
भारत-अमेरिका ट्रेड डील एक बार फिर सुर्खियों में है। ट्रंप के 25% टैरिफ के झटके के बाद बातचीत थमी थी, लेकिन अब दिल्ली में पहुंचे ब्रेंडन लिंच इस ‘डील ऑफ द डिकेड’ को पटरी पर लाने की कोशिश करेंगे। आखिर कौन हैं ये सुपर वार्ताकार, जिनके कंधों पर 15 देशों की ट्रेड पॉलिसी का जिम्मा है? सोमवार देर रात अमेरिका के स्टार वार्ताकार ब्रेंडन लिंच भारत पहुंच गए, और अब उनका मिशन साफ है — उलझे हुए मुद्दों की गांठ खोलना और दोनों देशों के बीच व्यापार को फिर से पटरी पर लाना। Brendan Lynch
भारत और अमेरिका के बीच पांच दौर की ट्रेड चर्चाएं पूरी हो चुकी थीं, लेकिन छठे दौर से पहले ही अमेरिका ने रूस से तेल आयात को लेकर अचानक “टैरिफ का झटका” दे दिया। 25% का टैरिफ बढ़ाकर 50% कर दिया गया, और अगस्त के आखिर में प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) जैसे ही ठंडे बस्ते में चला गया। अब पहली बार दोनों देश आमने-सामने बैठकर इस उलझी हुई डील को पटरी पर लाने की कोशिश करेंगे। भारत की ओर से विशेष सचिव (वाणिज्य) राजेश अग्रवाल ने साफ कर दिया है कि बैठक में सिर्फ व्यापारिक मसलों पर ध्यान जाएगा और भू-राजनीति की बातें इससे बाहर रहेंगी।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को पटरी पर लाने और उलझे हुए मुद्दों को सुलझाने के लिए अमेरिका के स्टार वार्ताकार ब्रेंडन लिंच सोमवार देर रात दिल्ली पहुंचे। बैठक के दौरान वे पूरी अमेरिकी टीम का नेतृत्व करेंगे। लिंच की पढ़ाई बोस्टन कॉलेज से हुई और इसके बाद उन्होंने जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से MBA की डिग्री हासिल की। आर्थिक मामलों में उनकी पकड़ इतनी मजबूत है कि उन्हें क्षेत्रीय ट्रेड नीतियों के विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है। 2013 में ब्रेंडन लिंच अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) के कृषि विभाग से जुड़े और तब से उन्होंने न केवल साउथ और मिडिल एशिया, बल्कि इजराइल, मैक्सिको, कनाडा और रूस के साथ कई अहम समझौतों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज वे अमेरिका के सहायक व्यापार प्रतिनिधि हैं और उनके कंधों पर 15 देशों के लिए यूएस ट्रेड पॉलिसी की निगरानी का भारी जिम्मा है। इसके अलावा, वे भारत-अमेरिका ट्रेड पॉलिसी फोरम के संचालन के लिए भी जिम्मेदार हैं। संक्षेप में कहें तो, ब्रेंडन लिंच उस “सुपर वार्ताकार” की भूमिका निभा रहे हैं, जो जटिल आर्थिक गांठों को हल कर दोनों देशों के बीच व्यापार को फिर से रफ्तार दे सकते हैं।
उन्होंने बोस्टन कॉलेज से स्नातक और जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से MBA किया।
2013 में वे अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के कृषि विभाग से जुड़े।
यहां उन्होंने साउथ और मिडिल एशिया के साथ-साथ इज़राइल, मैक्सिको, कनाडा और रूस के साथ समझौतों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आर्थिक मामलों और विशेष रूप से कृषि व्यापार में उनकी विशेषज्ञता को अमेरिकी प्रशासन में खास महत्व दिया जाता है।
इस बैठक से उम्मीदें इसलिए भी बढ़ी हैं क्योंकि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पीएम मोदी को अपना “बहुत अच्छा दोस्त” बताते हुए साफ संकेत दिया कि वह ट्रेड डील को आगे बढ़ाना चाहते हैं। मोदी ने भी इस दोस्ताना संदेश का तुरंत सकारात्मक जवाब दिया। टैरिफ के इस झगड़े का असर भारत-अमेरिका व्यापार पर भी साफ देखा गया—जहां जुलाई 2025 में भारत का निर्यात 8.01 अरब डॉलर था, वहीं अगस्त में यह घटकर 6.86 अरब डॉलर रह गया। वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल का कहना है कि मंगलवार की यह बैठक दोनों देशों की सकारात्मक सोच और व्यापारिक रिश्तों को फिर से जीवंत करने की कोशिश का प्रतीक है। Brendan Lynch