डेल्टा विंग डिजाइन, जनरल इलेक्ट्रिक F-404 सिंगल इंजन, एडवांस्ड एवियोनिक्स और AESA रडार से लैस यह जेट मिग–21 जैसे पुराने सुपरसोनिक फाइटर जेट्स की जगह लेने का सपना लेकर तैयार किया गया था। दुबई एयरशो में हुआ यह हादसा अब उसी सपने पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

दोपहर करीब 2 बजकर 10 मिनट पर दुबई के अल मकतूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट का आसमान भारतीय तेजस एमके-1ए के इंतज़ार में था। दुबई एयरशो में अब बारी थी भारतीय वायुसेना के इस स्वदेशी लड़ाकू विमान की। रनवे से टेकऑफ के बाद तेजस ने तय ऊंचाई पकड़ते ही अपना मशहूर बैरल रोल मैन्यूवर शुरू किया, जिसे उसकी उड़ान क्षमता और चुस्ती का बड़ा सबूत माना जाता है। लेकिन ठीक अगले ही पल हालात बदलते नजर आए। अचानक तेजस का संतुलन बिगड़ता दिखा और उसकी नाक जमीन की ओर झुक गई। कुछ सेकंड तक दर्शकों को लगा जैसे यह शो का कोई नया स्टंट हो, लेकिन जल्दी ही साफ हो गया कि इस बार आसमान में हो रही यह उड़ान महज़ प्रदर्शन नहीं, एक गंभीर हादसे की भूमिका बन चुकी है।
तेजस हवा में रोल करते–करते अचानक असामान्य ढंग से झुक गया। जेट की नोज नीचे की ओर झुकती दिखी तो कई लोगों को लगा कि शायद यह कोई नया स्टंट या प्लान्ड डाइव हो। लेकिन चंद सेकेंड बाद साफ हो गया कि मामला सामान्य नहीं है। तेजस तेजी से नीचे आने लगा, ऊंचाई लगातार घटती गई और देखते ही देखते वह जमीन से जा टकराया। टक्कर के साथ जोरदार धमाका हुआ और कुछ ही पलों में पूरा विमान आग के गोले में बदल गया। काला धुआं आसमान में ऊंचाई तक उठता रहा। हादसा इतनी तेजी से हुआ कि पायलट विंग कमांडर नमांश स्याल को इजेक्ट करने का मौका तक नहीं मिल पाया। इस त्रासदी में विंग कमांडर नमांश स्याल शहीद हो गए। भारत में निर्मित तेजस एयरक्राफ्ट से जुड़ा यह दूसरा बड़ा हादसा बताया जा रहा है, लेकिन इसकी गंभीरता और मानवीय क्षति के लिहाज से सबसे बड़ा। तेजस भारत का पहला स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) है, जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने विकसित किया है। 2001 में पहली परीक्षण उड़ान भरने के बाद तेजस को 2016 में औपचारिक रूप से वायुसेना के बेड़े में शामिल किया गया। डेल्टा विंग डिजाइन, जनरल इलेक्ट्रिक F-404 सिंगल इंजन, एडवांस्ड एवियोनिक्स और AESA रडार से लैस यह जेट मिग–21 जैसे पुराने सुपरसोनिक फाइटर जेट्स की जगह लेने का सपना लेकर तैयार किया गया था। दुबई एयरशो में हुआ यह हादसा अब उसी सपने पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
घटना के तुरंत बाद दुबई की इमरजेंसी सर्विसेज और संबंधित एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। आग पर काबू पाने में करीब आधा घंटा लगा। चश्मदीदों के मुताबिक, हादसे से पहले तेजस ने दो–तीन चक्कर लगाए, फिर उसकी नोज नीचे गई, जेट थोड़ा सीधा हुआ, लेकिन ऊंचाई लगातार कम होती रही। लगभग 2:15 बजे धमाका हुआ और एयरशो स्थल पर अफरातफरी मच गई। कुछ शुरुआती रिपोर्टों और उपलब्ध वीडियो फुटेज के हवाले से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बैरल रोल के बाद जेट फ्लेमआउट का शिकार हुआ, यानी उड़ान के दौरान इंजन बंद हो गया या पर्याप्त पावर नहीं दे पाया। हालांकि यह सब अभी तक केवल कयास हैं। इन्हीं अटकलों के बीच भारतीय वायुसेना ने तुरंत कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश जारी कर दिए हैं। आधिकारिक जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि यह हादसा किस वजह से हुआ — शुद्ध तकनीकी खराबी, किसी सिस्टम ग्लिच, इंजन फेलियर या फिर किसी स्तर पर मानवीय चूक?
