Dubai News : दुबई को दुनिया के अमीर शहरों की गिनती में सबसे ऊपर रखा जाता है। दुबई शहर में पूरी दुनिया के नागरिकों के साथ ही भारत के नागरिक भी बड़ी संख्या में रहते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार दुबई शहर में 35 लाख (3.5 मिलियन) भारतवंशी निवास करते हैं। दुबई में रहने वाले इन्हीं भारतवासियों में एक नाम है रामकुमार तोलानी का नाम। रामकुमार तोलानी ने बड़ा कमाल कर दिया है। दुबई में किए गए इस कमाल को जानकर आप भी कहेंगे कि ‘‘वाह क्या बात है’’।
बचपन की आदत के दम पर दुबई में बड़ा कमाल
रामकुमार तोलानी ने अपने बचपन की एक आदत के कारण दुबई में बड़ा कमाल किया है। यह दुबई में रहने वाले भारतवंशी गुडविल वल्र्ड, कंपनी के चेयरमेन, राम कुमार तोलानी की कहानी है जो एक सफल बिजनेस मेन और लेखक है लेकिन ब्रेन स्ट्रोक होने के कारण पक्षाघात होने पर बिस्तर पर पड़ गया लेकिन अपनी बचपन के coin collection के शौक और दृढ़ इच्छा शक्ति के कारण फिर से उठ खड़ा हुआ और 500 करोड़ की कीमत का मनी म्यूजियम बनाया। दुबई में रामकुमार की कंपनी इंश्योरेंस, इनवेस्टमेंट, कॉर्पोरेट फाइनेंस, ट्रेनिंग और एजुकेशन, एसेट मैनेजमेंट, कंप्यूटर सर्विस, आर्ट एंड क्रॉफ्ट और कॉइन कलेक्शन की गतिविधियों में संलग्न है। भव्य म्यूजियम में प्रवेश करते ऐसा लगता है जैसे किसी प्राचीन सभ्यताओं की दुनिया में आ गए हो। यहां की प्रत्येक मुद्रा, पेटिंग, कार्पेट्स प्राचीन संस्कृति की अनकही दास्तान सुनाता सा लगता है।
दुबई के इस म्यूजियम में दुनिया भर की करेंसी देखी जा सकती है
दुबई शहर में स्थापित इस संग्रहालय में एक टन से ज्यादा सोने और चांदी के कॉइन दुनिया के प्रत्येक देश के सिक्कों और नोट्स का कलेक्शन है कुछ तो दो ईस्वी पूर्व के तो हैं ही लेकिन साथ ही रेयर स्टाम्पस, पेंस, कीमती नग और कार्पेट्स का भी अद्भुत संग्रह भी देखने को मिलता है। राम तोलानी से मेरी मुलाकात तब हुई जब उन्होंने Smartlife Foundation के सीनियर सिटीजंस सदस्यों को अपने यहां लंच पर आमंत्रित किया। इस पत्रकार से बातचीत में बताया 2008 में मेरी बिटिया की शादी थी। उस शाम में इतना खुश था और इतना भावुक हो गया कि मेरा ब्लड प्रेशर इतना बढ़ गया कि मुझे ब्रेन स्ट्रोक हो गया। इसके बाद मुझे पैरालिसिस हो गया । मैं बिस्तर पर पड़ गया। मुझे अपने इंश्योरेंस उद्यम से सन्यास लेना पड़ा और और इसकी सारी जिम्मेदारी अपने संजय तोलानी को सौंप दी। संजय इंटर-जनरेशनल प्लानर एंड फाइनेंसियल स्ट्रक्चर इनोवेटर है। " मेरी दो सर्जरी हुई और फिजियोथैरेपी होने लगी, मुझे लगा कि अब मेरे जीवन में कुछ नहीं बचा", तोलानी ने बताया। 