पीएम मोदी के इजराइल दौरे का बॉयकॉट करेगी इजराइली विपक्ष

नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे को लेकर वहां की राजनीति में हलचल मची हुई है। खासतौर पर उनका इजराइली संसद (नेसेट) में संबोधन एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। विपक्षी नेता याइर लैपिड ने चेतावनी दी है कि यदि कुछ औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया, तो वे मोदी के संबोधन का बॉयकॉट कर सकते हैं।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar23 Feb 2026 05:17 PM
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PM Modi Israel Tour : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे को लेकर वहां की राजनीति में हलचल मची हुई है। खासतौर पर उनका इजराइली संसद (नेसेट) में संबोधन एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। विपक्षी नेता याइर लैपिड ने चेतावनी दी है कि यदि कुछ औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया, तो वे मोदी के संबोधन का बॉयकॉट कर सकते हैं।

विवाद की वजहें

1. न्यायपालिका के शीर्ष पदाधिकारी को आमंत्रण नहीं:

लैपिड का कहना है कि अगर इजराइल के सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख यित्जाक को नेसेट सत्र में शामिल नहीं किया गया, तो वे मोदी के भाषण में हिस्सा नहीं लेंगे। उनका तर्क है कि यह परंपरा और प्रोटोकॉल का उल्लंघन होगा, क्योंकि आमतौर पर ऐसे अवसरों पर न्यायपालिका के उच्च अधिकारी को बुलाया जाता है।

2. न्यायपालिका की गरिमा को लेकर चिंता:

विपक्ष का आरोप है कि सरकार जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट प्रमुख को नजरअंदाज कर रही है, जिससे न्यायपालिका की प्रतिष्ठा पर असर पड़ सकता है।

3. भारत और पीएम मोदी का सम्मान:

लैपिड ने यह भी कहा कि अगर आवश्यक औपचारिकताओं का पालन नहीं हुआ, तो इससे भारत और प्रधानमंत्री दोनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असुविधा हो सकती है।

घरेलू राजनीतिक संदर्भ

यह विवाद इजराइल के भीतर न्यायिक सुधारों और सरकार के अदालतों के खिलाफ रुख के संदर्भ में देखा जा रहा है। लैपिड इसे न्यायपालिका के सम्मान की रक्षा और परंपरागत शिष्टाचार बनाए रखने के प्रयास के रूप में पेश कर रहे हैं। वहीं कुछ आलोचक इसे राजनीतिक लाभ के लिए कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी मान रहे हैं।

भारत-इजराइल संबंधों पर असर

भारत और इजराइल के बीच मजबूत कूटनीतिक और सामरिक संबंध हैं। ऐसे में विपक्षी नेता भी चाहते हैं कि भारत के दौरे पर किसी तरह की अंतरराष्ट्रीय असुविधा न आए। हालांकि, यदि जरूरी औपचारिकताओं का ध्यान नहीं रखा गया, तो विरोधी नेता संसद सत्र में शामिल न होकर अपनी नाराजगी व्यक्त कर सकते हैं। संक्षेप में, यह विवाद इजराइल के आंतरिक राजनीतिक और न्यायिक तनावों का नतीजा है, जिसने एक महत्वपूर्ण विदेशी दौरे को भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया है।


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अफगान बॉर्डर पर पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक, 19 की मौत का दावा

पाकिस्तान ने अफगान बॉर्डर के पास तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और सहयोगी संगठनों के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की है। पाकिस्तान का दावा है कि इन हमलों में आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया गया। अफगान अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में 19 लोगों की मौत हुई।

Pakistan Airstrike on Afghan Border
अफगान बॉर्डर पर पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक
locationभारत
userअसमीना
calendar22 Feb 2026 07:40 AM
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अफगानिस्तान की सीमा के पास पाकिस्तान की ओर से एयरस्ट्राइक का मामला एक बार फिर विवादों में आ गया है। पाकिस्तान का दावा है कि उसने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और उसके सहयोगी संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाया। वहीं अफगान सरकार का कहना है कि, इस हमले में आम नागरिकों और मदरसों को नुकसान पहुंचा है। इस घटनाक्रम ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों को और जटिल बना दिया है।

