दलाई लामा को ग्रैमी अवॉर्ड मिलने से चीन बिलबिलाया

दलाई लामा का यह एल्बम संगीत से ज्यादा विचारों और भावनाओं पर केंद्रित है। इसमें उन्होंने जीवन, अहिंसा, मानसिक शांति और मानव मूल्यों पर अपने विचार साझा किए हैं। ग्रैमी जूरी ने इसे वैश्विक स्तर पर प्रेरणादायक और समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला बताया।

lama
तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar02 Feb 2026 07:02 PM
bookmark

Grammy-Award : तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा को उनके स्पोकन-वर्ड एल्बम के लिए 68वें ग्रैमी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। यह अवॉर्ड ध्यान, करुणा और मानवता के संदेशों पर आधारित उनकी रचनाओं के लिए दिया गया। इस उपलब्धि को दुनिया भर में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।

स्पोकन-वर्ड एल्बम के जरिए शांति और करुणा का संदेश

दलाई लामा का यह एल्बम संगीत से ज्यादा विचारों और भावनाओं पर केंद्रित है। इसमें उन्होंने जीवन, अहिंसा, मानसिक शांति और मानव मूल्यों पर अपने विचार साझा किए हैं। ग्रैमी जूरी ने इसे वैश्विक स्तर पर प्रेरणादायक और समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला बताया।

ग्रैमी अवॉर्ड पर चीन की तीखी प्रतिक्रिया

दलाई लामा को ग्रैमी अवॉर्ड मिलने के बाद चीन ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। बीजिंग ने आरोप लगाया कि दलाई लामा धर्म की आड़ में राजनीतिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। चीन का कहना है कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मान तिब्बत से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश हैं।

धर्म की आड़ में राजनीति का आरोप क्यों लगाया चीन ने?

चीन लंबे समय से दलाई लामा को अलगाववादी नेता मानता रहा है। ग्रैमी अवॉर्ड को लेकर भी चीन ने यही दोहराया कि यह सम्मान धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है। चीन के अनुसार, ऐसे कदम उसकी संप्रभुता और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के समान हैं।

वैश्विक मंच पर दलाई लामा की लोकप्रियता बरकरार

चीन के विरोध के बावजूद दलाई लामा को दुनिया भर में व्यापक सम्मान मिलता रहा है। मानवाधिकार, शांति और संवाद के प्रतीक के रूप में उनकी छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत है। ग्रैमी अवॉर्ड को भी उनके वैश्विक प्रभाव और विचारों की स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है। ग्रैमी अवॉर्ड मिलने के बाद दलाई लामा ने इसे व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि करुणा और शांति के विचारों की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन मूल्यों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी देता है, जिन पर मानवता टिकी है। इस अवॉर्ड के बाद तिब्बत और चीन के संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा तेज हो गई है। जहां एक ओर चीन नाराज है, वहीं दूसरी ओर कई देश और संगठन इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आध्यात्मिक विचारों की जीत मान रहे हैं।


संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

बालाघाट के प्रसन्नजीत पाकिस्तान की जेल से 7 साल बाद रिहा, बहन की मेहनत रंग लाई

प्रसन्नजीत रंगारी आखिरकार पाकिस्तान की जेल से रिहा हो गए। पिछले 7 साल से वे पाकिस्तान में सुनील अदे के नाम से बंद थे। उनकी बहन संघमित्रा पिछले पांच साल से लगातार उनके घर वापसी के लिए प्रयासरत थीं। संघमित्रा के अनथक प्रयासों के कारण ही आखिरकार प्रसन्नजीत पाकिस्तान जेल से छूटकर भारत लौट सके।

pak jail
प्रसन्नजीत और उनकी बहन संघमित्रा
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar02 Feb 2026 05:29 PM
bookmark

