इंजीनियरिंग से लेकर मैनेजमेंट तक, क्यों जर्मनी है भारतीय छात्रों की पहली पसंद
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 02:57 AM
अमेरिका में वीजा नियम सख्त होने के बाद जर्मनी भारतीय छात्रों के लिए नई डेस्टिनेशन बनकर उभरा है। यहां की यूनिवर्सिटीज, स्कॉलरशिप और रोजगार अवसर बना रहे हैं इसे युवाओं की टॉप चॉइस। पिछले एक दशक में जर्मनी भारतीय छात्रों के लिए सबसे तेजी से उभरता एजुकेशन हब बना है। साल 2024 के आंकड़ों के मुताबिक यहां 4.5 लाख से ज्यादा विदेशी छात्र पढ़ाई कर रहे थे, जिनमें से करीब 50 हजार भारतीय छात्र शामिल थे। German Scholarships :
क्यों चुन रहे हैं भारतीय छात्र जर्मनी?
* टॉप-क्लास यूनिवर्सिटीज और 17,000 से ज्यादा कोर्स
* पढ़ाई पूरी करने के बाद 87% रोजगार दर
* अन्य देशों की तुलना में किफायती खर्च
* डिग्री के बाद जर्मनी में रहकर नौकरी करने का विकल्प
भारतीय छात्रों को कई इंटरनेशनल स्कॉलरशिप मिलती हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
* DAAD (German Academic Exchange Service) स्कॉलरशिप: 2024-25 में 287 भारतीय छात्रों को फंडिंग मिली। इसमें ट्यूशन फीस, मंथली अलाउंस, यात्रा और हेल्थ इंश्योरेंस शामिल होते हैं।
* Erasmus+: यूरोप में पढ़ाई और इंटर्नशिप का मौका।
* अलेक्जेंडर वॉन हुम्बोल्ट फाउण्डेशन : पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च के लिए।
* कोनराड, एडेनावर, हाइनरिख बेल और फ्रेडरिक एबर्ट और बायर फाउण्डेशन जैसी छात्रवृत्तियां: मास्टर्स और रिसर्च छात्रों के लिए खास।
खर्च और वीजा नियम
भारतीय छात्रों को जर्मनी का वीजा पाने के लिए सालाना कम से कम 11,904 (लगभग 10.6 लाख रुपये) दिखाना जरूरी है। यही राशि वहां रहने और पढ़ाई करने के लिए न्यूनतम खर्च मानी जाती है। जर्मनी सैप, सीमेंस और डायचे जैसी ग्लोबल कंपनियों का हब है। यहां पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों को जॉब मार्केट में सीधे प्रवेश और लंबे समय तक रुकने का मौका मिलता है। यही वजह है कि भारतीय छात्रों के बीच जर्मनी की डिमांड लगातार बढ़ रही है।