
क्या पीएम मोदी आसियान समिट में शरीक होंगे या मलेशिया में डोनाल्ड ट्रंप से उनकी मुलाकात होगी? अब इस सस्पेंस से पर्दा हट गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सात समंदर पार एक अहम फोन कॉल करके पूरी तस्वीर साफ कर दी। जी हां, 26 अक्टूबर से कुआलालंपुर में होने वाले इस शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी शारीरिक रूप से हिस्सा नहीं लेंगे। बुधवार शाम को पीएम मोदी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से फोन पर विस्तार से बात की। दोनों नेताओं ने आसियान और द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर गंभीर चर्चा की। इस वार्ता से यह स्पष्ट हो गया कि मोदी की मलेशिया यात्रा रद्द होने के चलते ट्रंप के साथ उनकी संभावित मुलाकात का खाका अब बन ही नहीं सकता। PM Modi Asean Summit
सूत्रों के अनुसार, भारत की तरफ से विदेश मंत्री एस. जयशंकर आसियान बैठकों में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। हालांकि, पीएम मोदी डिजिटल माध्यम से शिखर सम्मेलन में जुड़ने पर विचार कर सकते हैं। इस बार की घोषणा ने न केवल राजनीतिक सस्पेंस को समाप्त किया बल्कि विदेश नीति के दृष्टिकोण से भी नए संकेत दे दिए हैं। PM Modi Asean Summit
आसियान समिट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल होंगे। ट्रंप इस शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने की उम्मीद लगाए बैठे थे। लेकिन अब यह साफ हो गया है कि पीएम मोदी मलेशिया नहीं जा रहे, जिससे ट्रंप की मोदी से मुलाकात की संभावनाएं खत्म हो गईं। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर समिट में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। वहीं, ट्रंप शी जिनपिंग से मिलने के लिए उत्साहित हैं, लेकिन मोदी की गैरमौजूदगी ने इस संभावित त्रिकोणीय मुलाकात को अब सिर्फ अटकलों तक सीमित कर दिया है। ऐसे में आसियान समिट में वैश्विक नेताओं के बीच नई कूटनीतिक हलचल की राह खुलती दिख रही है।
बुधवार शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से फोन पर लंबी और महत्वपूर्ण बातचीत की। बातचीत की शुरुआत में मोदी ने अपने पहले से तय कार्यक्रम का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि वे इस बार आसियान समिट में शामिल नहीं होंगे। दोनों नेताओं ने भारत-आसियान संबंधों की मजबूती पर जोर दिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, व्यापार एवं निवेश, जलवायु परिवर्तन और डिजिटल अर्थव्यवस्था सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
पीएम मोदी ने भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई, जबकि अनवर ने मलेशिया के माध्यम से आसियान-भारत साझेदारी को और गहरा करने पर सहमति जताई।द्विपक्षीय स्तर पर व्यापार घाटे को कम करने, डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग बढ़ाने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर भी दोनों नेताओं ने गंभीर चर्चा की, जिससे भारत-मलेशिया संबंधों में नई ऊर्जा और दिशा का संकेत मिला।
सूत्रों के अनुसार, इस बार आसियान शिखर सम्मेलन में भारत की तरफ से विदेश मंत्री एस. जयशंकर देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। पिछले कुछ वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आसियान-भारत और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलनों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया है, लेकिन इस बार मोदी की गैरमौजूदगी में यह जिम्मेदारी जयशंकर संभालेंगे। मलेशिया ने इस शिखर सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ-साथ कई अन्य संवाद साझेदार देशों के नेताओं को भी आमंत्रित किया है। ट्रंप 26 अक्टूबर से दो दिवसीय यात्रा पर कुआलालंपुर आएंगे और इस दौरान वैश्विक कूटनीति में हलचल की उम्मीद है। भारत की तरफ से जयशंकर की भागीदारी इस समिट में नई दिशा और सक्रिय भूमिका का संकेत देती है। PM Modi Asean Summit
भारत और आसियान के रिश्तों की कहानी 1992 में शुरू हुई, जब क्षेत्रीय सहयोग की नींव रखी गई। दिसंबर 1995 में यह साझेदारी पूर्ण संवाद स्तर तक पहुंची और 2002 में इसे शिखर सम्मेलन स्तर की मान्यता मिली। समय के साथ इन रिश्तों ने गहराई पकड़ी और 2012 में इसे रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया। आज भारत, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपीन, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया सहित आसियान के 10 सदस्य देशों के साथ बहुआयामी सहयोग में जुड़ा हुआ है, जो व्यापार, सुरक्षा, तकनीकी और सांस्कृतिक क्षेत्रों तक फैला हुआ है। PM Modi Asean Summit