काबुल का काउंटडाउन शुरू! दुनिया का पहला बिन पानी वाला शहर बनने की कगार पर
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 05:47 PM
Kabul : कभी अफगानिस्तान की रूह कहा जाने वाला काबुल (Kabul) अब अपने अस्तित्व के सबसे गंभीर संकट से जूझ रहा है। हिंदूकुश की पहाड़ियों में बसा यह ऐतिहासिक शहर जहां कभी संस्कृति और कारोबार की रौनक थी अब पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसने की कगार पर है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक काबुल पूरी तरह पानीविहीन शहर बन सकता है यानी वहां पीने या जरूरत के लिए भूजल उपलब्ध नहीं होगा।
भूजल 30 मीटर तक गिरा
नॉन प्रॉफिट संस्था मर्सी कॉर्प्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में काबुल के भूजल स्तर में 25 से 30 मीटर की गिरावट आई है। जमीन से हर साल जितना पानी निकाला जा रहा है, वह उसकी प्राकृतिक भरपाई से 4.4 करोड़ क्यूबिक मीटर ज्यादा है। इसका सीधा असर यह है कि आधे से ज्यादा बोरवेल सूख चुके हैं और करीब 80 फीसदी पानी प्रदूषित हो चुका है।
पानी के इस संकट के पीछे हैं तीन बड़ी वजहेंजलवायु परिवर्तन की दोहरी मार
अफगानिस्तान में अब न तो पहले जैसी बर्फबारी होती है, न ही बारिश। 2023 में औसत से 40-50% कम वर्षा हुई। जलस्रोतों का रिचार्ज नहीं हो पा रहा जिससे हर साल स्थिति और खराब होती जा रही है।
प्रशासनिक विफलताएं
जल प्रबंधन, पाइपलाइन सुधार और रेनवॉटर हार्वेस्टिंग जैसे जरूरी काम लंबे समय से नजरअंदाज किए जा रहे हैं। 170 मिलियन डॉलर की लागत वाला पंजशीर नदी से पानी लाने वाला प्रोजेक्ट सालों से फाइलों में दबा पड़ा है।
तेजी से बढ़ती आबादी
2001 में काबुल की आबादी करीब 10 लाख थी, जो आज 60 लाख से ज्यादा हो चुकी है। युद्ध, आतंकी हमलों और शासन व्यवस्था की अस्थिरता ने लाखों लोगों को काबुल की ओर विस्थापित किया, जिससे सीमित जल संसाधनों पर भारी दबाव पड़ा।
बोतलबंद पानी कंपनियां बना रही हालात और बदतर
काबुल में 500 से अधिक बोतलबंद पानी और कोल्ड ड्रिंक कंपनियां धड़ल्ले से भूजल का दोहन कर रही हैं। अकेली अलोकोजे कंपनी ही हर साल 1 अरब लीटर पानी निकालती है। वहीं, काबुल के आसपास के 400 हेक्टेयर में फैले ग्रीनहाउस 4 अरब लीटर पानी की खपत करते हैं। अगर हालात ऐसे ही रहे, तो काबुल के 30 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो सकते हैं। यह संकट केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहेगा उत्तरी, उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी प्रांतों में सूखे की मार पहले से ही दिखने लगी है। यहां की खेती चौपट हो रही है, पशुधन मर रहा है और लोगों की आजीविका खतरे में है।
उम्मीद की किरण बनी पंजशीर प्रोजेक्ट
हालांकि अंधेरे में एक छोटी सी रौशनी अब भी बाकी है। पंजशीर नदी से काबुल तक पानी पहुंचाने की योजना पर फिर से काम शुरू हुआ है। इसका डिजाइन 2024 के अंत तक तैयार हो चुका है और सरकार निवेशकों की तलाश कर रही है। यदि यह प्रोजेक्ट समय पर शुरू हो गया, तो करीब 20 लाख लोगों को साफ पानी मिल सकता है। यह संकट सिर्फ अफगानिस्तान का नहीं, बल्कि दुनिया के उन तमाम शहरों के लिए चेतावनी है, जहां जलवायु परिवर्तन और लापरवाह जल-प्रबंधन की अनदेखी हो रही है। काबुल को बचाना अब सिर्फ अफगान सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नैतिक जिम्मेदारी बनती है।