भारत ने अमेरिका से क्रूड आयल आयात में 51% की बढ़ोतरी की, भारत का बड़ा दांव
जहां भारत अमेरिका से प्रतिदिन 0.18 मिलियन बैरल क्रूड आयात करता था वहीं 2025 में यह आंकड़ा 0.271 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है। अप्रैल-जून तिमाही में यह उछाल 114% तक दर्ज किया गया जो किसी भी द्विपक्षीय ऊर्जा साझेदारी में असाधारण माना जाएगा।
India's Big Bet :
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 11:59 AM
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद भारत ने अपने कच्चे तेल (क्रूड आयल) आयात की दिशा में बड़ा मोड़ लिया है। जनवरी 2025 से शुरू हुए इस बदलाव में भारत ने अमेरिका से कच्चे तेल का आयात 51 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है, जो कि ऊर्जा सहयोग के नए दौर की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है। India's Big Bet :
संख्याएं बोल रही हैं : आयात में जबरदस्त उछाल
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में जहां भारत अमेरिका से प्रतिदिन 0.18 मिलियन बैरल क्रूड आयात करता था, वहीं 2025 में यह आंकड़ा 0.271 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है। अप्रैल-जून तिमाही में यह उछाल 114% तक दर्ज किया गया जो किसी भी द्विपक्षीय ऊर्जा साझेदारी में असाधारण माना जाएगा। जुलाई 2025 में जून की तुलना में 23% अधिक क्रूड अमेरिका से आयात किया गया।
आर्थिक असर : 3.7 बिलियन डॉलर तक पहुंचा खर्च
वित्तीय आंकड़े बताते हैं कि 2024-25 की पहली तिमाही में भारत ने 1.73 बिलियन डॉलर का तेल आयात किया था, जबकि 2025-26 की पहली तिमाही में यह खर्च दोगुना से अधिक होकर 3.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। पहले भारत के कुल क्रूड इंपोर्ट में अमेरिका की हिस्सेदारी महज 3% थी। जुलाई 2025 में यह बढ़कर 8% हो गई। यानी अमेरिका अब भारत का एक प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका से क्रूड आॅयल इंपोर्ट को 150% तक बढ़ा सकता है।
केवल तेल नहीं, गैस में भी गहराया सहयोग
भारत ने अमेरिका से केवल क्रूड नहीं, बल्कि एलपीजी (एलपीजी) और एलएनजी (एलएनजी) का आयात भी काफी बढ़ाया है। 2024-25 में जहां एलपीजी आयात 1.41 बिलियन डॉलर था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 2.46 बिलियन डॉलर हो गया है। खबर है कि भारत और अमेरिका के बीच अरबों डॉलर का एलएनजी आपूर्ति करार भी अंतिम चरण में है।
रणनीति क्या कहती है?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस पर कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग अब हमारी रणनीतिक साझेदारी का अहम हिस्सा बन चुका है। यह साझेदारी साझा हितों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है। विश्लेषकों का मानना है कि यह बढ़ा हुआ आयात केवल बाजार की मजबूरी नहीं, बल्कि नई भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं का भी संकेत है। ट्रंप प्रशासन के साथ भारत व्यापारिक और कूटनीतिक तालमेल को मजबूती से आगे बढ़ाना चाहता है। भारत का यह कदम न केवल ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि नई वैश्विक परिस्थिति में भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए नए आर्थिक ब्लॉक बना रहा है। तेल और गैस के रास्ते अमेरिका से गहराता यह संबंध आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा और विदेश नीति दोनों को नई दिशा दे सकता है।