
Israel Iran Conflict : भारत में ईरान के मिशन के उप प्रमुख मोहम्मद जावेद हुसैनी ने इजरायल-ईरान टकराव के बीच एक अहम बयान देते हुए कहा है कि ईरान क्षेत्र में शांति और स्थिरता का समर्थक है और किसी भी संवाद प्रक्रिया का स्वागत करता है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों की पहले खुलकर आलोचना की जाए।
पीटीआई को दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में हुसैनी ने स्पष्ट किया कि तेहरान शांति वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने शर्त रखी कि "पहले इजरायली हमलों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा होनी चाहिए।" उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायली शासन ने झूठे और निराधार आरोपों के बहाने ईरान की संप्रभुता पर हमला किया है।
हुसैनी के मुताबिक, "ईरान ने यह साबित कर दिया है कि वह न सिर्फ अपने नागरिकों बल्कि विदेशी नागरिकों की भी रक्षा करने में सक्षम है। हमने आत्मरक्षा में संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सहारा लिया और जवाबी कार्रवाई की।"
ईरानी राजनयिक ने भारत की भूमिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि, "भारत हमारा मित्रवत और भाईचारे वाला देश है। हम उम्मीद करते हैं कि भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर इजरायल पर दबाव बनाएगा ताकि वह अपनी शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को रोके।" हुसैनी ने यह भी जोड़ा कि भारत जैसे देशों की सक्रिय भागीदारी पश्चिम एशिया में स्थायित्व और सामूहिक समाधान की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है।
इस बीच, इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन राइजिंग लायन के तहत तेहरान समेत कई इलाकों पर मिसाइल हमले किए गए हैं। इजरायल का दावा है कि वह ईरान की परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करने के लिए यह कार्रवाई कर रहा है। ईरान ने भी चेतावनी के बाद जवाबी हमला किया है, जिससे इलाके में तनाव और गहरा गया है।
इससे पहले भारत में इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने कहा था कि उनका देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम को एक बड़ा खतरा मानता है और इसी के तहत सैन्य कार्रवाई की गई है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इजरायल ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए खास ठिकानों को निशाना बना रहा है।
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