प्रयागराज से शुरू हुई थी दुनिया की पहली हवाई डाक सेवा, रचा था इतिहास
First Air Mail Service
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 08:18 PM
First Air Mail Service : आज जब हम एक क्लिक पर ईमेल भेजते हैं और मोबाइल पर वीडियो कॉल करते हैं, तब शायद ही किसी को याद हो कि 114 साल पहले एक ऐतिहासिक उड़ान ने संचार की दिशा बदल दी थी। इस क्रांतिकारी क्षण का गवाह बना उत्तर प्रदेश का प्रयागराज, जहां 18 फरवरी 1911 को दुनिया की पहली आधिकारिक हवाई डाक सेवा की शुरुआत हुई थी।
कुंभ के मौके पर हुआ ऐतिहासिक आयोजन
उस वर्ष प्रयागराज में कुंभ मेला लगा था। भीड़ का आलम यह था कि करीब एक लाख लोग संगम के किनारे इस अविस्मरणीय दृश्य को देखने जुटे थे। आकाश में उड़ते जहाज को देखना तब अजूबा था, क्योंकि आम जनमानस ने तब तक शायद उसे देखा भी नहीं था। फ्रांस के पायलट मोनसियर हेनरी पिक्वेट ने हैविलैंड एयरक्राफ्ट के जरिए प्रयागराज से नैनी तक उड़ान भरी और 6,500 पत्रों से भरे डाक बैग को साथ ले गए। इस ऐतिहासिक उड़ान में उन्होंने मात्र 13 मिनट में 15 किलोमीटर का हवाई सफर तय कर इतिहास रच दिया।
यूपी प्रदर्शनी बना था आयोजन स्थल
इस आयोजन का हिस्सा थी उत्तर प्रदेश प्रदर्शनी, जो एक कृषि एवं व्यापार मेला था और यमुना नदी के किनारे लगा था। वहीं से विमान ने उड़ान भरी और नैनी जंक्शन के समीप उतरा।
इस आयोजन के लिए दो विमानों का प्रदर्शन किया गया था, जिन्हें ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा भारत मंगवाया गया था और उनके पुर्जे आम जनता के सामने जोड़े गए थे।
डाक विभाग ने की थी ऐतिहासिक पहल
इस उड़ान के पीछे ब्रिटिश सेना के कर्नल वाई विंधम की पहल थी, जिन्होंने डाक अधिकारियों से संपर्क कर पहली बार हवाई मार्ग से मेल भेजने की योजना बनाई। डाक विभाग ने तत्काल स्वीकृति दी और पत्रों पर फर्स्ट एरियल पोस्ट तथा युनाइटेड पोविंसेज एक्जवीशन, इलाहाबाद मुद्रित किया गया। स्याही के रूप में पारंपरिक काले की बजाय मैजेंटा रंग का इस्तेमाल किया गया। जो आज भी फिलेटलिस्ट्स (टिकट संग्रहकताओं) के बीच ऐतिहासिक महत्व रखता है।
6 आना था शुल्क, आय गई हॉस्टल को दान
इस डाक सेवा के लिए प्रत्येक पत्र पर 6 आने का शुल्क निर्धारित किया गया था और इससे हुई आय को आॅक्सफोर्ड एंड कैंब्रिज हॉस्टल, इलाहाबाद को दान किया गया। कुछ पत्रों पर 25 रुपये तक के डाक टिकट लगाए गए थे, जो उस दौर में अत्यंत महंगे माने जाते थे। इस सेवा के लिए प्रयागराज की कई नामचीन हस्तियों के साथ-साथ राजा, महाराजा और राजकुमारों ने भी पत्र भेजे। डाक विभाग ने इसके लिए विशेष कर्मचारी तैनात किए और कुछ ही दिनों में 3,000 पत्र प्रयागराज डाकघर में पहुंच गए।
इतिहास में अमर हो गई प्रयाग की वह उड़ान
आज जबकि भारत में हवाई सेवाएं गांव-गांव तक पहुंच रही हैं, यह जानना प्रेरणादायक है कि इसका सूत्रपात कुंभ की पवित्र धरती प्रयागराज से हुआ था। यह घटना न केवल भारत, बल्कि विश्व डाक और विमानन इतिहास का पहला पन्ना है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।