Pakistani Prison : बालाघाट के प्रसन्नजीत रंगारी आखिरकार पाकिस्तान की जेल से रिहा हो गए। पिछले 7 साल से वे पाकिस्तान में सुनील अदे के नाम से बंद थे। उनकी बहन संघमित्रा पिछले पांच साल से लगातार उनके घर वापसी के लिए प्रयासरत थीं। संघमित्रा के अनथक प्रयासों के कारण ही आखिरकार प्रसन्नजीत पाकिस्तान जेल से छूटकर भारत लौट सके। भले ही उन्हें 7 सालों तक पाकिस्तानी जेल की यातनाएं सहनी पड़ी लेकिन आखिर उन्हें अपने देश की मिट्टी नसीब हो ही गई।

कई सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए और नेताओं से मांगी मदद

संघमित्रा ने कई सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगाया और कई नेताओं से मदद मांगी। साल 2021 में उन्होंने प्रसन्नजीत के लिए एक पत्र लिखा, जिसे लोकल 18 ने प्रकाशित किया और यह खबर धीरे-धीरे राष्ट्रीय मीडिया में भी सुर्खियों में आ गई। यह प्रसन्नजीत की बहन संघमित्रा के द्वारा लिखा गया पत्र ही था जिसने इस घटना को उजागर किया और राष्टÑीय मीडिया की सुर्खियों में आ जाने का कारण बनी। और अंत में पाकिस्तान की जेल से उसके भाई प्रसन्नजीत की रिहाई हो सकी।

प्रसन्नजीत को अमृतसर जाकर लाने की हो रही है तैयारी 

31 जनवरी को पाकिस्तान ने सात भारतीय नागरिकों को रिहा किया, जिनमें से छह पंजाब के थे और एक बालाघाट का प्रसन्नजीत। उनके रिहाई की खबर मिलने पर संघमित्रा बेहद खुश हुईं। 1 फरवरी को उन्हें खैरलांजी पुलिस स्टेशन से रिहाई की जानकारी मिली। फोन पर भाई की आवाज सुनते ही संघमित्रा भावुक हो गईं, हालांकि भाई ने उनकी आवाज तुरंत पहचानी। संघमित्रा को यह दुख है कि उनके पिता के जिंदा रहते वह भाई को घर नहीं ला सके। अब प्रसन्नजीत जल्द ही बालाघाट लौटेंगे, प्रसन्नजीत को उनके जीजा राजेश अमृतसर जाकर उन्हें लाने की तैयारी कर रहे हैं।

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

विजन 2030 के जरिए सऊदी अरब कैसे बदल रहा है?

लेकिन बदलती दुनिया ने सऊदी नेतृत्व के सामने एक कड़ा सच रख दिया तेल की कीमतों का अनिश्चित उतार-चढ़ाव, ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर बढ़ता वैश्विक रुझान और जलवायु संकट की चुनौतियां यह बताने लगीं कि सिर्फ पेट्रोलियम पर टिका मॉडल लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रह सकता।

सऊदी अरब Vision 2030
सऊदी अरब Vision 2030
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar30 Jan 2026 02:37 PM
bookmark

Saudi Arabia : दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में शुमार सऊदी अरब आज अपनी पहचान को नए सिरे से गढ़ने की ऐतिहासिक यात्रा पर है। दशकों तक कच्चे तेल से मिलने वाली कमाई ही उसकी अर्थव्यवस्था का आधार रही सरकारी राजस्व, कल्याणकारी योजनाएं, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और वैश्विक प्रभाव, सब कुछ उसी तेल-आय के इर्द-गिर्द घूमता रहा। लेकिन बदलती दुनिया ने सऊदी नेतृत्व के सामने एक कड़ा सच रख दिया तेल की कीमतों का अनिश्चित उतार-चढ़ाव, ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर बढ़ता वैश्विक रुझान और जलवायु संकट की चुनौतियां यह बताने लगीं कि सिर्फ पेट्रोलियम पर टिका मॉडल लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रह सकता। इसी सोच के चलते सऊदी अरब अब ऑयल-इकोनॉमी से बाहर निकलकर डिजिटल, टेक्नोलॉजी-आधारित और विविध (डायवर्सिफाइड) इकॉनमी की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। लक्ष्य सिर्फ कमाई के नए स्रोत बनाना नहीं, बल्कि ऐसी अर्थव्यवस्था तैयार करना है जो निवेश, नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और आधुनिक सेवाओं के सहारे टिकाऊ विकास दे सके।

