अमेरिका में नौकरी के लिए भरने होंगे ₹88 लाख? जानिए ट्रंप का नया नियम
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 10:13 PM
अमेरिका में काम करने का सपना देख रहे हजारों भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा को लेकर एक नया कार्यकारी आदेश जारी किया है जिसके तहत विदेशी कर्मचारियों को हायर करने वाली कंपनियों को अब 1 लाख डॉलर (लगभग ₹88 लाख) की भारी भरकम फीस चुकानी होगी। इस आदेश का सीधा असर उन कंपनियों और पेशेवरों पर पड़ेगाजो भारत जैसे देशों से अमेरिका में जाकर काम करने की योजना बना रहे हैं। H-1B Visa
क्या है ट्रंप का नया आदेश?
नए नियमों के तहत, अगर कोई कंपनी विदेश से किसी कर्मचारी के लिए H-1B वीजा आवेदन करती है तो उसे पहले यह साबित करना होगा कि उसने 1 लाख डॉलर की फीस जमा की है। यह नियम नए वीजा आवेदनों पर लागू होगा। मौजूदा वीजा धारकों (Existing H-1B Holders) को इस शुल्क से छूट दी गई है।
किसे देना होगा शुल्क?
फीस देनी होगी
वे कंपनियां जो भारत या अन्य देशों से नए कर्मचारियों को अमेरिका बुलाना चाहती हैं। वे H-1B वीजा धारक जो 12 महीने से ज्यादा समय से अमेरिका से बाहर हैं और अब वापस लौटना चाहते हैं (यदि वे 21 सितंबर 2025 से पहले वापस नहीं लौटते)।
फीस से छूट मिलेगी
मौजूदा H-1B वीजा धारक जो अमेरिका में रह रहे हैं। वे कर्मचारी या कंपनियां जो राष्ट्रीय सुरक्षा, पब्लिक वेलफेयर या जरूरी तकनीकी क्षेत्रों से जुड़ी हैं जैसे डिफेंस, हेल्थकेयर, या इमर्जेंसी टेक्नोलॉजी। इस तरह जो लोग पहले से अमेरिका में काम कर रहे हैं या जिनकी भूमिका अमेरिका की सुरक्षा और भलाई से जुड़ी है उन्हें राहत दी गई है।
भारतीय पेशेवर सबसे ज्यादा प्रभावित
साल 2024 में H-1B वीजा के 71% आवेदन भारतीयों ने किए थे। इनमें से अधिकतर आईटी और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े थे। ट्रंप के आदेश से भारतीय टैलेंट पूल पर सीधा असर पड़ेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हम अमेरिका के प्रस्तावित आदेश पर रिपोर्ट्स देख रहे हैं। इसका सभी पहलुओं से अध्ययन किया जा रहा है। यह फैसला कई परिवारों को प्रभावित कर सकता है। उम्मीद है कि अमेरिकी प्रशासन इस पर विचार करेगा।”
ट्रंप ने क्यों लिया ये फैसला?
ट्रंप ने अपने आदेश का बचाव करते हुए कहा, “H-1B वीजा का मकसद अमेरिका में टैलेंट लाना था लेकिन कंपनियां इसका दुरुपयोग कर रही थीं। वे सस्ते वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को लाकर अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छीन रही थीं।” उनका दावा है कि यह फैसला “अमेरिकी रोजगार की रक्षा” के लिए है और इससे सिर्फ वही टैलेंट अमेरिका आएगा जो वास्तव में योग्य है।
कानूनी विशेषज्ञ इस आदेश पर सवाल उठा रहे हैं। इमिग्रेशन सर्विस के पूर्व अधिकारी डग रैंड ने कहा, “इतनी अधिक फीस वसूलने का आदेश कोर्ट में 5 सेकंड भी नहीं टिकेगा।” एक अन्य पूर्व अधिकारी टॉम जवेट्ज ने इसे कानून के खिलाफ बताते हुए कहा, “देश ऐसे नहीं चलता।” आदेश 21 सितंबर 2025 से प्रभाव में आएगा। फिलहाल इसे 12 महीने के लिए लागू किया गया है लेकिन इसे बढ़ाया भी जा सकता है। H-1B Visa