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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ऐलान किया कि वे मंगलवार को वर्जीनिया में होने वाली शीर्ष सैन्य अधिकारियों की बैठक में शामिल होंगे। यह बैठक रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के आदेश पर आयोजित की जा रही है, जिसमें सभी उच्च रैंक के जनरलों की मौजूदगी अनिवार्य है। International News
द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, वर्जीनिया के मरीन कॉर्प्स बेस क्वांटिको में ट्रंप की उपस्थिति सिर्फ हेगसेथ के संबोधन को ही महत्वपूर्ण नहीं बनाएगी, बल्कि यह आयोजन सुरक्षा दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण होगा। कुछ जनरलों और एडमिरल्स को इसके लिए हजारों मील की यात्रा करनी पड़ेगी। ट्रंप ने इस बैठक को मुख्य रूप से प्रेरक और उत्साहवर्धक बताया।
व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति बैठक में शामिल होंगे और सैन्य अधिकारियों को संबोधित भी करेंगे। पेंटागन के आसपास के कार्यालयों को सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक प्रबंध करने के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रपति की उपस्थिति के कारण अब सीक्रेट सर्विस इस कार्यक्रम की पूरी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेगी।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने अपने आदेश में कहा है कि कोई भी अफसर बैठक में अनुपस्थित रहता है, तो उसे इसकी वजह स्पष्ट करनी होगी। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस बैठक को शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है। एक अधिकारी ने कहा, "हेगसेथ इसे अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सक्रिय और अनुशासित बनाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।"
सूत्रों के अनुसार, हेगसेथ का भाषण बैठक से पहले या स्थल पर रिकॉर्डेड रूप में जारी किया जा सकता है। आयोजन के मूल विचार का श्रेय भी रक्षा सचिव को जाता है। आमंत्रित सैकड़ों जनरलों और फ्लैग ऑफिसर्स को यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि अचानक वर्जीनिया बुलाने का कारण क्या है। International News
द साल्ट लेक ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, यूटा नेशनल गार्ड के कम से कम चार वरिष्ठ जनरलों को इस बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया। इनमें राज्य के शीर्ष सैन्य प्रमुख, एडजुटेंट जनरल, एक सहायक और सेना व वायु सेना नेशनल गार्ड के जनरल अधिकारी शामिल हैं। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने इस चयन पर कोई टिप्पणी देने से इनकार किया। International News
पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत में बलोच राष्ट्रीय न्यायालय ने तीन बलोच नागरिकों—गुलाम हुसैन, दौलत खान और इशाक निचारी—को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने उन्हें राजद्रोह और पाकिस्तानी सेना के लिए मुखबिरी करने का दोषी पाया। तीनों ने माना कि वे लंबे समय से फौज के लिए संवेदनशील सूचनाएं एकत्र कर रहे थे।
बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के प्रवक्ता जैंद बलोच ने द बलोचिस्तान पोस्ट को बताया कि संगठन के लड़ाकों ने राज्य की खनिज संपदा के परिवहन में लगे सरकारी वाहनों को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि सोराब, कलात, नुश्की, ज़ोहरी और खारन में आठ जगहों पर पाकिस्तानी सेना को लक्षित कर सशस्त्र हमले किए गए। इस दौरान केंद्रीय राजमार्ग पर नियंत्रण भी बीएलए के हाथों में रहा। International News
जैंद के अनुसार, नुश्की में बादल करीज क्रॉस पर बीएलए के कमांडरों ने नाकाबंदी कर रहे सेना के जवानों पर हमला किया। वहीं कलात के खजानई इलाके में खनिजों से भरे वाहनों को क्षतिग्रस्त किया गया। 26 सितंबर को क़लात के ज़वाह इलाके में भी पाकिस्तानी सेना पर घात लगाकर हमला किया गया।
बीएलए ने ज़ोहरी में गुलाम हुसैन को हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद उसने स्वीकार किया कि वह एक साल से सेना के लिए मुखबिरी कर रहा था। दौलत खान ने युवाओं को जबरन गायब कराने में मदद करने की बात स्वीकार की। मंगचर के कलात में इशाक निचारी को भी गिरफ्तार किया गया, जिसने बताया कि वह सेना के छापों में सक्रिय था।
पाकिस्तान के पेशावर में 4 मार्च 2022 को हुए घातक आतंकी हमले में शामिल दाएश-के (इस्लामिक स्टेट खुरासान) का वरिष्ठ कमांडर मोहम्मद इहसानी उर्फ़ अनवार अफगानिस्तान के मजार शरीफ में मारा गया। दाएश-के आईएस का क्षेत्रीय शाखा है और अफगानिस्तान, पाकिस्तान और मध्य एशिया के कुछ हिस्सों में सक्रिय रहा है। इस संगठन की स्थापना 2015 में पाकिस्तानी और अफगानी तालिबान के पूर्व सदस्यों ने की थी। International News
रावलपिंडी के सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, इहसानी ताजिक आत्मघाती हमलावरों को प्रशिक्षित करने और उन्हें हमलों के लिए पाकिस्तान लाने का जिम्मेदार था। उसकी पाकिस्तान में आतंकवाद फैलाने में अहम भूमिका रही है।
सूत्रों ने बताया कि इहसानी पेशावर के कुचा रिसालदार इलाके में शिया मस्जिद पर हुए आत्मघाती बम हमले का मुख्य सूत्रधार था। इस हमले में 63 लोग मारे गए और 190 से अधिक घायल हुए। हमले के दौरान आईएस का आतंकी जुलैबीब अल-काबली पहले मस्जिद के बाहर गोली चला रहा था और फिर अंदर घुसकर खुद को विस्फोटक जैकेट से उड़ा लिया। International News
चार मार्च 2022 के इस हमले के बाद पाकिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकवादी समूहों के हमलों में तेजी देखी गई। यह हमला पाकिस्तान के इतिहास के सबसे घातक आतंकी हमलों में शुमार है।
2021 में तालिबान के अफगानिस्तान में सत्ता में लौटने के बाद सीमा पार आतंकवादी घटनाओं में वृद्धि हुई है। हालांकि तालिबान और दाएश-के के बीच वैचारिक और रणनीतिक मतभेद हैं, इसलिए वे अक्सर एक-दूसरे के विरोधी रहे हैं। दाएश-के ने कई बड़े हमले किए हैं, जिनमें अगस्त 2021 में काबुल हवाई अड्डे पर अमेरिकी सैनिकों और अफगान नागरिकों को निशाना बनाने वाला हमला भी शामिल है। International News