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गाजा में लगातार जारी संघर्ष और इजराइल पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच पश्चिमी देशों की कूटनीति निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया द्वारा रविवार को फिलिस्तीन को आधिकारिक मान्यता देने के बाद अब पुर्तगाल ने भी इसी राह पर चलते हुए बड़ा ऐलान कर दिया। International News
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, पुर्तगाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि “न्यायपूर्ण और टिकाऊ शांति के लिए दो-राज्य समाधान ही एकमात्र विकल्प है।” अब निगाहें फ्रांस पर टिकी हैं, जो इस सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से फिलिस्तीन को मान्यता देने का इरादा जता चुका है। फ्रांस का यह कदम अगर वास्तविकता में बदलता है, तो इजराइल का अंतरराष्ट्रीय अलगाव और गहराएगा।
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इन घोषणाओं पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फिलिस्तीन को मान्यता देना “7 अक्टूबर के नरसंहार के बाद आतंकवाद को बड़ा इनाम देने जैसा है।” उन्होंने साफ कर दिया कि इजराइल किसी भी हालत में फिलिस्तीनी राज्य को स्वीकार नहीं करेगा और अमेरिका से लौटने के बाद इसका जवाब देंगे। इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने भी इस कदम को खारिज करते हुए कहा कि इससे न तो किसी बंधक की रिहाई संभव होगी और न ही शांति प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने चुनावी वादे के अनुरूप फिलिस्तीन को मान्यता दी और विदेश मंत्रालय ने तत्काल अपनी यात्रा सलाह वेबसाइट में “अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्रों” की जगह केवल “फिलिस्तीन” दर्ज कर दिया।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि उनका देश फिलिस्तीन को मान्यता देता है और इजराइल के साथ शांति की दिशा में साझेदारी के लिए प्रतिबद्ध है। कनाडाई अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण ने हिंसा का त्याग किया है और अब हमास को हाशिए पर डालने के लिए इस कदम को जरूरी माना गया है। International News
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने जुलाई में ही यह पहल की थी और रविवार को दोहराया कि उनका देश सोमवार को आधिकारिक घोषणा करेगा। हालांकि, उन्होंने बंधकों की रिहाई को “फिलिस्तीन में दूतावास खोलने की पूर्व शर्त” बताया। बेल्जियम, लक्ज़मबर्ग और सैन मैरिनो जैसे यूरोपीय देश भी इसी सप्ताह फिलिस्तीन को मान्यता देने की तैयारी में हैं।
फिलिस्तीनी प्राधिकरण के अध्यक्ष महमूद अब्बास ने ब्रिटेन के फैसले को “स्थायी शांति की दिशा में अहम और आवश्यक कदम” करार दिया। हमास के वरिष्ठ नेता बासम नईम ने भी इस पहल का स्वागत किया, हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि “सिर्फ घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने होंगे।” फिलिस्तीनी नेता डॉ. हनान अशरावी ने इस घटनाक्रम को “वैश्विक राजनीतिक समीकरण में बड़ा बदलाव” बताया और कहा कि अब असली चुनौती यह होगी कि क्या ये देश इजराइल पर दंडात्मक कार्रवाई करने का साहस दिखा पाएंगे।
अब तक संयुक्त राष्ट्र के 140 से अधिक सदस्य फिलिस्तीन को मान्यता दे चुके हैं। यदि यह मुद्दा सुरक्षा परिषद में आता है, तो अमेरिका पर वीटो इस्तेमाल करने का दबाव बढ़ेगा। चीन और रूस 1988 में ही फिलिस्तीन को मान्यता दे चुके हैं, ऐसे में अमेरिका अकेला स्थायी सदस्य रह जाएगा जो इसका विरोध करता है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका के अलग-थलग पड़ने को और स्पष्ट करेगी। International News
सीएनएन के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने दूसरे कार्यकाल का पहला संबोधन देंगे। इससे पहले सोमवार को फ्रांस और सऊदी अरब दो-राज्य समाधान सम्मेलन की संयुक्त मेज़बानी करेंगे, जिसे 193 में से 142 सदस्य देशों का समर्थन प्राप्त है। अमेरिका इसमें शामिल नहीं हो रहा और वह उन 10 देशों में है जिन्होंने महासभा के प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया था। स्पष्ट है कि वैश्विक राजनीति में अमेरिका-इजराइल एक ओर और शेष विश्व दूसरी ओर खड़ा नजर आ रहा है। International News
भारत की राजधानी नई दिल्ली इन दिनों इतिहास रचने की तैयारी में है। इंडियनऑइल न्यू दिल्ली 2025 वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और इसी कड़ी में सोमवार को शांगरी-ला एरोस होटल में इस भव्य आयोजन के मेडल्स का अनावरण किया गया। 27 सितम्बर से 5 अक्टूबर तक चलने वाले इस वैश्विक आयोजन में 104 देशों से 2,200 से अधिक पैरा एथलीट्स और अधिकारी शामिल होंगे। वे 186 मेडल्स के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे। निस्संदेह, यह भारत में अब तक का सबसे बड़ा पैरा-स्पोर्ट आयोजन होगा। International News
अनावरण किए गए मेडल्स केवल धातु के नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और गौरव की प्रतीक छवि हैं।
सामने का हिस्सा: पारंपरिक भारतीय कला से प्रेरित डिज़ाइन, चैंपियनशिप का नाम, पैरा एथलेटिक्स के प्रतीक – व्हीलचेयर रेसर, डिस्कस थ्रोअर और कमल।
पीछे का हिस्सा: ब्रेल लिपि में ‘न्यू दिल्ली 2025’, कमल की प्रेरणा से बनी आकृतियाँ और आधुनिक ज्योमेट्रिक पैटर्न।
रिबन: नीले रंग का आकर्षक रिबन, जो संस्कृति, सुगमता और उत्कृष्टता का संदेश देता है।
इस मौके पर "उड़ान भर" नामक एक प्रेरणादायी गीत भी लॉन्च किया गया। पोलारिस प्रोडक्शन और पैरा ओलंपिक कमेटी ऑफ इंडिया की साझेदारी में तैयार इस म्यूजिक वीडियो में भारतीय पैरा एथलीट्स ने अपनी प्रतिभा और संघर्ष की कहानी बयां की।
देवेंद्र झाझड़िया (अध्यक्ष, पीसीआई): “ये मेडल सिर्फ जीत नहीं, बल्कि प्रयास और समावेशिता की कहानी कहते हैं। नई दिल्ली पूरी दुनिया को प्रेरित करने के लिए तैयार है।”
वनथी श्रीनिवासन (मुख्य संरक्षक, पीसीआई): “ये आयोजन साबित करेगा कि साहस और धैर्य ही असली पहचान है। भारत खुले दिल से पूरी दुनिया का स्वागत कर रहा है।”
नवदीप सिंह (पैरा ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट): “इस मेडल को जीतना हर भारतीय पैरा एथलीट का सपना होगा। यह संदेश है कि विकलांगता कभी अंत नहीं होती।”
पॉल फिट्ज़गेराल्ड (प्रमुख, वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स): “लॉस एंजेलिस 2028 पैरालिंपिक चक्र की पहली बड़ी चैम्पियनशिप भारत में होना गर्व की बात है। भारत की प्रगति दुनिया के लिए मिसाल है।”
27 सितम्बर से जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम नई दिल्ली विश्व स्तरीय पैरा एथलीट्स के कौशल, संघर्ष और जज़्बे का गवाह बनेगा। यह केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि भारत के खेल इतिहास में समावेशिता, जोश और गौरव का सबसे बड़ा उत्सव साबित होगा। International News