पाकिस्तान का दावा

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि सेना ने TTP और सहयोगी संगठनों के सात कैंपों पर चयनात्मक ऑपरेशन किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा क्षेत्र में इस्लामिक स्टेट से जुड़े एक गुट पर भी कार्रवाई की गई। पाकिस्तान का दावा है कि इन एयरस्ट्राइकों का उद्देश्य उन आतंकियों के ठिकानों को नष्ट करना था जो हाल ही में पाकिस्तान में फिदायीन हमलों के लिए जिम्मेदार थे।

अफगानिस्तान का बयान

अफगान सरकार ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने मदरसे और आम नागरिकों को निशाना बनाया। उनके अनुसार इस हमले में 19 लोगों की मौत हुई है। अफगान अधिकारियों ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि यह कार्रवाई अप्रिय परिणामों का कारण बन सकती है और इसे बदले की कार्रवाई के रूप में देखा जा सकता है।

एयरस्ट्राइक के प्रभावित इलाके

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी एयरफोर्स ने अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत के बरमल जिले और नंगरहार प्रांत के खोगयानी जिले में एयरस्ट्राइक की। इसके अलावा बरमल और अर्गुन के साथ-साथ नंगरहार के बहसोद और गनी खेल जिलों में भी कई हमले किए गए। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि धार्मिक मदरसों और स्थानीय आबादी को भी नुकसान हुआ है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बाजौर जिले में आत्मघाती हमले में 11 सैनिक और एक बच्चे की मौत हुई थी। इसके अलावा बन्नू जिले में हुए एक अन्य आत्मघाती हमले में दो सैनिक, जिनमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल भी शामिल थे, मारे गए। पाकिस्तान ने इन हमलों के पीछे अफगानिस्तान में बैठे TTP नेतृत्व का हाथ होने का आरोप लगाया है।

TTP और अफगान तालिबान का अंतर

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) अफगान तालिबान से अलग संगठन है लेकिन दोनों का करीबी सहयोग माना जाता है। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि TTP के लड़ाके अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान में हमले करने के लिए करते हैं। हालांकि काबुल और TTP इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों में तनाव

2021 में अफगान तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में लगातार तनाव देखा गया है। पिछले वर्ष सीमा पर हुई झड़पों में कई सैनिक और नागरिक मारे गए थे। कतर की मध्यस्थता से हुआ युद्धविराम फिलहाल कायम है लेकिन औपचारिक समझौता अभी तक नहीं हुआ है। इस एयरस्ट्राइक ने सीमा पर तनाव को और बढ़ा दिया है।

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भारत में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर का दांव, हुई पैसों की बारिश

अब असली मुकाबला उस बुनियादी ढांचे को बनाने का है जिस पर भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था टिकेगी। बड़े डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, क्लाउड नेटवर्क और एडवांस चिप्स यही इस नए दौर की असली ताकत हैं। दुनिया की अग्रणी टेक कंपनियों ने भारत को एआई विस्तार के लिए एक रणनीतिक केंद्र के रूप में देखा है।

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उभरते बाजारों में एआई अपनाने की रफ्तार तेज करने पर जोर
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar21 Feb 2026 03:47 PM
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AI Summit 2026 : इंडिया एआई इम्पैक्ट सम्मिट 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ प्रयोग और चर्चा तक सीमित नहीं है। अब असली मुकाबला उस बुनियादी ढांचे को बनाने का है जिस पर भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था टिकेगी। बड़े डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, क्लाउड नेटवर्क और एडवांस चिप्स यही इस नए दौर की असली ताकत हैं। दुनिया की अग्रणी टेक कंपनियों ने भारत को एआई विस्तार के लिए एक रणनीतिक केंद्र के रूप में देखा है। आइए प्रमुख घोषणाओं पर नजर डालते हैं:

