मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनावपूर्ण संघर्ष को रोकने के लिए पाकिस्तान एक अहम कूटनीतिक भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।

Us Iran War : मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनावपूर्ण संघर्ष को रोकने के लिए पाकिस्तान एक अहम कूटनीतिक भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच युद्धविराम कराने के लिए एक विशेष प्रस्ताव रखा है, जिस पर ईरान विचार कर रहा है, हालांकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर मतभेद अभी भी इस समझौते में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए एक दो चरणों वाला शांति प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव के तहत पहले चरण में तत्काल युद्धविराम लागू करने और दूसरे चरण में स्थायी शांति समझौते पर बातचीत का सुझाव दिया गया है।
बताया जा रहा है कि इस योजना के अनुसार:
इसके बाद क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था और परमाणु कार्यक्रम सहित अन्य मुद्दों पर अंतिम समझौता किया जाएगा।
मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि इस प्रस्ताव को अनौपचारिक रूप से “इस्लामाबाद समझौता” नाम दिया गया है, जिसके तहत आगे की वार्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित की जा सकती है।
हालांकि इस प्रस्ताव पर बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों पक्षों के बीच गंभीर मतभेद हैं। अमेरिका का कहना है कि युद्धविराम तभी संभव है जब यह समुद्री मार्ग पूरी तरह खुला और सुरक्षित हो, क्योंकि यह वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है। दूसरी ओर ईरान का रुख काफी सख्त बताया जा रहा है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा और इस मुद्दे पर किसी भी समझौते से पहले अमेरिका को कुछ ठोस कदम उठाने होंगे।
इस कूटनीतिक प्रयास में केवल पाकिस्तान ही नहीं बल्कि मिस्र और तुर्की भी मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। इन देशों के प्रतिनिधि लगातार दोनों पक्षों से संपर्क बनाए हुए हैं और बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक अमेरिका के विशेष दूत और ईरान के विदेश मंत्री के बीच संदेशों के जरिए भी बातचीत जारी है। लेकिन अभी तक किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान की पहल को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है और पहले की कोशिशें भी ठोस परिणाम नहीं दे सकी हैं। ईरान ने कुछ शर्तों पर आपत्ति जताई है, जिसके कारण वार्ता कई बार रुक भी चुकी है। फिलहाल कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सहमति बन जाती है तो युद्धविराम की राह खुल सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह युद्ध लंबा चला तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस संघर्ष को जल्द समाप्त करने के लिए प्रयास कर रहा है। Us Iran War