
बलूच यकजेहती समिति (BYC) ने संघीय सरकार द्वारा बलूचिस्तान के रास्ते इराक जाने वाले शिया तीर्थयात्रियों की चेहल्लुम यात्रा पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। समिति ने इस फैसले को न केवल संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया है, बल्कि इसे सुरक्षा के नाम पर की जा रही धार्मिक पक्षपात की नीति करार दिया है। BYC का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस्लामाबाद में एक बयान देते हुए कहा था कि तीर्थयात्रियों के काफिले पर आतंकी हमलों के खतरे को देखते हुए क्वेटा से 800 किलोमीटर लंबे मार्ग पर यात्रा प्रतिबंधित की गई है। Balochistan
‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, BYC ने अपने बयान में कहा कि राज्य का कर्तव्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, न कि खतरे की आड़ में उनके धार्मिक अनुष्ठानों को रोकना। समिति ने साफ कहा, “सरकार सुरक्षा बहाने बनाकर अपनी मूल जिम्मेदारियों से भाग नहीं सकती। अगर खतरा है, तो उसे दूर करना सरकार का काम है — यात्रा रोकना नहीं। बीवाईसी ने इस प्रतिबंध के खिलाफ शिया समुदाय द्वारा कराची से रिमदान सीमा तक प्रस्तावित लंबे मार्च को ‘संवैधानिक अधिकारों की अभिव्यक्ति’ बताया और उसमें हिस्सा लेने वाले सभी लोगों को पूर्ण समर्थन व एकजुटता देने की घोषणा की।
BYC ने सरकार से तत्काल प्रतिबंध हटाने और बलूचिस्तान के रास्ते इराक व ईरान जाने वाले श्रद्धालुओं को पूर्ण सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की। साथ ही चेतावनी भी दी कि अगर इस शांतिपूर्ण मार्च को बल प्रयोग या दमन के जरिए रोका गया, तो इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला माना जाएगा। बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने भी इसी तरह की घोषणा करते हुए बलूचिस्तान के मार्ग से तीर्थयात्रा पर रोक लगाने का इरादा जताया था, जिसे लेकर अब सामाजिक और राजनीतिक हलकों में गहरी नाराजगी उभर रही है। Balochistan