भारत को मिला खुफिया खजाना, ठंडे बस्ते में गई चीन की बादशाहत
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 02:21 AM
भारत के भूगर्भीय मानचित्र पर एक बड़ी कामयाबी दर्ज हुई है। देश को 7.23 मिलियन टन रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) का भंडार मिला है जिसने खनिज संसाधनों की दौड़ में भारत को वैश्विक मंच पर मजबूत दावेदार बना दिया है। ऊर्जा राजधानी कहलाने वाले मध्य प्रदेश के सिंगरौली कोलफील्ड्स से यह दुर्लभ खजाना मिला है, जिसकी आधिकारिक जानकारी संसद में कोयला एवं खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी ने दी। यह खोज उस वक्त सामने आई है जब चीन ने REE के निर्यात पर सख्ती दिखाते हुए भारत समेत कई देशों की सप्लाई चेन को झटका देने की कोशिश की। लेकिन अब भारत के हाथ लगा यह खजाना ड्रैगन की दादागिरी को चुनौती देने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। Rare Earth Elements
क्या हैं रेयर अर्थ एलिमेंट्स और क्यों हैं अहम?
रेयर अर्थ एलिमेंट्स वे 17 खनिज हैं, जो स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन, फाइटर जेट, सैटेलाइट, विंड टरबाइन और ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स में अनिवार्य भूमिका निभाते हैं। इनमें नियोडिमियम, समैरियम, येट्रियम, लैंथेनम, गैडोलीनियम आदि शामिल हैं। हालांकि, ये पृथ्वी में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, लेकिन इन्हें खनिजों से निकालने की प्रक्रिया बेहद जटिल और ऊर्जा-सघन होती है, यही वजह है कि इन्हें रेयर कहा जाता है।
चीन की मोनोपॉली पर भारत की चुनौती
वर्तमान में चीन आरईई रिफाइनिंग और सप्लाई का लगभग 90% नियंत्रण करता है। वह समय-समय पर भू-राजनीतिक दबाव बनाने के लिए इसकी सप्लाई रोकता रहा है। हाल में उसने निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर भारत की कई टेक इंडस्ट्रीज को निशाना बनाया। लेकिन अब भारत के पास खुद का स्रोत होने से यह दबाव काफी हद तक खत्म हो सकता है।
भारत में कहां-कहां मिले हैं भंडार?
भारत में आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में REE के भंडारों की पुष्टि हो चुकी है। लेकिन सबसे बड़ी उपलब्धि सिंगरौली कोलफील्ड्स में मिली है, जहां कोयला और नॉन-कोल सैंपल्स में उच्च मात्रा में ये तत्व पाए गए हैं।
क्या बदलेगा भारत का भविष्य?
विशेषज्ञों की मानें तो यह खोज भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस, स्पेस और ग्रीन एनर्जी क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बना सकती है। यह सिर्फ एक खनिज संसाधन नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक शक्ति है। आने वाले समय में भारत न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर सकेगा, बल्कि दुनिया को भी इन संसाधनों की आपूर्ति कर सकेगा। भारत की धरती से निकला यह दुर्लभ खजाना सिर्फ एक आर्थिक संभावना नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक संतुलन में बड़ा बदलाव ला सकता है। यदि सरकार और उद्योग जगत इस संसाधन का सुव्यवस्थित दोहन करते हैं, तो चीन की वर्षों पुरानी पकड़ अब ढीली पड़ना तय है। Rare Earth Elements