अमेरिका और इजराइल ने ईरान के करीब 24 प्रांतों को अपना निशाना बनाया। तेहरान, इस्फहान, कोम जैसे बड़े शहरों में भारी तबाही मची। फोर्डो और नतांज जैसे प्रमुख परमाणु ठिकानों पर भी हमले किए गए, जिससे ईरान का परमाणु कार्यक्रम गंभीर रूप से कमजोर हो गया है। हमलों के पहले दिन ही 201 नागरिकों की मौत हो गई।

Iran-Israel War : मध्य पूर्व में तनाव अब खुले सैन्य टकराव में बदल चुका है। ईरान और इजराइल के बीच छिड़े इस युद्ध ने पूरी दुनिया को दहशत में डाल दिया है। ईरान के कई शहरों पर हवाई हमले किए गए हैं, जबकि जवाबी कार्रवाई में ईरान ने अमेरिका और इजराइल को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस लड़ाई का असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है।
इस युद्ध का सबसे बड़ा और सनसनीखेज खुलासा ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत है। 28 फरवरी की सुबह तेहरान के पास्तुर जिले में उनके सुरक्षित बंकर पर अमेरिका और इजराइल ने सुसाइड ड्रोन से हमला किया। इस हमले में खामेनेई के साथ ही उनके परिवार के कई सदस्य और शीर्ष ईरानी अधिकारी भी मारे गए। इसके बाद ईरान में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो गई है, जिसे लेकर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।
अमेरिका और इजराइल ने ईरान के करीब 24 प्रांतों को अपना निशाना बनाया। तेहरान, इस्फहान, कोम जैसे बड़े शहरों में भारी तबाही मची। फोर्डो और नतांज जैसे प्रमुख परमाणु ठिकानों पर भी हमले किए गए, जिससे ईरान का परमाणु कार्यक्रम गंभीर रूप से कमजोर हो गया है। हमलों के पहले दिन ही 201 नागरिकों की मौत हो गई और 747 से अधिक घायल हुए। मीनाब में एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले में 118 छात्राओं की जान चली गई, जो इस संघर्ष की भयावहता दर्शाता है।
ईरान ने चुप्पी नहीं साधी और उसने अमेरिका के मध्य पूर्व में मौजूद 27 सैन्य ठिकानों पर जबरदस्त मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कतर का अल उदीद एयर बेस, बहरीन में अमेरिकी नौसेना का 5वां बेड़ा और UAE-कुवैत के ठिकाने इसकी जद में आए। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि उन्हें हल्का नुकसान हुआ है और कोई बड़ी जान-माल की क्षति नहीं हुई। वहीं, इराक में ईरानी हमलों में दो लोगों की मौत हुई।
ईरान ने इजराइल पर भी बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार कर दी। तेल अवीव और हाइफा में सायरन बजते रहे और हवाई हमलों के डर से एयरस्पेस बंद कर दिया गया। इजराइल के पास मौजूद एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश मिसाइलों को रोक लिया, लेकिन फिर भी तेल अवीव में एक महिला की मौत हुई और 121 लोग घायल हुए। उत्तरी इजराइल में एक 9 मंजिला इमारत को भी नुकसान पहुंचा।
इस भीषण युद्ध का मुख्य कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका और इजराइल का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है। 6 से 27 फरवरी तक जिनेवा में हुई वार्ता के बावजूद, जब ईरान समझौते के लिए तैयार दिखा, तब भी अमेरिका और इजराइल ने हमला शुरू कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक परमाणु खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता।
इस युद्ध में किसी भी देश ने सार्वजनिक रूप से सैन्य समर्थन नहीं दिया। यह अमेरिका और इजराइल का संयुक्त अभियान है। हालांकि, सऊदी अरब, कतर, UAE जैसे देश अमेरिकी ठिकानों की मेजबानी करते हैं, लेकिन उन्होंने ईरानी हमलों की निंदा करते हुए अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया और अमेरिका-इजराइल के हमलों का खुलकर समर्थन नहीं किया।
खामेनेई की मौत के बाद ईरान के संविधान के अनुच्छेद 111 के अनुसार, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नए सुप्रीम लीडर का चुनाव करेगी। जब तक नया नेता चुना नहीं जाता, एक अंतरिम परिषद शासन संभालेगी, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान शामिल होंगे। अमेरिका और इजराइल की नजर ईरान में शासन परिवर्तन पर टिकी है।
युद्ध का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने के दाम में तेज उछाल आएगा। केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया के मुताबिक, मार्च तक सोना 15% तक बढ़कर 1.85 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। निवेशक इस अनिश्चित दौर में सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने की ओर भाग रहे हैं। Iran-Israel War