अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले भारतीय मूल के मतदाताओं को लेकर अमेरिकी राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भारतीय समुदाय तक पहुंच बनाने के लिए डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दलों के नेता अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं।

अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले भारतीय समुदाय पर अमेरिकी नेताओं की नजरें टिक गई हैं। कोई भारतीय रेस्टोरेंट में डोसा बनाकर लोगों का दिल जीतने की कोशिश कर रहा है तो कोई मंदिरों में पहुंचकर धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भाग ले रहा है। दीपावली समारोह से लेकर सामुदायिक कार्यक्रमों तक नेताओं की सक्रियता बता रही है कि अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के मतदाताओं की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती जा रही है।
International News : अमेरिका में चुनावी राजनीति का एक दिलचस्प नजारा इन दिनों देखने को मिल रहा है। दुनिया की सबसे ताकतवर राजनीतिक व्यवस्था माने जाने वाले अमेरिका में चुनाव जीतने के लिए अब केवल बड़ी-बड़ी रैलियां, भाषण और राजनीतिक वादे ही काफी नहीं रह गए हैं। उम्मीदवार मतदाताओं के घरों, समुदायों, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक आयोजनों तक पहुंच रहे हैं। इस बार अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में भारतीय मूल के मतदाता विशेष रूप से चर्चा में हैं।
अमेरिकी नेताओं के बीच भारतीय समुदाय को अपने साथ जोड़ने की कोशिशें इस कदर बढ़ी हैं कि कोई भारतीय रेस्टोरेंट में जाकर डोसा बनाने की कला सीख रहा है तो कोई हिंदू मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होकर भारतीय संस्कृति को समझने का संदेश दे रहा है। दीपावली के आयोजनों में नेताओं की मौजूदगी भी इसी चुनावी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। यह केवल भारतीय खानपान या धार्मिक आयोजनों तक सीमित मामला नहीं है। इसके पीछे अमेरिका की चुनावी गणित, भारतीय-अमेरिकी समुदाय की बढ़ती सामाजिक-आर्थिक ताकत और बदलते राजनीतिक समीकरण भी महत्वपूर्ण हैं। International News
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इस चुनावी हलचल का सबसे दिलचस्प उदाहरण टेक्सास के डलास महानगर क्षेत्र के इरविंग में देखने को मिला। यहां डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जेम्स टालारिको एक भारतीय रेस्टोरेंट में पहुंचे और उन्होंने खुद डोसा बनाने की कोशिश की। काले रंग का सूट और सफेद शर्ट पहने टालारिको ने डोसे का घोल गर्म तवे पर फैलाया। इसके बाद उसमें मसालेदार आलू की भराई की और तैयार डोसे को केले के पत्ते पर परोसा। वहां मौजूद लोगों ने उनकी इस कोशिश का स्वागत किया। भारतीय खानपान से जुड़ा यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। चुनाव प्रचार के दौरान किसी अमेरिकी नेता का इस तरह भारतीय भोजन बनाने की कोशिश करना केवल एक मनोरंजक दृश्य नहीं था, बल्कि भारतीय समुदाय के साथ जुड़ने का एक सार्वजनिक संदेश भी था। टेक्सास में टालारिको रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन के खिलाफ अमेरिकी सीनेट का चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में भारतीय-अमेरिकी आबादी वाले क्षेत्र में उनकी यह मौजूदगी राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। International News
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भारतीय समुदाय तक पहुंचने के लिए अमेरिकी नेताओं ने केवल रेस्टोरेंट और खानपान का सहारा नहीं लिया है। हिंदू मंदिर और भारतीय सांस्कृतिक आयोजन भी उनके चुनावी संपर्क अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। कनेक्टिकट के गवर्नर नेड लैमोंट, जो एक और कार्यकाल के लिए चुनाव मैदान में हैं, स्टेट कैपिटल में आयोजित दीपावली समारोह में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में उनके साथ डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जेनिफर बाराहोना भी