माइक्रोसौफ्ट : 50 अरब डॉलर का वैश्विक विस्तार लक्ष्य

माइक्रोसॉफ्ट ने 2030 तक ग्लोबल साउथ में एआई क्षमताओं को मजबूत करने के लिए 50 अरब डॉलर तक निवेश करने की योजना पर काम करने की बात कही। भारत को इस रणनीति में अहम स्थान दिया गया है। पिछले वर्ष के दौरान कंपनी पहले ही देश में एआईपरियोजनाओं के लिए लगभग 17.5 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता जता चुकी है। यह संकेत है कि उभरते बाजारों में एआई अपनाने की रफ्तार तेज करने पर जोर रहेगा।

अडानी ग्रुप : ग्रीन एनर्जी से संचालित एआई डेटा सेंटर

अडानी ग्रुप ने 2035 तक नवीकरणीय ऊर्जा आधारित एआई डेटा सेंटर नेटवर्क खड़ा करने के लिए 100 अरब डॉलर निवेश की योजना पेश की। कंपनी का अनुमान है कि इससे सर्वर निर्माण और सॉवरेन क्लाउड जैसे क्षेत्रों में अतिरिक्त 150 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित हो सकता है। यदि यह योजना सफल रहती है, तो भारत में लगभग 250 अरब डॉलर का एआई इकोसिस्टम विकसित हो सकता है।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विस और ओपेन एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ता आईटी सेक्टर

टीसीएस ने बताया कि ओपेन एआई उसके डेटा सेंटर कारोबार का पहला प्रमुख ग्राहक बना है, जो एक वैश्विक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पहल का हिस्सा है। यह साझेदारी दर्शाती है कि भारतीय आईटी कंपनियां पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं से आगे बढ़कर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में भी अपनी भूमिका मजबूत करना चाहती हैं।

लार्सन एंड टूब्रो और एनवीडिया : भारत की बड़ी एआई फैक्ट्री

लार्सन एंड टूब्रो ने एनवीडिया के सहयोग से देश में एक बड़े पैमाने की एआई फैक्ट्री स्थापित करने की घोषणा की। इस परियोजना का उद्देश्य एआई-रेडी डेटा सेंटर, उन्नत कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म और भारी एआई वर्कलोड संभालने में सक्षम ढांचा तैयार करना है। इससे भारत की हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग क्षमता को नई मजबूती मिल सकती है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो प्लेटफॉर्म्स : 109.8 अरब डॉलर की दीर्घकालिक योजना

रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसकी डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स ने अगले सात वर्षों में 109.8 अरब डॉलर निवेश का खाका पेश किया। यह पूंजी बड़े डेटा सेंटर, क्लाउड सेवाओं और उन्नत डिजिटल नेटवर्क तैयार करने पर केंद्रित रहेगी। इसे समिट की सबसे बड़ी घोषणाओं में गिना जा रहा है।

योट्टा डेटा सर्विसेज: एशिया-स्तरीय एआई कंप्यूटिंग हब

योट्टा डेटा सर्विसेज ने 2 अरब डॉलर की लागत से एशिया के प्रमुख एआई कंप्यूटिंग केंद्रों में से एक विकसित करने की योजना बताई। इस सुविधा में एनवीडिया के अत्याधुनिक ब्लैकवेल अल्ट्रा चिप्स का उपयोग होगा, जिन्हें बड़े पैमाने के एआई वर्कलोड के लिए डिजाइन किया गया है। यह परियोजना भारत की उन्नत कंप्यूटिंग क्षमताओं को सुदृढ़ करेगी। इन घोषणाओं से स्पष्ट है कि एआई का भविष्य केवल सॉफ्टवेयर या चैटबॉट तक सीमित नहीं है। असली प्रतिस्पर्धा उस बुनियादी ढांचे को तैयार करने की है जो एआई मॉडल्स को शक्ति देता है। भारत तेजी से एआई उपभोक्ता से एआई इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माता की भूमिका में प्रवेश कर रहा है। यदि ये योजनाएं समयबद्ध तरीके से लागू होती हैं, तो आने वाले दशक में भारत वैश्विक अक मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है।


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