भारत और जापान के संयुक्त बयान में 'पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद' का उल्लेख किए जाने पर पाकिस्तान की आपत्ति को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है।

India-Japan Joint Statement : भारत और जापान के संयुक्त बयान में 'पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद' का उल्लेख किए जाने पर पाकिस्तान की आपत्ति को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और जापान का संयुक्त बयान अपने आप में पूरी तरह स्पष्ट है और पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को अपनी राज्य नीति के एक साधन के रूप में इस्तेमाल करता रहा है।
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2 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की थी। बयान में पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद का उल्लेख करते हुए पहलगाम आतंकी हमले और अन्य आतंकी घटनाओं की निंदा की गई। साथ ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों और उनके सहयोगी नेटवर्क के खिलाफ वैश्विक स्तर पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
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पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने दावा किया कि उसने राजनयिक माध्यमों से जापान के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया है। पाकिस्तान का कहना है कि इस तरह के बयान उसके आतंकवाद विरोधी प्रयासों और बलिदानों की अनदेखी करते हैं। साथ ही उसने आरोप लगाया कि भारत अपने द्विपक्षीय संयुक्त बयानों में पाकिस्तान से जुड़े ऐसे संदर्भ शामिल करवाने का प्रयास करता है।
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मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और जापान का संयुक्त बयान स्वयं स्पष्ट है और इसमें दोनों देशों के साझा दृष्टिकोण को दर्शाया गया है। उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया पाकिस्तान की भूमिका से भली-भांति परिचित है और भारत का रुख लंबे समय से स्पष्ट रहा है।
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विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान द्वारा भारत के आंतरिक मामलों पर की गई टिप्पणियों को भी खारिज किया। प्रवक्ता ने कहा कि भारत के आंतरिक मामलों में टिप्पणी करने का पाकिस्तान को कोई अधिकार नहीं है और ऐसे बयान पूरी तरह अस्वीकार्य हैं।
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