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रिश्तों में आई ताजा नरमी को समझने के लिए पिछले कुछ वर्षों की घटनाओं पर नजर डालना जरूरी है। हाल के संकेत बताते हैं कि दोनों देश टकराव की स्थिति से बाहर निकलकर व्यावहारिक सहयोग की ओर बढ़ना चाहते हैं। कनाडा ने पूर्व में भारत पर लगाए गए सभी आरोपों को वापस ले लिया है।

India-Canada Relations : भारत और कनाडा के रिश्तों में आई ताजा नरमी को समझने के लिए पिछले कुछ वर्षों की घटनाओं पर नजर डालना जरूरी है। हाल के संकेत बताते हैं कि दोनों देश टकराव की स्थिति से बाहर निकलकर व्यावहारिक सहयोग की ओर बढ़ना चाहते हैं। कनाडा ने पूर्व में भारत पर लगाए गए सभी आरोपों को वापस ले लिया है। हालांकि यह करते हुए कोर्नी ने अपने वोट बैंक की भी परवाह नहीं की है, यह वर्तमान कनाडा सरकार की साहसिक पहल है।
जून 2023 में कनाडा में खालिस्तानी समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद उस समय के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने कनाडाई संसद में कहा था कि भारतीय एजेंसियों की संभावित संलिप्तता की जांच की जा रही है। भारत ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ा। राजनयिकों की संख्या घटाई गई, वीजा सेवाओं पर असर पड़ा और चल रही व्यापार वातार्एं भी रोक दी गईं। भरोसे की कमी साफ नजर आने लगी।
2026 में स्थिति अलग दिखाई दे रही है। कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कोर्नी की भारत यात्रा से पहले कनाडाई अधिकारियों ने संकेत दिया है कि भारत को वर्तमान में कनाडा में चल रही हिंसक गतिविधियों से जोड़ने के ठोस आधार नहीं हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच संवाद जारी है और पहले जैसी चिंताएं अब सक्रिय रूप में मौजूद नहीं हैं। यह बदलाव दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बर्फ पिघलने का संकेत माना जा रहा है।
कार्नी सरकार इस नए रुख को व्यावहारिक पुनर्संतुलन बता रही है। इसका उद्देश्य पुराने आरोपों की राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर साझा हितों पर ध्यान देना है। अब दोनों देशों के संभावित सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं ऊर्जा और स्वच्छ तकनीक, न्यूक्लियर सेक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाया जाएगा। द्विपक्षीय व्यापार पहले ही अरबों डॉलर के स्तर पर पहुंच चुका है, और आने वाले वर्षों में इसे और बढ़ाने की योजना पर चर्चा हो रही है।
हालांकि माहौल सकारात्मक है, लेकिन सभी पक्ष एकमत नहीं हैं। कनाडा के कुछ सिख संगठनों ने इस बदलाव पर सवाल उठाए हैं। वहीं भारत अपनी सुरक्षा चिंताओं को लेकर स्पष्ट रुख बनाए हुए है। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि दोनों देश खुले टकराव से हटकर संवाद और सहयोग की राह पर चलने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाला समय बताएगा कि यह सुधार स्थायी साझेदारी में बदलता है या केवल कूटनीतिक संतुलन तक सीमित रहता है।
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