मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बना हुआ है। ईरान की ओर से इस क्षेत्र में बढ़ी सख्ती का असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर साफ दिखाई दे रहा है।

Iran-US War : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बना हुआ है। ईरान की ओर से इस क्षेत्र में बढ़ी सख्ती का असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर साफ दिखाई दे रहा है। खासतौर पर तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से कई देशों की चिंता बढ़ गई है। ऐसे माहौल में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर एक सकारात्मक खबर सामने आई है, जिसने वैश्विक शिपिंग जगत को कुछ राहत दी है।
ताजा जानकारी के अनुसार, होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते जोखिम को देखते हुए एक नया समुद्री रास्ता तैयार किया गया है। यह मार्ग ईरान के नियंत्रण वाले संवेदनशील क्षेत्र से अलग, ओमान की प्रादेशिक समुद्री सीमा के भीतर से होकर गुजरता है। इस वैकल्पिक रूट को फिलहाल सुरक्षित माना जा रहा है और इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हुए भारतीय मालवाहक जहाज समेत कुल चार बड़े पोत सफलतापूर्वक बाहर निकले हैं।
इस नए मार्ग से जिन पोतों ने सुरक्षित आवागमन किया है, उनमें एक भारतीय मालवाहक जहाज भी शामिल है। मौजूदा हालात को देखते हुए यह घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्योंकि होर्मुज जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी जहाज की सुरक्षित आवाजाही अब सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक महत्व का भी विषय बन चुकी है। ऐसे में भारतीय पोत का सुरक्षित निकलना भारत के लिए भी राहत की खबर है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस विभिन्न देशों तक पहुंचती है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर वैश्विक बाजार, ईंधन कीमतों और आपूर्ति शृंखला पर पड़ता है। ओमान के समुद्री क्षेत्र से होकर निकला यह नया रास्ता इस दबाव को कुछ हद तक कम कर सकता है और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है। Iran-US War