New Year के मौके पर स्विट्जरलैंड में बड़ा धमाका, कई लोगों की मौत की आशंका

Switzerland blast: स्विट्ज़रलैंड से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। नए साल के पहले दिन स्विट्ज़रलैंड के लग्जरी अल्पाइन स्की रिसॉर्ट में भीषण धमाका हुआ। धमाके में कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की आशंका जताई जा रही है।

स्विट्जरलैंड
नए साल में स्विट्जरलैंड में बड़ा धमाका
locationभारत
userअसमीना
calendar01 Jan 2026 12:28 PM
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नए साल के पहले दिन स्विट्जरलैंड के एक लग्जरी अल्पाइन स्की रिजॉर्ट में स्थित बार में भीषण धमाका होने की खबर है। इस हादसे में कई लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया है और राहत व बचाव कार्य जारी है।

स्विट्जरलैंड में बड़ा धमाका

जानकारी के मुताबिक, स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि धमाके के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है लेकिन इस घटना में कई लोगों के हताहत होने की संभावना है। धमाके के तुरंत बाद रिजॉर्ट में भीषण आग लग गई जिससे अफरातफरी मच गई।

अचानक हुआ जोरदार धमाका

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लोग नए साल का जश्न मना रहे थे तभी अचानक जोरदार धमाका हुआ। धमाके के बाद लोग चीखते-चिल्लाते हुए बाहर की ओर भागते नजर आए। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई है। 

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ईरान की सड़कों पर बढ़ता जनआक्रोश
ईरान की सड़कों पर बढ़ता जनआक्रोश
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar01 Jan 2026 10:35 AM
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Iran Protest: ईरान इस वक्त करीब एक हफ्ते से आर्थिक बदहाली और राजनीतिक बेचैनी के दोहरे दबाव में सुलग रहा है। चिंगारी दिसंबर के आखिर में तेहरान के ग्रैंड बाजार से उठी जहां दुकानदारों की हड़ताल ने देखते ही देखते विरोध की लपटों को देश के कई शहरों तक फैला दिया। तेज़ी से गिरता रियाल, 42–50% की महंगाई, आयातित सामान की उछलती कीमतें और आम लोगों की घटती क्रय-शक्ति इस आक्रोश की मूल वजह बताई जा रही हैं। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि डॉलर के मुकाबले रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने की चर्चा हैबताया जा रहा है कि 1 डॉलर करीब 1.42 मिलियन रियाल के आसपास कारोबार कर रहा है।

छात्रों की एंट्री से आंदोलन को मिला नया तेवर

लेकिन अब यह आंदोलन सिर्फ महंगाई का विरोध नहीं रहा। सड़कों पर उठ रहे नारों में अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर सत्ता को चुनौती देने का स्वर भी साफ सुनाई दे रहा है सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ नारे और कहीं-कहीं शाह समर्थक आवाजें भी सामने आई हैं। छात्रों की सक्रिय भागीदारी, फार्स प्रांत में सरकारी भवन पर हमले की खबरें और पुलिस द्वारा टीयर गैस के इस्तेमाल ने माहौल को और ज्यादा तनावपूर्ण बना दिया है। इसी बीच राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने प्रदर्शनकारियों की चिंताओं को स्वीकारते हुए सेंट्रल बैंक गवर्नर को हटाने और प्रतिनिधियों से बातचीत का संकेत दिया, जबकि प्रॉसीक्यूटर जनरल ने “असुरक्षा फैलाने” वालों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दे दी। उधर, निर्वासित रेज़ा पहलवी का समर्थन और अमेरिका-इजरायल के शीर्ष नेताओं की टिप्पणियां इस संकट को अंतरराष्ट्रीय फोकस में ले आई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि 2022 के ‘Women, Life, Freedom’ आंदोलन के बाद यह ईरान में सबसे बड़ा उभार है और अब बड़ा सवाल यही है कि यह उबाल किस दिशा में मोड़ लेता है।

