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Gilgit-Baltistan; विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (5 जून) को कहा कि यह इलाका भारतीय क्षेत्र है, जिस पर पाकिस्तान द्वारा ‘‘अवैध रूप से और जबरन’’ कब्जा किया गया है।

Gilgit-Baltistan; पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून को विधानसभा चुनाव होना है। भारत ने इसका कड़ा विरोध किया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (5 जून) को कहा कि यह इलाका भारतीय क्षेत्र है, जिस पर (पाकिस्तान द्वारा ) ‘‘अवैध रूप से और जबरन’’ कब्जा किया गया है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। इसलिए पाकिस्तान को उन क्षेत्रों में किसी भी तरह की राजनीतिक प्रक्रिया चलाने का कोई अधिकार नहीं है। चुनाव कराने जैसी गतिविधियां वहां की जमीनी हकीकत को नहीं बदल सकतीं।
24 सीटों पर डाले जाएंगे वोट
गिलगित-बाल्टिस्तान में रविवार को 10 जिलों की 24 सीटों पर मतदान कराया जाएगा। यह भारत के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का हिस्सा है। हालांकि, यह पाकिस्तान के कब्जे में है।
गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा में कुल 33 सीटें हैं, जिनमें 24 सामान्य सीटें, 6 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित और 3 सीटें टेक्नोक्रेट्स और प्रोफेशनल्स के लिए आरक्षित हैं।
गिलगित-बाल्टिस्तान में इससे पहले यहां नवंबर 2020 में चुनाव हुए थे, जिनमें पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने जीत हासिल की थी।
विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। 2020 में चुनी गई विधानसभा ने नवंबर 2025 में अपना कार्यकाल पूरा कर लिया था। नियमों के मुताबिक इसके बाद नए चुनाव कराए जाने थे, लेकिन खराब मौसम और प्रशासनिक कारणों से मतदान समय पर नहीं हो सका। क्षेत्र में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी होती है। इसी वजह से चुनाव को टाल दिया गया और बाद में 7 जून 2026 की तारीख तय की गई।
गिलगित-बाल्टिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था
गिलगित-बाल्टिस्तान पर 1947 से लेकर कई दशकों तक पाकिस्तान ने सीधे संघीय सरकार के जरिए शासन किया। इसे न तो प्रांत का दर्जा दिया गया और न ही पाकिस्तान की संसद में पूरा प्रतिनिधित्व मिला।
2009 में हालात बदले पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान एम्पावरमेंट एंड सेल्फ-गवर्नेंस ऑर्डर लागू किया। इसके तहत पहली बार यहां विधानसभा चुनाव हुए और एक स्थानीय सरकार बनाई गई। हालांकि तब भी विधानसभा के अधिकार सीमित थे।
इसके बाद 2018 में पाकिस्तान ने 'गिलगित-बाल्टिस्तान ऑर्डर 2018' लागू किया। इसमें स्थानीय विधानसभा और मुख्यमंत्री को कई शक्तियां दी गईं।
PoK में चुनाव
गिलगित-बाल्टिस्तान के बाद 27 जुलाई को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव होंगे। PoK की विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें से 45 सीटों पर सीधे चुनाव होता है, जबकि 8 सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं। PoK में महंगाई, बिजली दरों और आटे की कीमतों को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन भी हुए। 2024 में कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए थे, जिसके बाद पाकिस्तान की संघीय सरकार को सब्सिडी और आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा करनी पड़ी।
Pok की राजनीतिक स्थिति गिलगित-बालिटिस्तान से अलग थी। इसे कुछ स्वायत्तता हासिल थी हालांकि वास्तविक शक्ति काफी हद तक इस्लामाबाद के पास रहती है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सीटें
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 24 सीटें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान के लिए आरक्षित हैं। इन सीटों पर चुनाव नहीं होते क्योंकि ये क्षेत्र फिलहाल पाकिस्तान के नियंत्रण में हैं। इसलिए इन्हें खाली रखा जाता है।
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