रेयर अर्थ पर चीन की नई चाल, क्या भारत को सतर्क हो जाना चाहिए?
Chinese Strategy
भारत
चेतना मंच
20 Jul 2025 03:51 PM
Chinese Strategy : रेयर अर्थ खनिजों को लेकर चीन की रणनीति एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में है। दुनिया की सबसे बड़ी रेयर अर्थ इकॉनमी अब राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीति में एक नया पैंतरा चला रही है। ताजा घटनाक्रम में चीन ने विदेशी एजेंटों पर रेयर अर्थ एलिमेंट्स की चोरी और तस्करी का आरोप लगाया है। बिना किसी देश का नाम लिए, लेकिन संकेत साफ हैं। क्या यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है, या फिर चीन का अगला चालाक वार?
रेयर अर्थ : तकनीकी दुनिया का मूक आधार
रेयर अर्थ एलिमेंट्स, जिनके नाम लैंथेनम, नियोडिमियम, सेरियम जैसे जटिल लगते हैं। दरअसल वो जादुई तत्व हैं जो दुनिया की टेक्नोलॉजी को चालित करते हैं। स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक कार, सोलर पैनल से लेकर मिसाइल गाइडेंस सिस्टम तक, इन तत्वों की भूमिका निर्णायक है। और इन खनिजों की 60% से अधिक वैश्विक आपूर्ति अकेले चीन करता है। यानी, तकनीक की रगों में बहता खून, फिलहाल बीजिंग की मुट्ठी में बंद है।
चीन का जासूसी वाला आरोप : हकीकत या रणनीतिक भ्रम?
चीनी खुफिया मंत्रालय ने हाल ही में दावा किया है कि विदेशी ताकतें और उनके एजेंट देश की रेयर अर्थ संपदा चुराने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्रालय ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है, लेकिन किसी देश का नाम नहीं लिया गया। समझने वाली बात यह है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब चीन और अमेरिका के बीच व्यापार युद्ध फिर से गरमा गया है। अप्रैल 2025 में ट्रंप प्रशासन द्वारा 145% टैरिफ और फिर जवाबी कार्रवाई में चीन के 125% टैरिफ के बाद दोनों देश भले ही जिनेवा समझौते के तहत टैरिफ कम करने पर राजी हुए, लेकिन अविश्वास की दरारें जस की तस हैं।
रेयर अर्थ एलिमेंट्स के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर
इस संदर्भ में चीन का यह जासूसी-आरोप उसकी नियंत्रण की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। एक सीधा संकेत है कि वह वैश्विक तकनीकी सप्लाई चेन को मनमाने मोड़ पर ले जाने को तैयार है। विश्लेषक मानते हैं कि यह चाल सीधे-सीधे अमेरिका को निशाना बनाकर चली गई है, लेकिन इसका असर केवल वॉशिंगटन तक सीमित नहीं रहेगा। भारत, जो अब भी रेयर अर्थ एलिमेंट्स के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर है, उस पर भी इसका असर पड़ सकता है। स्मार्टफोन निर्माण से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन और रक्षा क्षेत्र तक, भारत की उभरती हुई तकनीकी अर्थव्यवस्था इन तत्वों पर निर्भर करती है। अगर चीन ने निर्यात पर और अधिक शिकंजा कस दिया, तो भारत को अपने कई सेक्टर्स में झटका लग सकता है। उदाहरण के तौर पर, फोर्ड और टेस्ला जैसी वैश्विक कंपनियों को पहले ही झटका लग चुका है। भारत की आॅटो इंडस्ट्री इससे कैसे अछूती रहेगी?
भारत की तैयारी, क्या काफी है?
भारत सरकार ने हाल के वर्षों में रेयर अर्थ की खोज और घरेलू खनन को लेकर नीतिगत कदम जरूर उठाए हैं। इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड, आईआईटी-आईएसएम धनबाद, और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर जैसी संस्थाएं इस दिशा में सक्रिय हैं। लेकिन वैश्विक मांग के मुकाबले हमारी आपूर्ति और रिफाइनिंग कैपेसिटी अभी बहुत पीछे है। यह समय है जब भारत को चीन-मुक्त सप्लाई चेन की ओर तेजी से कदम बढ़ाने होंगे। इसके लिए आॅस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्राजील जैसे देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी, संयुक्त खनन परियोजनाएं और प्रौद्योगिकी स्थानांतरण की जरूरत होगी।
ड्रैगन की चाल और भारत का विकल्प
चीन का यह नया आरोप केवल एक सुरक्षा चेतावनी नहीं है, यह उसकी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें संसाधनों के जरिये नियंत्रण और दबाव बनाने का खेल खेला जा रहा है। भारत को यह समझने की जरूरत है कि तकनीक के इस युग में रेयर अर्थ स्ट्रैटेजिक ताकत। अगर हम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सच में गंभीर हैं, तो हमें इस क्षेत्र में भी वैसी ही आक्रामक नीति चाहिए, जैसी हमने सेमीकंडक्टर या डिफेंस निर्माण में दिखाई है।