तेल पर निर्भरता और उसकी सीमाएं

बीसवीं सदी में तेल ने सऊदी अरब को वैश्विक ताकत बनाया। सरकारी राजस्व का बड़ा हिस्सा, सामाजिक कल्याण योजनाएं और बुनियादी ढांचा—सब कुछ तेल आय से संचालित होता रहा। लेकिन समय के साथ वैश्विक परिदृश्य बदला। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, जलवायु संकट और वैकल्पिक ऊर्जा की ओर बढ़ती दुनिया ने यह साफ कर दिया कि तेल आधारित मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है।

Vision 2030: बदलाव की आधिकारिक शुरुआत

साल 2016 में सामने आया ‘विजन 2030’ आज सऊदी अरब की नई आर्थिक दिशा का सबसे बड़ा आधार माना जाता है। इस रोडमैप के जरिए सरकार ने तीन साफ लक्ष्य तय किए तेल पर निर्भरता घटाना, निजी व विदेशी निवेश को तेज करना, और टेक्नोलॉजी, डिजिटल सेवाओं व नवाचार को विकास की धुरी बनाना। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अगुवाई में यह विजन अब कागज़ी घोषणा भर नहीं रहा, बल्कि नीतियों से निकलकर जमीनी बदलाव की शक्ल लेने लगा है।

डिजिटल गवर्नेंस और टेक्नोलॉजी पर फोकस

सऊदी अरब ने सबसे पहले सरकारी ढांचे को डिजिटल करने पर जोर दिया। आज सरकारी सेवाएं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं चाहे वह नागरिक सेवाएं हों, बिजनेस रजिस्ट्रेशन या डिजिटल भुगतान। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यक्षमता दोनों में सुधार हुआ है। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। सऊदी अरब अब टेक्नोलॉजी अपनाने वाला ही नहीं, बल्कि उसे विकसित करने वाला देश बनने की दिशा में है।

NEOM: डिजिटल भविष्य का प्रतीक

डिजिटल इकॉनमी की सबसे बड़ी पहचान बनकर उभरा है NEOM प्रोजेक्ट। यह एक हाई-टेक स्मार्ट सिटी है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और ग्रीन एनर्जी के जरिए भविष्य की जीवनशैली को आकार दिया जा रहा है। The Line, Oxagon और Trojena जैसे प्रोजेक्ट्स यह संकेत देते हैं कि सऊदी अरब शहरी विकास को भी टेक्नोलॉजी और डेटा के आधार पर दोबारा परिभाषित कर रहा है।

स्टार्टअप और युवाओं की नई भूमिका

डिजिटल इकॉनमी को गति देने में सऊदी युवाओं की भूमिका अहम मानी जा रही है। सरकार स्टार्टअप्स, फिनटेक, ई-कॉमर्स और इनोवेशन हब को बढ़ावा दे रही है। सरकारी फंडिंग, नीतिगत सुधार और विदेशी निवेश ने नए उद्यमों के लिए रास्ते खोले हैं। यह बदलाव उस मानसिकता से अलग है, जहां सरकारी नौकरी ही सबसे सुरक्षित विकल्प मानी जाती थी।

चुनौतियां अभी भी बरकरार

हालांकि यह बदलाव महत्वाकांक्षी है, लेकिन चुनौतियां कम नहीं हैं। तकनीकी दक्ष मानव संसाधन, सामाजिक बदलावों को स्वीकार करना और मेगा प्रोजेक्ट्स का ज़मीनी लाभ आम लोगों तक पहुंचाना ये सभी बड़ी परीक्षा हैं विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिजिटल विकास रोजगार और सामाजिक समानता से नहीं जुड़ा, तो यह बदलाव सीमित दायरे में सिमट सकता है। Saudi Arabia

संबंधित खबरें