मौजूद रहीं। ओहायो के सांसद ग्रेग लैंड्समैन शेरॉनविल स्थित बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर में आयोजित 11वें पाटोत्सव समारोह में शामिल हुए। यह कार्यक्रम मंदिर की प्रतिष्ठा के वर्षगांठ समारोह से जुड़ा था। न्यू जर्सी के सीनेटर कोरी बुकर भी अक्षरधाम मंदिर में आयोजित दीपावली समारोह में पहुंचे। इसी तरह पेंसिल्वेनिया के हैरिसबर्ग में सांसद रैंडी फाइन और स्कॉट पेरी मंदिर पहुंचे। मिशिगन के सांसद जॉन जेम्स ने भी स्वामीनारायण मंदिर का दौरा किया और हिंदू-अमेरिकी समुदाय की परंपराओं तथा सेवा भावना के बारे में जानकारी ली। इन कार्यक्रमों में नेताओं की भागीदारी से स्पष्ट है कि भारतीय समुदाय के साथ संपर्क स्थापित करने के लिए सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों को भी राजनीतिक संवाद का माध्यम बनाया जा रहा है। International News
अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की आबादी लगभग 52 लाख बताई जाती है। यह आबादी पूरे देश में समान रूप से नहीं फैली है। कैलिफोर्निया, टेक्सास, न्यू जर्सी और न्यूयॉर्क जैसे राज्यों में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी संख्या रहती है। इसके अतिरिक्त जॉर्जिया, पेंसिल्वेनिया, मिशिगन और वर्जीनिया जैसे राज्यों में भी भारतीय समुदाय की अच्छी उपस्थिति है। अमेरिकी चुनावों में किसी राज्य या संसदीय क्षेत्र में मुकाबला बेहद करीबी हो तो कुछ हजार या कुछ प्रतिशत वोट भी नतीजे को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे क्षेत्रों में भारतीय मूल के मतदाताओं से संपर्क करना उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की कुल आबादी और वोट डालने के पात्र नागरिकों की संख्या अलग-अलग है। अमेरिकी चुनावों में मतदान का अधिकार नागरिकता, आयु और अन्य निर्धारित शर्तों पर निर्भर करता है। इसलिए केवल आबादी के आधार पर किसी समुदाय के चुनावी प्रभाव का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। International News
अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की उपस्थिति अब केवल कुछ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है। उनका प्रभाव कारोबार, तकनीक, चिकित्सा, शिक्षा, प्रशासन और राजनीति जैसे क्षेत्रों में भी दिखाई देता है।
उपलब्ध जनसंख्या संबंधी आंकड़ों के अनुसार भारतीय मूल के लोगों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी कुछ प्रमुख राज्यों में केंद्रित है।
ये आंकड़े अमेरिका में रह रहे भारतीय मूल के लोगों के भौगोलिक वितरण से संबंधित हैं, न कि इन राज्यों के कुल मतदाताओं में भारतीय वोटरों की हिस्सेदारी से।
यही भौगोलिक एकाग्रता चुनावी मुकाबलों में भारतीय समुदाय को विशेष महत्व दिलाती है। International News
इस चुनाव में एक और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि भारतीय मूल के मतदाता किस राजनीतिक दल की ओर झुक रहे हैं। सितंबर 2026 में जारी एशियन एंड पैसिफिक आइलैंडर अमेरिकन वोट तथा एएपीआई डेटा के सर्वेक्षण में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के बीच डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के प्रति अधिक समर्थन दिखाई दिया। सर्वेक्षण में शामिल भारतीय-अमेरिकी उत्तरदाताओं में 66 प्रतिशत ने कांग्रेस के चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन करने की बात कही, जबकि 18 प्रतिशत ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों के पक्ष में रुझान बताया। सीनेट चुनावों के मामले में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में 66 प्रतिशत और रिपब्लिकन उम्मीदवारों के पक्ष में 22 प्रतिशत समर्थन दर्ज किया गया। यह सर्वेक्षण 242 भारतीय-अमेरिकी उत्तरदाताओं सहित व्यापक एशियाई-अमेरिकी मतदाता समूह पर आधारित था। इसलिए इसके आंकड़ों को सभी भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का अंतिम राजनीतिक रुझान नहीं माना जा सकता। एक अन्य अक्टूबर 2026 के सर्वेक्षण में भी भारतीय मूल के मतदाताओं के राजनीतिक रुझान में बदलाव के संकेत सामने आए हैं। इसमें महंगाई, स्वास्थ्य सेवाएं, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण बताए गए। International News
भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के बीच इस बार केवल सांस्कृतिक जुड़ाव ही चर्चा का विषय नहीं है। अमेरिका की आव्रजन नीतियां, वीजा संबंधी प्रतिबंध, महंगाई, स्वास्थ्य सेवाएं और अमेरिका-भारत संबंध भी चुनावी चर्चा में शामिल हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर भारतीय मूल के मतदाताओं में अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कुछ मतदाता आर्थिक नीतियों और कारोबार से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं, जबकि कुछ के लिए आव्रजन व्यवस्था, सामाजिक स्वीकार्यता और नस्लीय भेदभाव जैसे सवाल अधिक महत्वपूर्ण हैं। इसका अर्थ यह है कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय को किसी एक राजनीतिक दल का स्थायी समर्थक मानना उचित नहीं होगा। इस समुदाय के भीतर भी विचारों और राजनीतिक प्राथमिकताओं की विविधता है। International News
इस चुनाव की एक और खास बात यह है कि भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक केवल मतदाता या चुनावी चंदा देने वाले समुदाय के रूप में ही नहीं, बल्कि उम्मीदवार और निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भारतीय मूल के कई प्रमुख चेहरे रहे हैं। इनमें रो खन्ना, प्रमिला जयपाल, अमी बेरा और सुहास सुब्रमण्यम जैसे नाम शामिल हैं। 2026 के चुनाव में भी भारतीय मूल के कई उम्मीदवार अलग-अलग राज्यों और चुनाव क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें टेक्सास, कैलिफोर्निया, एरिजोना, फ्लोरिडा और ओहायो जैसे राज्यों के चुनाव विशेष रूप से चर्चा में हैं।
यह बदलाव बताता है कि अमेरिका में भारतीय मूल के नागरिकों की भूमिका अब केवल मतदाता तक सीमित नहीं रह गई है। वे राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नीति निर्माण में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। International News
अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मध्यावधि चुनाव होने हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर मतदान होगा। इसके साथ ही 36 राज्यों में गवर्नर पद के चुनाव तथा कई राज्य और स्थानीय स्तर के चुनाव भी होंगे। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इनके परिणाम राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच कांग्रेस में राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करते हैं। इस बार इन चुनावों के परिणाम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शेष दो वर्षों के लिए भी महत्वपूर्ण होंगे। ऐसे में भारतीय मूल के मतदाताओं तक पहुंचने के लिए अमेरिकी नेताओं की बढ़ती सक्रियता को केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। International News
अमेरिका में चुनाव प्रचार के इस नए अंदाज ने एक दिलचस्प तस्वीर सामने रखी है। जिस भारतीय समुदाय की पहचान कभी अमेरिका में मुख्य रूप से प्रवासी समुदाय के रूप में होती थी, आज उसी समुदाय को अमेरिकी नेता चुनावी संपर्क अभियान में विशेष महत्व दे रहे हैं। भारतीय रेस्टोरेंट में डोसा बनाना, मंदिरों में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेना, दीपावली समारोह में शामिल होना और भारतीय समुदाय के साथ सीधा संवाद करना इस बदलती राजनीतिक तस्वीर के उदाहरण हैं। हालांकि चुनाव में भारतीय मूल के मतदाता किस उम्मीदवार और किस पार्टी का समर्थन करेंगे, यह उनके अपने मुद्दों, विचारों और स्थानीय चुनावी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इतना जरूर है कि अमेरिका की चुनावी राजनीति में भारतीय समुदाय की उपस्थिति और उसकी अहमियत पर अब पहले से कहीं अधिक ध्यान दिया जा रहा है। अमेरिकी नेताओं के लिए भारतीय वोटर केवल एक प्रवासी समुदाय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने वाला एक महत्वपूर्ण मतदाता समूह बनकर उभरा है। International News
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