
आज का युग सूचना का युग है एक ऐसा दौर जहाँ हर पल, हर सेकंड नई घटनाएँ दुनिया को बदल रही हैं। डिजिटल क्रांति ने खबरों की पहुँच को इतना आसान बना दिया है कि अब हर नागरिक चाहता है कि वह दुनिया की हर बड़ी खबर से तुरंत अपडेट रहे। पहले लोग महंगे अखबारों और देर से आने वाले टीवी बुलेटिन पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब वही समय पीछे छूट चुका है। चेतना मंच आपको लाता है हर खबर, सीधे आपके स्क्रीन पर, शुद्ध हिंदी में और वास्तविक समय में। राजनीति की हलचल हो, अर्थव्यवस्था में बदलाव, सामाजिक मुद्दे हों या अंतरराष्ट्रीय घटनाएँ—हर अपडेट आपको तुरंत और सटीक रूप में मिलती है। International News
अफगान सरकार ने पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ, आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक और दो अन्य वरिष्ठ जनरलों के वीजा आवेदन खारिज कर दिए हैं। इस्लामाबाद ने पिछले तीन दिन में तीन अलग-अलग अनुरोध किए थे, जिन्हें काबुल ने सभी अस्वीकार कर दिया। International News
द ब्लोचिस्तान पोस्ट (पश्तो संस्करण) के मुताबिक, अफगान विदेश मंत्रालय या तालिबान सरकार ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, सूत्रों ने वीजा आवेदन खारिज किए जाने की जानकारी की पुष्टि की है। International News
पिछले महीनों में दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता रहा है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर आरोप लगाया है कि वहां तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) अपनी गतिविधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना पा रही है। तालिबान सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है।
हाल ही में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों, जिनमें काबुल भी शामिल है, में हवाई हमले किए। इसके जवाब में अफगान बलों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में पाकिस्तानी बलों पर हमला किया, जिसमें पाकिस्तानी सेना को काफी नुकसान हुआ। इसके बाद अफगान सेना ने युद्धविराम की घोषणा की। अफगान विदेश मंत्री ने भारत में पुष्टि की कि सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात के अनुरोध पर युद्धविराम का निर्णय लिया गया। International News
ख्वाजा आसिफ पहले भी अफगान नेतृत्व से मिल चुके हैं। वह हाल ही में काबुल जाकर तालिबान के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ सुरक्षा पर चर्चा करना चाहते थे। विश्लेषकों के अनुसार, उच्चस्तरीय पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के वीजा आवेदन अस्वीकार करना असामान्य कदम है। यह साफ संकेत देता है कि तालिबान सरकार अब पाकिस्तान के दबाव के आगे आसानी से झुकने को तैयार नहीं है। International News
बलोचिस्तान की प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. महरंग बलोच और बलोच सॉलिडेरिटी कमेटी (बीवाईसी) की अन्य महिला नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों की नवीनतम सुनवाई क्वेटा जिला जेल में हुई, जबकि पहले यह आतंकवाद विरोधी अदालत में होने वाली थी। बीवाईसी ने इसे प्रशासनिक दमन और न्यायिक पारदर्शिता को दबाने का एक गंभीर उदाहरण बताया है।
बलोच सॉलिडेरिटी कमेटी ने 13 अक्टूबर को जारी बयान में बताया कि हिरासत में ली गई महिलाओं की न्यायिक हिरासत और बढ़ा दी गई है। मार्च 2025 में डॉ. महरंग बलोच, सिबगतुल्लाह बलोच, बेबो बलोच, बैबर्ग बलोच और गुलजादी बलोच को पब्लिक ऑर्डर ऑर्डिनेंस (एमपीओ) के तहत गिरफ्तार किया गया था। सभी वर्तमान में हिरासत में हैं और उनकी रिमांड कई बार बढ़ाई जा चुकी है।
डॉ. महरंग बलोच के वकील इसरार बलोच के अनुसार, शनिवार को आतंकवाद निरोधक अदालत संख्या एक के न्यायाधीश मोहम्मद अली मुबीन ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अभियोजक चालान पेश करने में असफल रहे, जिससे आरोप नहीं लग सके और औपचारिक सुनवाई शुरू नहीं हो पाई। जज ने अगली सुनवाई की तारीख 18 अक्टूबर तय की। International News
बलोच सॉलिडेरिटी कमेटी ने आरोप लगाया है कि जेल में सुनवाई का यह कदम पारदर्शिता को खत्म करने, सार्वजनिक जांच को दबाने और बलोचिस्तान में शांतिपूर्ण राजनीतिक असंतोष को आपराधिक घोषित करने की सोची-समझी योजना है। यह पाकिस्तान के संविधान, निष्पक्ष सुनवाई और अंतरराष्ट्रीय न्यायिक मानकों का स्पष्ट उल्लंघन है।
डॉ. महरंग बलोच बलोच यकजेहती समिति की नेता हैं। वह बलोचिस्तान में जबरन गायब किए जाने, गैर-न्यायिक हत्याओं और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष के लिए जानी जाती हैं। उन्हें 2025 में नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है।
उन्होंने 2019 में बलोच सॉलिडेरिटी कमेटी की स्थापना की और 2023 में बलोच लॉन्ग मार्च का नेतृत्व किया, जिसमें लाखों लोगों ने भाग लिया। महरंग बलोच ने अपने पिता के अपहरण और भाई के गायब होने के बाद मानवाधिकार आंदोलन शुरू किया और अहिंसक, गांधीवादी तरीकों पर जोर दिया। International News
