चीन ने थोरियम को यूरेनियम में बदला, दुनिया रह गई हैरान
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 12:01 AM
काफी लंबे समय से विश्व के कुछ देश कुछ खास धातुओं को यूरेनियम में बदलने की कवायद में जुटे हुए हैं। लेकिन इस कवायद में सही सफलता चीन ने मार ली है। चीन ने गोबी रेगिस्तान के वुवेई में स्थित दो मेगावॉट थोरियम मॉल्टन-सॉल्ट रिएक्टर में थोरियम को यूरेनियम में बदलने में सफलता हासिल कर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि थोरियम को इंसान के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और फायदेमंद परमाणु ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। China's Feat :
प्रक्रिया कैसे काम करती है?
थोरियम-232 को न्यूट्रॉन के संपर्क में लाया जाता है। यह थोरियम-233 बनता है, जो बीटा क्षय से प्रोटैक्टिनियम-233 में बदलता है और फिर 27 दिनों में यूरेनियम-233 बन जाता है। यूरेनियम-233 विभाज्य नाभिक है, जो ऊर्जा उत्पादन के साथ नए थोरियम को सक्रिय करता है। इस प्रक्रिया को थोरियम ईंधन चक्र कहा जाता है, जिसमें रिएक्टर के अंदर ईंधन का अधिकांश हिस्सा स्वत: बनता रहता है।
इतिहास और वैश्विक प्रयास
* 1940 के दशक में अमेरिका के वैज्ञानिकों ने इस तकनीक पर काम शुरू किया।
* भारत ने होमी भाभा के तहत त्रिस्तरीय नाभिकीय कार्यक्रम अपनाया।
* चीन ने 2011 में राष्ट्रीय वैज्ञानिक पायलट परियोजना के रूप में मॉल्टन-सॉल्ट रिएक्टर शुरू किया। 2025 में थोरियम से यूरेनियम रूपांतरण के आंकड़े सार्वजनिक हुए।
विश्व के लिए खास क्यों?
1. ऊर्जा सुरक्षा : थोरियम, यूरेनियम की तुलना में तीन से चार गुना अधिक पाया जाता है।
2. सुरक्षा और कम अपशिष्ट: रिएक्टर वायुमंडलीय दाब पर चलता है, विस्फोट का खतरा कम, और रेडियोधर्मी कचरा लगभग दस गुना कम।
3. हथियार प्रसंस्करण रोक: यू-233 में यू-232 की अशुद्धि होती है, जिससे हथियार बनाने में कठिनाई।
4. उच्च तापमान सह-उत्पाद: 700डिग्री सेंटीग्रेट तक का ताप उद्योगों, हाइड्रोजन उत्पादन और समुद्री जल शोधन में काम आता है।
5. नवोन्मेषी अनुप्रयोग: मॉड्यूलर रिएक्टर द्वीप, ध्रुवीय शोध-स्थान और भविष्य में चंद्र आधार के लिए भी उपयुक्त।
चुनौतियां और समाधान
* फ्लोराइड सॉल्ट उच्च ताप पर धातुओं को घुला देता है।
* चीन ने विशेष मिश्र धातु और सुरक्षित तरल ईंधन चक्र विकसित किया।
* 2035 तक 100 मेगावॉट प्रदर्शन रिएक्टर और 2050 तक वाणिज्यिक तैनाती का रोडमैप तैयार।
भारत और वैश्विक परिप्रेक्ष्य
भारत के पास विशाल थोरियम भंडार है। यदि चीन की सफलता उत्पादन स्तर पर स्थिर रहती है, तो भारत का त्रिस्तरीय कार्यक्रम तेजी से तीसरे चरण में पहुँच सकता है। थोरियम-आधारित रिएक्टर दीर्घकालीन, स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा का विकल्प साबित होंगे। थोरियम से यूरेनियम का रूपांतरण जादू नहीं, बल्कि न्यूट्रॉन भौतिकी और सामग्री विज्ञान का अद्भुत प्रयोग है। यह ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु संरक्षण और आर्थिक विकास तीनों मोर्चों पर नई राह खोल सकता है।