इस आतंकी संगठन से कांपता है चीन, संयुक्त राष्ट्र तक से लगा चुका है गुहार
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 10:57 AM
चीन के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द न अलकायदा है और न ही इस्लामिक स्टेट, बल्कि एक ऐसा संगठन है जिसकी जड़ें पाकिस्तान और अफगानिस्तान तक फैली हैं। चीन के इस सिरदर्द का नाम है ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM)। यही वह संगठन है, जिसे लेकर चीन संयुक्त राष्ट्र तक से गुहार लगा चुका है कि इस पर तुरंत कार्रवाई की जाए, वरना इसका जाल सीरिया से लेकर दक्षिण एशिया तक तबाही मचा सकता है। China's Headache :
क्यों डरा हुआ है चीन?
संयुक्त राष्ट्र की हालिया बैठक में चीन के उप-स्थायी प्रतिनिधि गेंग शुआंग ने खुलासा किया कि ETIM के हजारों आतंकी सीरिया में फिर से सक्रिय हो चुके हैं। उनका दावा है कि अगर इन्हें नहीं रोका गया तो ये आतंकी न सिर्फ मिडिल ईस्ट बल्कि भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया को भी अस्थिर कर देंगे। दरअसल, यह संगठन सीधे शिनजियांग प्रांत को निशाना बनाता है, जहां करीब 1.7 करोड़ उइगर मुसलमान रहते हैं। इन्हीं उइगरों की आड़ लेकर यह संगठन चीन से अलग तुर्किस्तान मुल्क बनाने का सपना देखता है।
कब और कैसे हुआ गठन?
ETIM की स्थापना 1990 में हसन महमून ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान की जमीन पर की थी। शुरू में इस संगठन को अलकायदा से फंडिंग मिली और ओसामा बिन लादेन की देखरेख में इसके आतंकियों को ट्रेनिंग दी गई। 2002 में वैश्विक दबाव बढ़ा और कई देशों ने इस पर प्रतिबंध लगाया। 2003 में चीन ने पाकिस्तान की मदद से इसके संस्थापक हसन महमून को मार गिराया। इसके बाद 2010 में उसका उत्तराधिकारी अब्दुल हक भी मारा गया। तब से यह संगठन बिना किसी आधिकारिक नेतृत्व के पर्दे के पीछे से सक्रिय है।
चीन में किए बड़े हमले
इन हमलों में 260 से ज्यादा लोग मारे गए और 500 से ज्यादा घायल हुए। इन्हीं घटनाओं के बाद चीन ने सीधे उइगर मुसलमानों को निगरानी के घेरे में लेना शुरू किया और उन पर सख्ती बढ़ाई। 2008 से 2014 के बीच ETIM ने चीन को आठ बड़े हमलों से दहला दिया।
* काशगर हमला
* बीजिंग ओलंपिक से पहले अटैक
* उरुमकी दंगे
* कुनमिंग रेलवे स्टेशन पर हमला
क्यों बढ़ रही है चिंता?
सीरिया और अफगानिस्तान में हालात बदलने के बाद ETIM को नया ठिकाना मिल रहा है। हजारों आतंकी अब वहां सक्रिय हैं। चीन को आशंका है कि अगला निशाना उसका शिनजियांग प्रांत होगा। यह डर इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि शिनजियांग से होकर ही चीन का बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट गुजरता है। अगर यहां बगावत भड़कती है तो अरबों डॉलर के इस प्रोजेक्ट पर संकट मंडरा जाएगा। चीन बार-बार दावा करता है कि उइगर मुसलमानों को वह विकास की मुख्यधारा से जोड़ रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि ईटीआईएम की परछाई उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन चुकी है। यही वजह है कि बीजिंग आज इस संगठन का नाम सुनते ही चौकन्ना हो जाता है।