प्रदर्शन धीरे-धीरे ठंडे पड़ सकते हैं

फिलहाल सत्ता का रवैया पूरी तरह “ऑल-आउट क्रैकडाउन” वाला नहीं दिख रहा। राष्ट्रपति की बातचीत की पेशकश, सेंट्रल बैंक में बदलाव जैसे संकेत बताता है कि सरकार तनाव कम करने की कोशिश कर रही है। यदि रियाल में थोड़ी स्थिरता आती है और सब्सिडी/कर राहत या कीमतों पर कुछ नियंत्रण जैसे तात्कालिक कदम घोषित किए जाते हैं, तो विरोध कुछ सप्ताह में कमजोर पड़ सकता है। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती भरोसे की कमी है। यदि प्रदर्शन “आर्थिक” से आगे बढ़कर सीधे सत्ता परिवर्तन या सुप्रीम लीडर के खिलाफ निर्णायक चुनौती में बदलते हैं, तो सुरक्षा तंत्र कठोर रुख अपना सकता है। बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां, इंटरनेट पर नियंत्रण/ब्लैकआउट, और व्यापक सुरक्षा तैनाती जैसे कदम संभव हैं। ऐसे हालात में सरकार विदेशी हस्तक्षेप का नैरेटिव भी मजबूत कर सकती है जिससे तुरंत नियंत्रण तो हो सकता है, लेकिन लंबे समय में जनता का गुस्सा और गहरा हो सकता है।

आंशिक सुधारों का रास्ता

पेजेश्कियन की सुधारवादी छवि का इस्तेमाल कर सत्ता कुछ व्यावहारिक आर्थिक फैसले ले सकती हैतेल निर्यात को बढ़ाने की कोशिश, चीन-रूस के साथ व्यापार पर जोर, सब्सिडी/बजट में कुछ राहत, या 2026 के बजट में कर-भार कम करने जैसे संकेत। यदि मध्यम वर्ग और व्यापारियों को लगे कि राहत वास्तविक है, तो विरोध की तीव्रता घट सकती है और सरकार इसे “जनता की सुनवाई” के रूप में प्रस्तुत कर स्थिरता का दावा कर सकती है। मगर प्रतिबंधों और क्षेत्रीय तनाव के रहते बड़े और गहरे सुधार आसान नहीं होंगे।

आंदोलन का व्यापक फैलाव

अगर छात्र, मजदूर, व्यापारी और शहरी मध्यवर्ग एक साथ लंबे समय तक सड़क पर टिकते हैं, तो आंदोलन 1979 जैसी “मोमेंटम पॉलिटिक्स” का रूप ले सकता है। ऐसे में नेतृत्व संकट, सुरक्षा बलों में मतभेद, और प्रशासनिक मशीनरी में दरारें ये सब जोखिम बढ़ा सकते हैं। रेज़ा पहलवी जैसे निर्वासित चेहरों का समर्थन और विदेशी नेताओं की बयानबाजी आंदोलन को नैतिक/राजनीतिक ऊर्जा दे सकती है, पर यह सरकार को “बाहरी एजेंडा” का नैरेटिव चलाने का मौका भी देगी। यदि सुरक्षा तंत्र में विभाजन होता है, तो सत्ता के लिए चुनौती कई गुना बढ़ सकती है।

बाहरी हस्तक्षेप या क्षेत्रीय टकराव

यदि हालात बिगड़ते हैं, तो अमेरिका-इजरायल जैसे बाहरी खिलाड़ी ईरान के परमाणु/मिसाइल कार्यक्रम या सुरक्षा चिंताओं को आधार बनाकर दबाव बढ़ा सकते हैं । ऐसी स्थिति में सरकार “राष्ट्रीय एकता” और “विदेशी साजिश” का तर्क देकर प्रदर्शनों को दबाने की कोशिश करेगी, लेकिन बाहरी दबाव बढ़ने पर अर्थव्यवस्था और कमजोर हो सकती है जिससे अस्थिरता का चक्र लंबा चलने का खतरा रहेगा। Iran Protest

