UNGA में भारत ने युवाओं के अधिकारों पर रिपोर्ट के दावों को खारिज किया। अनुज स्वरूप ने राजनीतिक भागीदारी, पेपर लीक पर कार्रवाई और लोकतांत्रिक संवाद का जिक्र किया।

International News : संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की तीसरी समिति के 81वें सत्र में भारत ने युवाओं के अधिकारों और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात मजबूती से रखी। भारत की ओर से फर्स्ट सेक्रेटरी अनुज स्वरूप ने शांतिपूर्ण सभा करने और संगठन बनाने की स्वतंत्रता से जुड़े विशेष प्रतिवेदक (Special Rapporteur) के साथ संवाद के दौरान भारत का पक्ष प्रस्तुत किया। अनुज स्वरूप ने उस रिपोर्ट में किए गए दावों पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया था कि भारत में युवा मानसिक स्वास्थ्य और लैंगिक न्याय जैसे मुद्दों पर चर्चा करने के कारण प्रतिशोध या सामाजिक कलंक का सामना करते हैं। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इन आरोपों को अनाम और अप्रमाणित दावों पर आधारित बताते हुए खारिज कर दिया।
अनुज स्वरूप ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देश के युवाओं पर आरोप लगाते समय केवल गुमनाम और अप्रमाणित दावों को सबूत नहीं माना जा सकता। उन्होंने रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी बातें प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं हैं, बल्कि सुनी-सुनाई बातों को संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के रूप में पेश करने जैसी हैं। भारत ने स्पष्ट किया कि वह रिपोर्ट में लगाए गए इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करता है। भारतीय प्रतिनिधि ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में युवाओं की भूमिका और लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी भागीदारी को नजरअंदाज करके देश की स्थिति का आकलन नहीं किया जाना चाहिए। International News
अपने संबोधन में अनुज स्वरूप ने रिपोर्ट में ही भारत के युवाओं द्वारा एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन शुरू किए जाने के उल्लेख की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने सवाल किया कि यदि कोई देश दमनकारी व्यवस्था वाला हो, तो क्या वहां युवा राजनीतिक दल सरकार पर सवाल उठा सकता है, राजधानी तक मार्च कर सकता है और फिर वरिष्ठ राष्ट्रीय नेताओं के साथ बातचीत की मेज पर बैठ सकता है? उन्होंने इस उदाहरण के जरिए भारत में युवाओं की राजनीतिक भागीदारी और लोकतांत्रिक गतिविधियों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, युवाओं का सवाल उठाना, विरोध करना और सरकार के साथ संवाद करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। International News
भारत की ओर से अपने पक्ष में सार्वजनिक परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ युवाओं के विरोध और सरकार की प्रतिक्रिया का भी उल्लेख किया गया। अनुज स्वरूप ने कहा कि इस गर्मी में सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर विद्यार्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया था और सरकार ने उनके साथ रचनात्मक संवाद किया। उन्होंने बताया कि इसके बाद कुछ ही सप्ताह में संसद ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम में संशोधन किया। उनके अनुसार, इस संशोधन के तहत पेपर लीक के मामलों में सजा दोगुनी की गई, परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए गए और परीक्षा संबंधी धोखाधड़ी के आरोपियों पर मुकदमा चलाने के लिए हर राज्य में फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित की गईं। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इन कदमों को लोकतंत्र के व्यवहारिक रूप का उदाहरण बताया। International News
अपने संबोधन के समापन में अनुज स्वरूप ने कहा कि युवा भारत की ताकत और साझा भविष्य हैं। उन्होंने युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते समय तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर निष्कर्ष निकालने की आवश्यकता पर जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारत का यह वक्तव्य युवाओं की स्वतंत्रता, राजनीतिक भागीदारी, परीक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक संवाद को लेकर देश का आधिकारिक पक्ष प्रस्तुत करता है। इस बयान का वीडियो न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के आधिकारिक X अकाउंट से साझा किया गया।
अनुज स्वरूप 2016 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और विदेश सेवा में आने से पहले करीब पांच साल तक NTPC में काम किया। वह अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास में थर्ड सेक्रेटरी के पद पर भी रह चुके हैं। वर्ष 2022 में उन्हें विदेश मंत्रालय के G20 सचिवालय में अंडर सेक्रेटरी नियुक्त किया गया था। वर्तमान में वह संयुक्त राष्ट्र से जुड़े मंचों पर भारत का पक्ष रखते हुए नजर आ रहे हैं।
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