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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लंबे समय से जारी तनाव का असर अब भी वैश्विक शिपिंग नेटवर्क पर साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते के बाद इस रणनीतिक जलमार्ग को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद जगी है, लेकिन हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।

International Shipping Crisis : दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लंबे समय से जारी तनाव का असर अब भी वैश्विक शिपिंग नेटवर्क पर साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते के बाद इस रणनीतिक जलमार्ग को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद जगी है, लेकिन हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। फारस की खाड़ी में सैकड़ों जहाज अब भी फंसे हुए हैं और समुद्री व्यापार पूरी तरह पटरी पर लौटने का इंतजार कर रहा है। शिपिंग डेटा विश्लेषण कंपनी केपलर के अनुसार, वर्तमान में करीब 600 जहाज फारस की खाड़ी के भीतर रुके हुए हैं और बाहर निकलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वहीं बड़ी संख्या में खाली जहाज खाड़ी के बाहर खड़े हैं, जो मार्ग खुलते ही अपने गंतव्य की ओर बढ़ने के लिए तैयार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि कई जहाजों ने सुरक्षा कारणों से अपने ट्रांसपोंडर बंद कर रखे हैं। International Shipping Crisis
फंसे हुए जहाजों में भारत के ध्वज वाले 13 कार्गो पोत भी शामिल हैं। इन जहाजों पर कुल 562 भारतीय नाविक तैनात हैं, जो पिछले 107 दिनों से इस असाधारण संकट का सामना कर रहे हैं। केंद्रीय शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, 329 भारतीय नाविक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में मौजूद जहाजों पर हैं, जबकि 233 नाविक ओमान की खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं। लगातार बढ़ते तनाव के बीच इन नाविकों की सुरक्षा और वापसी को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। क्षेत्र में जारी संघर्ष के दौरान पिछले चार महीनों में 46 जहाजों पर विभिन्न प्रकार के हमले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा ईरान ने दो कंटेनर जहाजों को अपने नियंत्रण में भी लिया था। रिपोर्टों के मुताबिक भारतीय क्रू वाले पांच जहाज भी हमलों की चपेट में आए। इनमें दो घटनाओं के लिए ईरान और तीन के लिए अमेरिका को जिम्मेदार माना गया। लगातार बढ़ते खतरे के कारण कई शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी थी। International Shipping Crisis
सामान्य परिस्थितियों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख मार्ग माना जाता है। यहां से प्रतिदिन 80 से 130 जहाजों की आवाजाही होती थी और हर साल 30 हजार से अधिक टैंकर इस रास्ते का उपयोग करते थे। हालांकि संघर्ष बढ़ने के बाद यातायात में भारी गिरावट दर्ज की गई। मार्च के शुरुआती दिनों में प्रतिदिन औसतन केवल छह जहाज ही इस मार्ग से गुजर पाए। अप्रैल में पूरे महीने के दौरान सिर्फ 191 जहाजों की आवाजाही रिकॉर्ड की गई। पिछले दो महीनों में समुद्री ट्रैफिक सामान्य स्तर के केवल पांच प्रतिशत तक सीमित हो गया था। 10 जून को ईरान ने सभी वाणिज्यिक और तेल टैंकरों के लिए इस जलमार्ग को बंद करने की घोषणा कर दी थी, जिसके बाद स्थिति और गंभीर हो गई। International Shipping Crisis
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद समुद्री गतिविधियों में हलचल दिखाई देने लगी है। इसी बीच भारतीय एलएनजी टैंकर 'दिशा' को होर्मुज की दिशा में आगे बढ़ते हुए देखा गया है। यह टैंकर तीन महीने से अधिक समय से फारस की खाड़ी में रुका हुआ था। जहाज ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार यह वर्तमान में संयुक्त अरब अमीरात के उत्तरी समुद्री क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए ओमान के करीब पहुंच चुका है। इस पोत ने मार्च की शुरुआत में कतर के रास लाफान टर्मिनल से एलएनजी लोड की थी। International Shipping Crisis
हालांकि समझौते के बाद राहत की उम्मीद बनी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। उनका मानना है कि समुद्री सुरक्षा और नौवहन मार्गों की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने के बाद ही नियमित आवाजाही बहाल हो सकेगी। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि बड़ी संख्या में जहाज एक साथ निकलने की कोशिश करते हैं तो समुद्री जाम जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। इसके अलावा समुद्र में बिछी माइंस को हटाना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। ईरान का कहना है कि समुद्री माइंस हटाने में कम से कम 30 दिन का समय लग सकता है। ऐसे में विशेषज्ञों का अनुमान है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने के बाद भी वैश्विक शिपिंग व्यवस्था को युद्ध-पूर्व स्थिति में लौटने में कई सप्ताह या फिर कई महीने लग सकते हैं। International Shipping Crisis
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