आइसलैंड में महिलाएं क्यों हैं आंदोलन पर,पीएम कैटरीन ने भी दिया समर्थन
Iceland Women Demands Pay Parity
भारत
चेतना मंच
28 Nov 2025 10:22 PM
Iceland Women Demands Pay Parity लैंगिक समानता में पहले स्थान पर काबिज आइसलैंड में इन दिनों महिलाएं आंदोलन कर रही हैं. यह खबर सुनना थोड़ा अचरज भरा लगता है, लेकिन यह सच है. आंदोलन का कारण है वेतन में पुरूष-महिला के बीच अंतर का होना. महिलाओं की मांग है कि वेतन में लैंगिक अंतर को शत प्रतिशत खत्म किया जाए. इस मांग पर पीएम कैटरीन ने भी सहमति जताई है और वह समर्थन देने धरने पर पहुंची. बता दें कि लैंगिक समानता इंडेक्स में आइसलैंड 90 प्रतिशत अंकों के साथ पहले स्थान पर है. शत प्रतिशत अंक हासिल करने में सिर्फ 10 प्रतिशत अंकों से दूर है. इसकी मुख्य वजह है वेतन में लैंगिक अंतर.
विश्व लैंगिक समानता इंडेक्स- 2023 (World Gender Gap Index) में देशों की रैंक के तय करने में 4 आधार माने जाते हैं. पहला- आर्थिक भागीदारी एवं अवसर, दूसरा- शिक्षा के अवसर, तीसरा- स्वास्थ्य एवं उत्तरजीविता व चौथा-राजनीतिक सशक्तीकरण.
1975 में हुई थी महिला क्रांति की शुरुआतः
लैंगिक असमानता को दूर करने के लिए 1975 में बड़ी क्रांति देखने को मिली थी. 24 अक्टूबर 1975 में महिलाओं ने पुरूषों के समान वेतन की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन किया, यह आंदोलन सफल रहा. इससे सरकार पर इतना दबाव आया कि उसे संसद में समान वेतन के लिए कानून पास करना पड़ा. वर्ष 2018 में भी सरकार ने एक विशेष अधिनियम बनाकर निजी सेक्टर में भी समान वेतन को लेकर जवाबदेही तय की.
भारत की 127वें स्थान परः
विश्व लैंगिक समानता इंडेक्स-2023 में इंडिया 146 देशों में 127वीं रैंक पर है. इंडिया ने आठ रैंक का सुधार किया है. जबकि 2022 में 135वीं रैंक थी. आइसलैंड की पहली रैंक के अलावा नॉर्वे दूसरी, फिनलैंड तीसरी, भूटान 103वीं, चीन 107वीं, श्रीलंका 115वीं, नेपाल 116वी, इंडिया 127वीं व पाकिस्तान 142वीं रैंक पर है
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