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रूस भारत को एक और अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम देगा, वायु सुरक्षा होगी अभेद्य

एस-350 वित्याज रूस द्वारा विकसित एक आधुनिक सर्फेस टू एयर मिसाइल (एसएएम) प्रणाली है। इसे खास तौर पर ऐसे खतरों से निपटने के लिए तैयार किया गया है जो कम और मध्यम ऊँचाई पर तेजी से हमला करते हैं।

s 350
एस-350 सिस्टम
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar31 Dec 2025 02:57 PM
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India-Russia Security : रूस ने भारत को एक बार फिर अपना आधुनिक मध्यम दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम एस-350 वित्याज देने का प्रस्ताव रखा है। इस पेशकश की खास बात यह है कि इसमें तकनीक हस्तांतरण का विकल्प भी शामिल है, जिससे भारत में स्वदेशी उत्पादन की राह खुल सकती है।

एस-350 वित्याज क्या है?

एस-350 वित्याज रूस द्वारा विकसित एक आधुनिक सर्फेस टू एयर मिसाइल (एसएएम) प्रणाली है। इसे खास तौर पर ऐसे खतरों से निपटने के लिए तैयार किया गया है जो कम और मध्यम ऊँचाई पर तेजी से हमला करते हैं। यह सिस्टम रूस की बहु-स्तरीय वायु रक्षा रणनीति का हिस्सा है, जहाँ लंबी दूरी के लिए एस-400, मध्यम दूरी के लिए एस-350 और नजदीकी रक्षा के लिए छोटे सिस्टम एक साथ काम करते हैं।

एस-350 की प्रमुख खूबियाँ

* एक साथ कई हवाई लक्ष्यों को पहचानने और नष्ट करने की क्षमता

* फाइटर जेट, ड्रोन और क्रूज मिसाइल जैसे खतरों के खिलाफ प्रभावी

* आधुनिक रडार और तेज प्रतिक्रिया प्रणाली

* एस-400 की तुलना में कम लागत और आसान तैनाती

भारत के लिए इसका महत्व

भारत को दो सक्रिय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, पाकिस्तान और चीन। 

पाकिस्तान के संदर्भ में कम ऊँचाई पर उड़ने वाले फाइटर जेट और क्रूज मिसाइलों द्वारा अचानक हमले कोएस-350 ऐसे खतरों को समय रहते रोकने में सक्षम है। दूसरी ओर चीन के संदर्भ में बड़ी संख्या में ड्रोन और आधुनिक लड़ाकू विमान सीमावर्ती इलाकों में तेज और लचीली वायु रक्षा की जरूरत के मुताबिक यहाँ एस-350 एक संतुलित और प्रभावी समाधान बन सकता है।

भारत की मौजूदा एयर डिफेंस प्रणाली में भूमिका

भारत पहले से ही आकाश मिसाइल सिस्टम, बाराक-8, एस-400 जैसी प्रणालियाँ इस्तेमाल कर रहा है। एस-350 इन सभी के बीच की खाली जगह को भरते हुए पूरी एयर डिफेंस चेन को और मजबूत कर सकता है। हालिया उच्च-स्तरीय वातार्ओं में अतिरिक्त एस-400 यूनिट और भविष्य के एस-500 सिस्टम पर भी चर्चा हुई है। हालाँकि, रूस फिलहाल एस-350 को सबसे तुरंत उपलब्ध और व्यावहारिक विकल्प मान रहा है। यह सिस्टम भारत की वायु सुरक्षा क्षमता को नया स्तर दे सकता है। दो-मोर्चों पर रक्षा को मजबूत करेगा

और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के कारण आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सहायक होगा।

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