
बता दें कि, यूरोपीय संघ (EU) की नई सूची में भारत, बांग्लादेश, मिस्र, ट्यूनीशिया, मोरक्को, कोलंबिया और कोसोवो शामिल हैं। यूरोपीय संघ का कहना है कि इन देशों से आने वाले शरणार्थियों को आमतौर पर उत्पीड़न या हिंसा का व्यापक खतरा नहीं होता। इसलिए, इन देशों से आने वाले शरणार्थियों की याचिकाएं अब पहले से तेज़ी से खारिज की जा सकेंगी और उन्हें वापस भेजा जा सकेगा।
यूरोपीय संघ (EU) के मुताबिक, कई सदस्य देशों में शरणार्थियों की याचिकाएं लंबित हैं और संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। इसलिए, कुछ देशों को ‘सेफ कंट्री’ की सूची में डालने से यह प्रक्रिया तेज़ हो पाएगी। साथ ही, यूरोप में बढ़ती अवैध प्रवास की समस्या से निपटने और राजनीतिक दबाव को संतुलित करने की दृष्टि से भी यह कदम अहम माना जा रहा है।
मानवाधिकार संगठनों ने यूरोपीय संघ (EU) के इस कदम पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, मिस्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश और अन्य देशों में राजनीतिक असहिष्णुता जैसे गंभीर मुद्दे हैं। ऐसे में इन देशों को 'सुरक्षित' घोषित करना उचित नहीं है।
इस फैसले को इटली, नीदरलैंड्स और डेनमार्क जैसे देशों का समर्थन मिला है। इटली ने तो इसे अपनी "बड़ी कूटनीतिक सफलता" बताया है। यूरोपीय संघ (EU) ने यह स्पष्ट किया है कि यह सूची केवल दिशा-निर्देश है, और हर याचिका की व्यक्तिगत समीक्षा की जाएगी। EU :