
दावेदार: रूस और जापान
प्रशांत महासागर में फैले 56 द्वीपों के इस समूह पर द्वितीय विश्व युद्ध के अंत से लेकर आज तक रूस और जापान आमने-सामने हैं।
1945 में सोवियत संघ ने इन द्वीपों पर कब्जा कर लिया था। जापान इन द्वीपों को नॉर्दर्न टेरिटरीज कहता है। जबकि रूस इन्हें कुरील के नाम से जानता है। इस विवाद ने अब तक दोनों देशों के बीच शांति समझौता तक नहीं होने दिया, और यह द्विपक्षीय रिश्तों में स्थायी तनाव का कारण बना हुआ है।
मोरक्को और पश्चिमी सहारा विवाद
दावेदार: मोरक्को और पोलिसारियो फ्रंट (स्वतंत्रता समर्थक संगठन)
पश्चिमी सहारा, जो उत्तर-पश्चिम अफ्रीका में स्थित है, पिछले कई दशकों से स्वतंत्रता की मांग को लेकर संघर्षरत है। 1970 के दशक से यहां के स्थानीय निवासी मोरक्को के खिलाफ आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं। मोरक्को इसे अपने राज्य का हिस्सा बताता है, जबकि पश्चिमी सहारा के लोग इसे एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दिलाने की मांग कर रहे हैं। इस क्षेत्र को लेकर संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रस्तावित जनमत संग्रह भी आज तक संभव नहीं हो सका है। यह विवाद न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता, बल्कि अफ्रीकी राजनीति में भी गहरा प्रभाव डालता है।
सीमा विवाद : सिर्फ जमीन नहीं, परछाईं है भू-राजनीति की
इन विवादों में सिर्फ सीमा की लकीरें नहीं खिंची जातीं, बल्कि देशों की राष्ट्रनीति, पहचान और सामरिक महत्वाकांक्षाएं भी उलझती हैं। चाहे वह पूर्वी एशिया हो, प्रशांत क्षेत्र या अफ्रीका, एक इंच जमीन की खातिर कूटनीति से लेकर जंगी तैयारियां तक हो रही हैं। इन टकरावों को समझना जरूरी है, क्योंकि आज के दौर में ये विवाद सिर्फ नक्शों तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक शांति, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर गहरा असर डालते हैं।