दो महाशक्तियों की लड़ाई में फंसा भारत, न झुकने की जिद, न हटने का इरादा
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 04:55 AM
भारत आज एक ऐसी कूटनीतिक लड़ाई के बीच खड़ा है जिसमें उसके दोनों बड़े साझेदार आमने-सामने हैं। एक तरफ है अमेरिका और दूसरी तरफ रूस। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) चाहते हैं कि भारत रूस (Russia) के बजाय अमेरिका (America) के साथ व्यापार और रक्षा सौदों को प्राथमिकता दे। ट्रंप लगातार टैरिफ (Tarrif) को लेकर भारत पर दबाव बना रहे हैं। धमकियां दी जा रही हैं लेकिन भारत ने अभी तक किसी भी दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया है। उसने साफ कर दिया है कि वो फैसले अपनी शर्तों पर और राष्ट्रहित में ही लेगा। Tarrif War
भारत और रूस के रिश्ते ट्रंप को नहीं आ रहे राज
ट्रंप का गुस्सा इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि भारत-रूस के पुराने और मजबूत रिश्ते उन्हें रास नहीं आ रहे। ट्रंप की मंशा है कि भारत अमेरिकी हथियार खरीदे, अमेरिका से ऊर्जा आयात करे और कृषि-डेयरी क्षेत्र को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोले। लेकिन भारत, रूस के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को दरकिनार करने के मूड में नहीं है। यही बात ट्रंप को खटक रही है। वो चाहते हैं कि भारत पाकिस्तान या चीन की तरह उनके इशारे पर चले मगर भारत ने अब तक सधा हुआ लेकिन सख्त रुख दिखाया है।
भारत-अमेरिका को दिखा रहा है आईना
भारत इस पूरे मामले में न सिर्फ संयम बरत रहा है बल्कि अमेरिका को उसकी दोहरी नीति का आईना भी दिखा रहा है। जब ट्रंप भारत से रूस के साथ डिफेंस डील न करने की बात करते हैं, तब भारत यही सवाल उनसे पूछता है “आप भी तो रूस से व्यापार कर रहे हैं फिर हमें क्यों रोक रहे हैं?” हाल ही में जब एक विदेशी पत्रकार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यही सवाल ट्रंप से किया तो उनका जवाब था, “मुझे नहीं पता देखकर बताऊंगा।” यानी अमेरिका खुद क्या कर रहा है ट्रंप को खुद जानकारी नहीं।
क्या चाहते हैं ट्रंप
अब सवाल है पीछे कौन हटेगा? भारत अब तक जिस तरीके से टैरिफ के मुद्दे पर अड़ा रहा है उससे लगता नहीं कि वह जल्द ही झुकने वाला है। ट्रंप की धमकियों का जवाब भारत कूटनीतिक और शांत ढंग से दे रहा है। जबकि ट्रंप चाहते हैं कि भारत वैसा ही करे जैसा चीन ने किया उनकी शर्तें मान ले लेकिन भारत, न चीन है और न पाकिस्तान। यहां फैसला संसद, संविधान और जनता के हक में होता है न कि किसी एक आदमी की डील से।
इस बात पर विपक्ष उठा सकता है बड़ा सवाल
अगर भारत अमेरिका के आगे झुकता है तो विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का एक और मौका मिल जाएगा। पहले ही पाकिस्तान के साथ सीजफायर समझौते को लेकर संसद में सरकार को घेरा जा चुका है। अब अगर टैरिफ या डिफेंस डील पर अमेरिका की शर्तें मानी जाती हैं तो विपक्ष इसे ‘सरकार की कमजोरी’ बताने में देर नहीं करेगा।
भारत के पास नहीं है विकल्पों की कमी
भारत के पास आज विकल्पों की कमी नहीं है। दुनिया का सबसे बड़ा बाजार होने के नाते हर देश भारत के साथ व्यापार करना चाहता है। भारत की आबादी उसकी सबसे बड़ी ताकत है और वो इसका इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर कर रहा है। जब ट्रंप भारत की अर्थव्यवस्था को "Dead Economy" बताते हैं, तो यही भारत उनके लिए सबसे बड़ा ग्राहक भी बन जाता है। ये विरोधाभास ट्रंप की रणनीति का हिस्सा है पहले धमकाओ फिर सौदा करो।
ट्रंप एक व्यापारी राष्ट्रपति हैं। उनके लिए राजनीति भी एक तरह की सौदेबाजी है। वे चीन, पाकिस्तान और यूरोपीय देशों के साथ यही तरीका अपना चुके हैं और अब वही भारत पर आजमा रहे हैं। लेकिन भारत अब परिपक्व और आत्मनिर्भर होने की ओर बढ़ रहा है। भारत न तो घबराने वाला है और न ही झुकने वाला। इस समय भारत को धैर्य और संतुलन से चलना होगा। जवाबी कार्रवाई का समय अभी नहीं है, लेकिन कमजोरी दिखाने का भी नहीं। यह सिर्फ एक टैरिफ वॉर नहीं है यह भारत की रणनीतिक सोच, अंतरराष्ट्रीय संबंधों की समझ और स्वाभिमान की असली परीक्षा है।