सबसे पेचीदा सवाल यही है कि जब एयरक्राफ्ट लगभग पूरी तरह जल चुका है, तो जांच एजेंसियां आखिर सच तक कैसे पहुंचेंगी? रक्षा एवं एयरोस्पेस से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, यह काम कठिन जरूर है, असंभव नहीं। HAL के इंजीनियर और एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) की टीम दुबई पहुंच चुकी है। भारतीय वायुसेना की निगरानी में ये टीमें तेजस का ब्लैक बॉक्स, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) तलाश रही हैं।
इन्हीं उपकरणों में दर्ज डेटा इस हादसे की असली कहानी बयान करेगा —
चुनौती यह है कि जोरदार धमाके और आग की वजह से इन रिकॉर्डर्स का हिस्सा या डेटा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो सकता है। फिर भी इन्हें इस तरह डिजाइन किया जाता है कि अत्यधिक तापमान और झटकों के बावजूद डेटा अधिकतम सुरक्षित रहे।
क्योंकि हादसा दुबई में हुआ है, इसलिए भारतीय एजेंसियों को स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय रेगुलेटरी बॉडियों के साथ मिलकर काम करना होगा। मलबे की सुरक्षा, ब्लैक बॉक्स तक पहुंच, रनवे/एयरशो क्षेत्र के हाई–रिजॉल्यूशन CCTV फुटेज, रडार डेटा और एयर ट्रैफिक कंट्रोल की रिकॉर्डिंग — ये सब दुबई के अधिकार क्षेत्र में हैं और इन्हीं के सहारे जांच की कड़ियां जुड़ेंगी। भारतीय टीम की कोशिश होगी कि मलबे के अधिक से अधिक टुकड़े, इंजन के पार्ट्स, हाइड्रोलिक सिस्टम के कंपोनेंट और फ्यूल के सैंपल जांच के लिए भारत लाए जा सकें, ताकि लैब में उनकी विस्तृत फॉरेंसिक स्टडी की जा सके।
कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की मेज़ पर अब सिर्फ कागज़ नहीं, दर्जनों अहम सवाल भी रखे होंगे। इस जांच टीम में वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी, HAL के दिग्गज टेक्निकल एक्सपर्ट और जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय ऑब्ज़र्वर भी शामिल रहेंगे। घटना की तह तक पहुंचने के लिए पूरी प्रक्रिया कई परतों में आगे बढ़ेगी। सबसे पहले तेजस के ब्लैक बॉक्स, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) का बारीक़ी से एनालिसिस किया जाएगा। इन्हीं उपकरणों में दर्ज फ्लाइट प्रोफाइल, इंजन के पैरामीटर, ऊंचाई, स्पीड और हर मैन्यूवर का फ्रेम–बाय–फ्रेम रिकॉर्ड मौजूद होता है। आखिरी कुछ सेकेंडों में कौन–कौन से अलार्म बजे, कॉकपिट के भीतर क्या आवाज़ें दर्ज हुईं, सिस्टम ने क्या–क्या चेतावनी दी — यह सब डेटा हादसे की असली टाइमलाइन बनाने में मदद करेगा। इसके बाद फोकस इंजन और फ्यूल सिस्टम पर शिफ्ट होगा। अगर शुरुआती संकेत इंजन फेलियर की तरफ इशारा करते दिखे, तो जनरल इलेक्ट्रिक के विशेषज्ञों को भी औपचारिक रूप से जांच में जोड़ा जा सकता है। हाई–ऑल्टीट्यूड डेमो के दौरान फ्यूल प्रेशर, फ्यूल मिक्सिंग और सप्लाई में कहीं रुकावट तो नहीं आई, इस पर खास ध्यान दिया जाएगा। साथ ही एवियोनिक्स और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम की गहन पड़ताल होगी क्या किसी सॉफ्टवेयर गड़बड़ी, सेंसर की खराबी या फ्लाई–बाय–वायर सिस्टम में किसी अनचाहे रिस्पॉन्स के संकेत मिले? बैरल रोल के दौरान कंट्रोल लॉ ने कहीं अप्रत्याशित व्यवहार तो नहीं किया, ये सवाल भी जांच का अहम हिस्सा रहेंगे। मौके से जुटाए गए मलबे के टुकड़ों का फॉरेंसिक रीकंस्ट्रक्शन भी किया जाएगा। टुकड़ों को जोड़–जोड़कर यह समझने की कोशिश होगी कि जेट किस एंगल से जमीन से टकराया, क्या कोई हिस्सा पहले ही टूटकर अलग हो गया था या पूरा एयरफ्रेम एक साथ धराशायी हुआ। जांच यहीं खत्म नहीं होती। ऑपरेशनल और मैनुअल एंगल भी उतनी ही गंभीरता से खंगाले जाएंगे — एयरशो से पहले की ब्रीफिंग, चेकलिस्ट, मेंटेनेंस लॉग, प्री–फ्लाइट इंस्पेक्शन रिपोर्ट, सब कुछ दोबारा खोला जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि एयरशो के दौरान जो मैन्यूवर किए गए, वे निर्धारित गाइडलाइंस के दायरे में थे या जोखिम की सीमा को कहीं छू या पार कर रहे थे। यही सवाल आगे चलकर इस केस की दिशा तय करेंगे।
तेजस को भारत के आत्मनिर्भर रक्षा कार्यक्रम की रीढ़ माना जाता है। ऐसे में दुबई एयरशो जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर हुआ यह हादसा केवल तकनीकी नहीं, रणनीतिक और इमेज से जुड़ा मसला भी है। जांच एजेंसियों के सामने दोहरी चुनौती होगी एक तरफ हादसे की वास्तविक वजह को बिना किसी दबाव या हिचक के सामने लाना। दूसरी तरफ, इस तरह की पारदर्शी जांच के बावजूद तेजस प्रोग्राम में अंतरराष्ट्रीय भरोसा और घरेलू राजनीतिक–सामरिक समर्थन बनाए रखना।