प्यार या फिर सुविधा! मेट्रो सिटीज में बढ़ रहा होबोसेक्सुअलिटी का ट्रेंड
भारत
चेतना मंच
14 Sep 2025 10:35 AM
तेजी से बदलते भारतीय समाज में रिश्तों की परिभाषा भी अब पहले जैसी नहीं रही। जहां पहले प्यार और भावनाओं पर आधारित संबंधों को अहम माना जाता था अब सुविधाओं और जरूरतों ने भी इन रिश्तों में अपनी जगह बना ली है। महानगरों में उभर रहा 'होबोसेक्सुअलिटी' (Hobosexuality) का ट्रेंड इसी बदलाव की एक बानगी है। Hobosexuality Trend in India
यह एक ऐसा रिश्ता है जिसमें एक पार्टनर प्यार के बजाय रहने की जगह, आर्थिक सहारा या जीवन की सुविधा पाने के मकसद से रिश्ते में आता है। यानी रिश्ता दिखता तो रोमांटिक है लेकिन असल में वह एक 'सुविधा की साझेदारी' है।
क्या है होबोसेक्सुअलिटी?
'होबोसेक्सुअल' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है ‘Hobo’ (जिसका मतलब है बेघर व्यक्ति) और ‘Sexual’। इसका मतलब है ऐसा इंसान जो सिर्फ रहने की जगह या जीवन की जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी के साथ रिश्ते में आता है। शुरुआत में यह शब्द इंटरनेट स्लैंग की तरह इस्तेमाल हुआ करता था लेकिन अब यह भारत के मेट्रो सिटीज जैसे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में तेजी से एक वास्तविक ट्रेंड बनता जा रहा है।
किन वजहों से बढ़ रहा है यह ट्रेंड?
बढ़ती महंगाई और किराया
महानगरों में घर का किराया आम नौकरीपेशा व्यक्ति की आय का 40-50% तक हो सकता है। ऐसे में लोग रिलेशनशिप को एक आवासीय विकल्प की तरह देखने लगे हैं।
अकेलापन और सामाजिक दबाव
अकेले रहना मानसिक रूप से थका देने वाला हो सकता है। वहीं, साथ रहने और रिश्ते में होने का सामाजिक दबाव भी इस तरह के संबंधों को बढ़ावा देता है।
आर्थिक संघर्ष
Deloitte की एक रिपोर्ट बताती है कि 2025 तक आधे से ज्यादा मिलेनियल्स और जेन Z युवाओं के लिए अपनी बेसिक जरूरतें पूरी कर पाना भी मुश्किल होगा। ऐसी स्थिति में कई लोग प्यार नहीं, बल्कि सहूलियत की तलाश में पार्टनर चुनते हैं।
होबोसेक्सुअल रिलेशनशिप में छिपा इमोशनल जाल
शुरुआत में ऐसे रिश्ते बिल्कुल सामान्य लग सकते हैं बहुत प्यार, अटेंशन और साथ का वादा। लेकिन धीरे-धीरे जब सच्चाई सामने आती है तो एक पार्टनर खुद को अकेला, आर्थिक रूप से बोझ उठाते हुए और भावनात्मक रूप से थका हुआ पाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह के रिश्तों में 'पावर बैलेंस' नहीं होता। एक व्यक्ति फायदे में रहता है जबकि दूसरा लगातार प्यार, पैसे और सहारा देता रहता है।
समझने की जरूरत
होबोसेक्सुअलिटी को सिर्फ एक चालाकी भरा रिश्ता या धोखा कहना आसान है, लेकिन समाजशास्त्री मानते हैं कि यह ट्रेंड आज के शहरी समाज की वास्तविकता भी है। यह उन आर्थिक, सामाजिक और भावनात्मक दबावों की निशानी है जो आज की पीढ़ी झेल रही है। इसलिए जरूरी है कि हम सिर्फ उंगली उठाने के बजाय इस चलन को समझें ताकि रिश्तों में बराबरी, पारदर्शिता और जागरूकता लाई जा सके। Hobosexuality Trend in India