70 वर्षीय तोलानी जो 50 साल पहले इंदौर से दुबई आए, एक व्यस्त रहने वाले उद्यमी थे, कहते हैं कि एक दिन वे अपने बेटे संजय से बात कर रहे थे तो उसने मुझे मेरे बचपन की कॉइन कलेक्शन हॉबी की याद दिला दी और कहा आप अपने बचपन के शौक को शुरू करिए आप का समय अच्छा गुजरेगा और बिजी भी रहेंगे। मुझे ये काम आसान लगा। मुझे याद आया कि मैं अपनी छात्रावस्था में एक डिब्बे में सिक्के इकठ्ठा किया करता था। इसी दौरान संजय हमारे पैतृक निवास इंदौर गया और वो डिब्बा दुबई ले कर आ गया। इनमें से एक सिक्का बादशाह अकबर के समय का था जो मेरे संग्रह का पहला सिक्का था। तोलानी कहते हैं कि उस सिक्के को हाथ में लेते ही मुझे जादूई अनुभूति हुई। मुझे अपना बचपन याद आया कि तब भी ये पहला सिक्का मेरे लिए कोई धातु का टुकड़ा नहीं बल्कि ये एक खजाना और उपलब्धि थी। जैसे जैसे समय गुजरता गया राम तोलानी का कॉइन कलेक्शन बढ़ता गया और अपने शौक में डूबते चले गए और युवावस्था के शौक को पूर्णकालिक व्यवसाय बना लिया।
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संजय ने दुनिया भर में फैलाया पिता का नाम तथा काम
दुबई में अपनी यादों को ताजा करते हुए रामकुमार बताते हैं कि उनके बेटे संजय ने उनका नाम तथा काम पूरी दुनिया में फैला दिया है। रामकुमार बताते हैं कि शुरुआत में मैं संजय की सहायता से ऑनलाइन ऑक्शन में भाग लेता था लेकिन धीरे धीरे मै इस में निपुण हो गया। इस म्यूजियम का पहला सिक्का संजय ने मुझे पर्थ मिंट ऑस्ट्रेलिया से ला कर भेट किया। ये सिक्का बहा की सरकार द्वारा अपने स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर जारी किया था। कैटलॉगाड एक किलो सिक्कों के तरफ़ इशारा करते हुए तोलानी बताते है कि," यहां पर सिंगापुर और चीन के लिमिटेड एडिशन गोल्ड और सिल्वर के सिक्के हैं। एक साल के भीतर ही तोलानी जी ने 2,50,000 सिक्के और 60,000 करेंसी नोट इकठ्ठा कर लिए। इनमें मोहनजोदड़ो से ब्रिटिश कल सिक्कों का भंडार है। इसमें 260 ग्राम के संयुक्त राज्य अमीरात का दिर्हाम का कॉइन जिसे यहां के पहले सुल्तान स्वर्गीय शेख ज़ायद द्वारा जारी किया गया था शामिल है। इस विला में एक कक्ष संयुक्त राष्ट्र के नाम से रखा गया है। इसमें दुनिया के लगभग सभी देशों के करेंसी नोट्स सजाए गए हैं। इनमें से कुछ ऐसे भी देश शामिल जीनों ने अपनी करेंसी बदल दी है। इनमें ऑस्ट्रिया, जर्मनी, फ्रांस, इटली, भारत और स्पेन शामिल हैं। इनमें उल्लेखनीय है, फ्रांस का फ्रेंक। ये न केवल अलग है बल्कि देखने मे एक पेंटिंग जैसे लगता है। तोलानी मजलिस संग्रहालय इसलिए भी दूसरे म्यूजियम से अलग है कि यहां प्रवेश नि:शुल्क है। राम कुमार तोलानी अपनी पत्नी सीमा के साथ सुबह सुबह घर से नाश्ता के यहां आ जाते है और लंच तक यहां रहते हैं और लोगों का स्वागत करते हैं, कभी थिएटर में फिल्म का और सभागार में कभी कभी शास्त्रीय संगीत के आयोजन भी करते है। अगर कोई दर्शक इनको उपहार या मिठाई देते है तो ये लोग विनम्रता पूर्वक इन्कार कर देते हैं। तोलानी कहते है," अगर आप कोई उपहार देना चाहते हैं तो हमें एक सिक्का या करेंसी नोट दीजिए". इस प्रकार दुबई में कमाल कर दिया भारतवंशी रामकुमार तोलानी ने।