हरफनमौला कलाकार किशोर कुमार की पुण्य स्मृति में मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन खंडवा के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान अलंकरण समारोह आज आयोजित किया जा रहा है। इस दो दिवसीय कार्यक्रम के तहत इस वर्ष प्रसिद्ध गीतकार प्रसून जोशी को राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान से नवाजा जाएगा।
संस्कृति संचालक एनपी नामदेव ने बताया कि समारोह की शुरुआत आज रात 8:30 बजे होगी। मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वर्चुअली इस आयोजन में शामिल होंगे और प्रसून जोशी को सम्मान प्रदान करेंगे। कार्यक्रम में जनजातीय कार्यमंत्री कुंवर विजय शाह, सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, विधायक नारायण सिंह पटेल, कंचन मुकेश तन्वे और विछाया गोविंद मोरे की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। अलंकरण के पश्चात मुंबई के हेमंत कुमार म्यूजिकल ग्रुप द्वारा किशोर कुमार के गीतों की विशेष प्रस्तुति दी जाएगी। समारोह में आम जनता के लिए प्रवेश निःशुल्क रहेगा। International News
संस्कृति विभाग द्वारा महान गायक किशोर कुमार की स्मृति में यह सम्मान वर्ष 1997 से निरंतर प्रदान किया जा रहा है। अब तक कुल 27 विभूतियों को इस सम्मान से नवाजा जा चुका है। सम्मान स्वरूप 5 लाख रुपये की कर-मुक्त राशि एवं सम्मान पट्टिका प्रदान की जाती है। यह पुरस्कार अभिनय, निर्देशन, पटकथा लेखन और गीत लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को दिया जाता है। इस वर्ष 2024-25 का किशोर कुमार सम्मान गीतकार प्रसून जोशी को प्रदान किया जाएगा। प्रसून जोशी इस सम्मान से सम्मानित होने वाले 28वें कलाकार और सातवें गीतकार होंगे। International News
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलिस्तीन-इज़राइल विवाद में मिस्र के दो-राज्य समाधान के प्रस्ताव को अपनाने से इंकार किया और गाजा के पुनर्निर्माण पर अपना फोकस बनाए रखा। मिस्र के शर्म अल-शेख में संपन्न गाजा शांति शिखर सम्मेलन से लौटते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य गाजा में स्थायी शांति और पुनर्निर्माण है। जब उनसे मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी द्वारा सुझाए दो-राज्य समाधान पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो ट्रंप ने कहा, "मैं गाजा के पुनर्निर्माण का पक्षधर हूं। एकल या दो-राज्य मॉडल से मेरा कोई लेना-देना नहीं है।"
सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने यह भी कहा कि बहुत से लोग मिस्र के राष्ट्रपति के दृष्टिकोण से सहमत हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने इस पर अभी अंतिम विचार नहीं किया है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ट्रंप ने फिलिस्तीनी राज्य के गठन की मांगों की आलोचना की थी। ट्रंप के 20-सूत्री गाजा शांति प्रस्ताव में फिलिस्तीनी राज्य का स्पष्ट रूप से समर्थन नहीं किया गया, लेकिन इसे "फिलिस्तीनी लोगों की आकांक्षा" के रूप में मान्यता दी गई है। International News
व्हाइट हाउस ने शर्म अल-शेख सम्मेलन पर एक संयुक्त शांति घोषणापत्र जारी किया है, जिसमें ट्रंप, मिस्र, कतर और तुर्की के नेताओं के हस्ताक्षर शामिल हैं। इस दस्तावेज़ में गाजा में युद्ध समाप्त करने के ट्रंप प्रयासों की सराहना की गई है और क्षेत्र के सभी लोगों के लिए शांति, सुरक्षा, स्थिरता और विकास के अवसरों की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। इसमें भविष्य में विवादों को केवल कूटनीति और संवाद के माध्यम से हल करने का आह्वान किया गया है।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी इज़राइल और हमास के बीच युद्धविराम तथा बंधक रिहाई समझौते के लिए ट्रंप की तारीफ की। बाइडेन ने लिखा, "इस समझौते तक पहुंचना आसान नहीं था। हमारे प्रशासन ने बंधकों को घर लौटाने, फ़िलिस्तीनी नागरिकों को राहत देने और युद्ध समाप्त करने के लिए लगातार प्रयास किया। मैं राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम की सराहना करता हूं।"
मिस्र आगमन से पहले, ट्रंप ने इज़राइली संसद नेसेट को संबोधित किया। उनके भाषण को इज़राइली सांसदों ने लंबे समय तक खड़े होकर सराहा। ट्रंप ने मध्य पूर्व में शांति की नई शुरुआत और क्षेत्र में स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया।
बंधकों की सुरक्षा और उनके परिवारों से मिलन को लेकर ट्रंप ने कहा, "अंधकार और कैद में बिताए गए दो वर्षों के बाद 20 बहादुर बंधक अपने परिवारों के पास लौट रहे हैं। यह गौरवपूर्ण पल है। अब गाजा में बंदूकें और सायरन शांत हैं, और सूर्य एक पवित्र भूमि पर शांतिपूर्वक उदय हो रहा है।" गाजा शांति शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने किया। उन्होंने इस क्षेत्र में भारत के स्थायी शांति समर्थन की पुष्टि की। International News